स्टीव जॉब्स: Stay Hungry Stay Foolish, Apple के संस्थापक से जानिए सफलता पाने के मूल मंत्र

यदि हम किसी से पूछें कि आधुनिक इतिहास में सबसे बड़ा बिजनेस इनोवेटर कौन है, एक ऐसा इनोवेटर जिसने कभी भी क्वॉलिटी से समझौता नहीं किया। जिसके व्यवसाय प्रबंधन, नवाचार (Innovation) और भविष्य देखने की अंतर्दृष्टि ने मोबाइल और कम्प्युटर की दुनिया को बदल कर रख दिया तो एक ही नाम सामने आएगा,स्टीव जॉब्स! इसका सबसे बड़ा कारण है कि स्टीव प्रौद्योगिकी की अग्रणी और दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक, के संस्थापक थे, जो की अतुलनीय सोच का आईना है।

इस लेख में हम चर्चा करेंगे, स्टीव जॉब्स की बायोग्राफी "Steve Jobs" पर। यह अमेरिकी बिजनेस मैग्नेट और एप्पल इंक के संस्थापक स्टीव जॉब्स की अधिकृत बायोग्राफी है। इसे जॉब्स के अनुरोध पर CNN और TIME के पूर्व कार्यकारी वॉल्टर इसाकसन द्वारा लिखा गया था, जिन्होंने बेंजामिन फ्रैंकलिन और अल्बर्ट आइंस्टीन की बेस्टसेलिंग आत्मकथाएं भी लिखी हैं।

हम उनके जीवन के कुछ सबसे प्रेरक प्रसंगों और सफलता के फॉर्मूले के साथ-साथ स्टीव की जिंदगी की सीख का पता लगाएंगे जिसने उनकी अभूतपूर्व सफलता की बुनियाद रखी। स्टीव को करीब से जानने के बाद वॉल्टर इसाकसन ने स्टीव के मिनिमलेस्टिक (minimalist) और परफेक्शन के मंत्र को अपनाते हुए इस 448 पृष्ठ की बायोग्राफी का शीर्षक iSteve: The Book of Jobs से बदल कर सिर्फ 'Steve Jobs' कर दिया।

आमतौर पर बिजनेस-गुरु और मार्केट लीडर्स व्यवसाय में सफलता के लिए बढ़िया नेटवर्किंग और बड़ी मार्केटिंग स्ट्रेटजी बनाने के बारे में आपको बताते हैं, लेकिन स्टीव जॉब्स में लीक से हटकर (outside the box) सोचने और अपने आस-पास के लोगों को लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मोटिवेट करने की क्षमता थी। उनके द्वारा अपनाई गई इनोवेटिव मार्केटिंग स्ट्रेटेजी, मिनिमलेस्टिक डिजाइन और समय से आगे की इंजीनियरिंग ने Apple Inc. को विश्व का अग्रणी ब्रांड बना दिया।
जीवन की सीख:
Innovation distinguishes between a leader and a follower: स्टीव जॉब्स का मानना था कि इनोवेशन एक लीडर और एक फॉलोअर में अंतर बताता है।

स्टीव जॉब्स ने नए विचारों के साथ नए डिजाइन का निर्माण जारी रखा जिससे उन्हें व्यापार में बढ़त मिली। उनका मानना है कि डिजाइन सिर्फ वही नहीं है जो दिखता है और जैसा लगता है। डिजाइन का मतलब है यह कैसे काम करता है।

स्टीव जॉब्स हमेशा पूर्णता की खोज के लिए जाने जाते थे। किसी भी उत्पाद बनाने के प्रति उनका दृष्टिकोण सरल था-त्रुटिहीन उत्पाद ही एकमात्र उत्पाद हैं जो उपभोक्ता के हाथ में होने चाहिए। इस सोच की शैली को व्यवसाय के सभी पहलुओं पर लागू किया जा सकता है, सीधे शब्दों में कहें - कुछ ऐसा न बेचें जो आप खुद नहीं चाहते।

स्टीव जॉब्स को अब तक के सबसे सफल उद्यमियों में से एक माना जा सकता है। वह आम लोगों के लिए तकनीक के माध्यम से दुनिया बदलना चाहते थे। उनका कहना है कि अलग और बेहतरीन प्रोडक्ट बनाने के लिए हमेशा याद रखे की आप अपने लक्ष्य को कैसे हासिल कर रहे हो? हमेशा आगे बढ़ने के लिए अवसरों को ढूंढते रहो, ताकि स्वयं का निर्माण कर सको। कभी कुछ भी पीछे न छोड़ें, जो कुछ भी करने की आप कोशिश कर रहे हैं उसे पाने की लगातार कोशिश करते रहें। अधिकांश लोगों का मानना ​​है कि संपूर्णता की खोज उनकी निरंतर आवश्यकता थी जिसने उन्हें अपने लक्ष्यों पर दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया, लेकिन उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा अपने बाद यादगार विरासत छोड़ने की इच्छा थी जिसने सब कुछ बदल दिया।
Stay Hungry Stay Foolish -स्टीव की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है कि सफलता के लिए हमेशा भूखे रहो और सीखने के लिए हमेशा तैयार रहो। इस बात की व्याख्या हमेशा उत्सुक रहने के रूप में की जा सकती है, नई चीजों को आजमाने के लिए तत्पर रहें या अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलने के लिए तैयार रहें के रूप में की जा सकती है। यह हमें सिखाता है कि कभी भी बड़े और बेहतर लक्ष्यों का पीछा करना बंद न करें।

हममें से बहुत से लोग एक आरामदायक जीवन, अच्छी तनख्वाह के आदी हो जाते हैं और एक जैसे रूटीन के बीच अपनी मूल प्रेरणा खो सकते हैं।

जब स्टीव जॉब्स को उनकी कंपनी से निर्वासित कर दिया गया था तो उन्हें इतना मुआवजा मिला था कि वे एक धनवान व्यक्ति के रूप में सेवानिवृत्त हो सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने इनोवेशन जारी रखे और अपने कुछ दोस्तों के साथ नेक्स्ट इंक की स्थापना की, जिन्होंने एप्पल को भी छोड़ दिया था। यह जीवन मंत्र
बताता है कि कभी भी बड़ी और बेहतर चीजों का पीछा करना बंद न करें।

स्टीव जॉब्स की सफलता का श्रेय उनके द्वारा सीखे गए जीवन पाठ (Life Lessons)
को दिया जा सकता है, जिसमें प्रतिकूल परिस्थितियों को दूर करने और कठिनाई में जुनून खोजने के तरीके शामिल हैं।


1985 में, एप्पल के निदेशक मंडल के भीतर अन्य हाई-प्रोफाइल हस्तियों के साथ कई असहमतियों के बाद, स्टीव ने Apple में अपना इस्तीफा सौंप दिया। जिस कंपनी को उन्होंने बनाया, इस मुकाम पर पहुंचाया उसी से उन्हें हटना पड़ा।

उस समय व्यापार जगत में यह ख्याल आम था कि यह स्टीव जॉब्स का अंत निकट है और ऐसा लग रहा था कि अब उनका करियर लगभग समाप्त है। परन्तु 10 साल में ही उनकी सोच के बिना एप्पल बंद होने की कगार पर पहुंच गई और Apple बोर्ड ने स्टीव को वापस लाने का फैसला लिया। स्टीव एक दशक से अधिक समय के बाद फिर से लौट आए थे।

1997 में Apple द्वारा NeXT के अधिग्रहण के बाद, जॉब्स Apple के CEO बने। उन्होंने 1997 में "थिंक डिफरेंट" विज्ञापन अभियान के साथ आईमैक, आईट्यून्स, आईट्यून्स स्टोर, ऐप्पल स्टोर, आईपॉड, आईफोन, ऐप स्टोर के लिए अग्रणी उत्पादों की एक श्रृंखला विकसित करने के लिए डिजाइनर जॉनी इवे के साथ मिलकर काम किया। 2001 में, मूल मैक ओएस को पूरी तरह से नए मैक ओएस एक्स (अब मैकोज़ के रूप में जाना जाता है) के साथ बदल दिया गया था, जो नेक्स्ट के नेक्स्टस्टेप प्लेटफॉर्म पर आधारित था, जिससे ओएस को पहली बार एक आधुनिक यूनिक्स-आधारित नींव दी गई थी।
"Think different" advertising campaign को आज भी बिजनेस स्कूल्स में केस स्टडी के तौर पर बताया जाता है कि कैसे उन्होंने विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त की और निरंतर सफलता प्राप्त की, उन्होंने साबित किया कि विफलता भी प्रोडक्टिव होती है और उससे सबक लेकर सफलता पाना संभव है। यह बिलकुल ऐसा है जिसे हम सभी अपना सकते हैं।

अपना 100% देना जारी रखें
: आज बिजनेस की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में शिखर पर बने रहना सबसे मुश्किल काम है। एक बार सफल प्रोडक्ट बनाने के बाद हमें उसे और बेहतर के लिए सोचना और काम करते रहना चाहिए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे Apple ने अपने सभी प्रतिस्पर्धियों पछाड़ते हुए शिखर पर बने रहने के लिए संघर्ष किया। स्टीव ने पहला आईफोन 2007 में जारी किया था और उस समय इसे ओएस 1.0 सॉफ्टवेयर के साथ फोन उद्योग में एक माइल स्टोन माना जाता था।

वहां से, कंपनी ने हर साल कम से कम एक नया फोन लाने के लक्ष्य पर ध्यान दिया। निरंतर नवाचार (inovation)करना और अपनी क्षमता की सीमाओं को आगे बढ़ाना एक मंत्र है जो Apple ने स्टीव की मृत्यु के बाद भी जारी रखा और न केवल iPhone की कई जनरेशन को जारी किया है, बल्कि नए iPods, iMacs,iPads यहां तक iWatch को भी अपडेट करते रहे। हर साल सितंबर में इन नए प्रोडक्टस की लॉन्चिंग का सिलसिला अब भी जारी है।
पैशनेट रहें
: स्टीव का एक और सबक है कि आप जो करते हैं उसके बारे में पैशनेट रहें। सफल होने के लिए, आप जो काम कर रहे हैं, उसके बारे में पैशनेट होना महत्वपूर्ण है,और यह एक ऐसी चीज है जिसने एप्पल को सर्वश्रेष्ठ बनाया।स्टीव ने सर्वश्रेष्ठ के लिए कभी समझौता नहीं किया, उन्होंने अपने काम के हर पहलू में पूर्णता के लिए प्रयास किया, एक ऐसा व्यवसाय बनाने का दृढ़ संकल्प किया जिस पर उन्हें गर्व हो।

अपने गैरेज में कंप्यूटर के साथ करियर की शुरूआत से लेकर एक कंपनी की सह-स्थापना तक, जिसकी कीमत अब $200bn से भी अधिक है, स्टीव ने Apple को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए हर दिन बहुत मेहनत की। यहां तक ​​कि 2011 में अपनी मृत्यु से एक दिन पहले तक वह कंपनी के लिए काम कर रहे थे, अपने काम के प्रति अपना अटूट समर्पण दिखा रहे थे।

उनका मानना था कि उच्च गुणवत्ता के लिए, आप जो काम कर रहे हैं, उसकी परवाह करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपनी बायोग्राफी में बताया है कि उन्हें परफेक्शन की सीख अपने पिता से मिली, स्टीव बताते हैं कि मेरे पिता सही काम करना पसंद करते थे। उन्होंने उन हिस्सों के लुक की भी परवाह की जिन्हें आप नहीं देख सकते थे। एप्पल के किसी भी प्रोडक्ट में स्टीव जॉब्स के पिता की यह सीख देखी जा सकती है।

अपने अंतिम दिनों में कैंसर का पता चलने पर उन्होंने अपनी आसन्न मृत्यु पर विचार करते हुए बेहद महत्वपूर्ण सीख दी थी,The people who are crazy enough to think they can change the world are the ones who do उन्होंने कहा था कि जो लोग पागलपन की हद तक मानते हैं कि वे दुनिया को बदल सकते हैं, वही ऐसा कर सकते हैं। ध्यान रखिए आपका पास सीमित समय है, इसलिए इसे किसी और का जीवन जीने में बर्बाद न करें। दूसरों की राय के शोर से अपनी आत्मा की आवाज को डूबने न दें। और सबसे महत्वपूर्ण, अपने दिल और अंतरात्मा की बात मानने का साहस रखें।

जॉब्स को 2003 में पैंक्रिएटिक न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर का पता चला था। 5 अक्टूबर, 2011 को 56 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई।



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