लव के साथ जिहाद, फैल रही है ये कैसी आग?


लव, प्रेम, प्यार, मोहब्बत, कितने नाजुक अल्फाज़ हैं ये किसने इनके साथ जिहाद जैसा शब्द जोड़ा है भाई जरा सामने तो आना.... ये किस दिमाग की कैसी उपज है जरा खुलकर तो बताना.... बार बार इस विषय पर सोचने से, बोलने से, लिखने से क्यों रोक दिया जाता है?

के नाम पर ये कैसा खतरनाक खेल चल रहा है इस देश में कितनी बच्चियां अपनी जिंदगियां खो चुकी हैं, कोई तो लेकर बैठो इनका बहीखाता..... क्यों बढ़ते जा रहे हैं ऐसे विभत्स मामले.... कब तक आंखें मूंदे रहेंगे हम... देश की शांति, सौहार्द्र, भाईचारा सबको पसंद है इधर भी और उधर भी फिर ये कौन लोग हैं जो अपने अपने धर्म के नाम पर खून से खेल रहे हैं और क्यों हम इन पर लिखने से भी कतरा रहे हैं, जो लिख रहे हैं वे भी बहुत बच बच कर..... क्यों भला?

एक महज निकिता की कहानी नहीं है, जो 26 अक्टूबर को मार डाली गई.... पिछले चंद महीनों के उपलब्ध समाचारों के हवाले से मिले आंकड़े बहुत डरावने हैं। 17 अक्टूबर को हैदराबाद में राधिका के साथ उसके पति ने कहानी दोहराई थी बेशक तरीका अलग था वहां चाकू था गला रेतने के लिए...

22 सितंबर को सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) में प्रिया सोनी मार डाली गई क्योंकि उसने अपने पति का धर्म स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। जुलाई 2020 में एक शख्स अपनी पत्नी प्रिया को मेरठ में मार डालता है कारण वही धर्मांतरण।

जून 2020 में हरियाणा में टिकटोक स्टार शिवानी अपने दोस्त के हाथों मारी जाती है और अपने ही ब्यूटी पार्लर में मृत पाई जाती है। फरवरी 2020 में हल्दिया में एक व्यक्ति रमा डे और रिया डे दोनों को जिंदा जला देता है क्यों‍कि दोनों को अपने के जाल में उलझा रखा था और बात खुलने पर यही एक रास्ता बचा था।

जनवरी 2020 में एक पति अपनी पत्नी रेशमा मंगलानी मौत के घाट उतार देता है क्योंकि उसे उसका फेसबुक पर सक्रिय रहना पसंद नहीं था.. अपने एक साल के बच्चे पर भी उसे तरस न आया और पत्थर से पत्नी का सिर कुचल दिया।

जुलाई 2019 में मॉडल खुशी परिहार का नागपुर में ‍मित्र के हाथों ईंटों से चेहरा ‍बिगाड़ दिया जाता है क्योंकि वह नहीं चाहता है कि किसी और के साथ भी खुशी की दोस्ती हो।
मानवी मल्होत्रा को मुंबई में मार दिया गया उसके विशेष धर्म के साथी ने... ।

ये वो चंद क्रूरतम आपराधिक झलकियां है जो पिछले एक साल में किसी धर्म विशेष की महिलाओं के खिलाफ किसी धर्म विशेष के पुरुष ने अंजाम दी है। आरोपी, कातिल और अपराधी के नाम पब्लिक डौमेन में हैं, आसानी से उपलब्ध हैं पर उनका उल्लेख किए बिना बस इतना संकेत दे सकते हैं कि कहीं कुछ तो है जो निहायत ही शर्मनाक है और उससे ज्यादा दर्दनाक है।

के नाम पर मौत का इंतजाम किया जा रहा है। धर्म के नाम पर अधर्म को फैलाया जा रहा है। प्यार के नाम पर प्रताड़ना परोसी जा रही है। के नाम पर लाज का सौदा किया जा रहा है। प्रेम के नाम पर प्रतिष्ठा की धज्जियां उड़ाई जा रही है। रिश्तों की आड़ में राक्षसी मनसूबे पाले जा रहे हैं। इस समय सबको सतर्क, सावधान और सजग होने की जरूरत है।




वास्तव में कुछ मामलों पर लिखने से इसलिए नहीं बचा जाता कि उन पर जानकारी नहीं है या लिखने का मन नहीं है बल्कि इसलिए भी बचा जाता है कि उससे कुछ बहुत प्यारे संबंध असहज हो जाते हैं।

मैं मानती हूं कि सब ऐसे नहीं, मैं मानती हूं कि सब बुरे नहीं लेकिन कुछ तो है ना, लव और जिहाद जैसे शब्दों की आड़ में कुछ तो है ना जो बहुत भयावह है, बहुत डरावना और घिनौना है...तो उस पर तो बात की जाए, उससे क्यों कर बचा जाए....यह मकड़जाल तोड़ना और उससे पहले उसे समझना जरूरी है वरना निकिता, राधिका, प्रिया, शिवानी, खुशी, मानवी और रेशमा जैसे नामों की सूची बढ़ती रहेगी.... और फिर कोई विज्ञापन आएगा बेटी की रस्म निभाने और बहू को अपना बनाने के लिए....सूटकेस, ईंट, पत्थर, चाकू, आग, बंदूक, पेट्रोल और तेजाब के साथ....






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