सलासी-तीन मिसरों की छोटी-छोटी नज़्में ND उस माँ की नज़्र जिसकी मोहब्बत का ज़िक्र क्या... (समर्पित) धुंधला सा अक्स भी न हुआ देखना नसीब... (छवि) 1. एक मेहमान आने वाला है इस क़दर खुश है उसकी माँ घर में जैसे भगवान आने वाला है 2. क्या ये आँखों को खोलता...