shradh paksha
✕

हिन्दी कविता : इस सावन में...

Written By WD
Updated: सोमवार, 22 जून 2015 (11:57 IST)
-शैली बक्षी खड़कोतकर 
इस सावन में 
तन शीतल 
मन निर्मल 
हो जाए इस पावस में
नील गगन के काले बदरा
कुछ बरसो ऐसे सावन में
           ताप से यूं झुलस गई है 
           मन की सूनी धरती 
           चटक न जाए कहीं, देखो
           आस के नाजुक मोती   
निर्झर बहती अश्रुधार को  
मिल जाए बूंदों का संग 
इसी बहाव पर पार कर लेंगे 
जीवन की डगमग कश्ती
         मन-आँगन धुल जाए
         हर कोना पावन हो जाए 
         मुक्त करो हमको, हमसे
         रहे न किसी बंधन में 
 नील गगन के काले बदरा 
कुछ ऐसे बरसो सावन में ..
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

कब मनाया जाएगा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें कब हुई इसकी शुरुआत और क्‍या है उद्देश्‍य?

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

World Sight Day: क्‍यों मनाते हैं विश्व दृष्टि दिवस? जानिए इसका महत्‍व और इतिहास

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास

भगवान के ठेकेदार और चमत्कार का कारोबार, सोशल मीडिया पर धर्म के नाम पर फैलता अंधविश्वास