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Happy Mothers Day : मदर्स डे पर पढ़ें छोटी-छोटी नज़्में
एक मेहमान आने वाला है इस क़दर खुश है उसकी मां घर में जैसे भगवान आने वाला है -
आरबीआई गवर्नर बने उर्जित पटेल, क्या बोली कांग्रेस...
नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर के रूप में उर्जित पटेल की नियुक्ति को लेकर केन्द्र पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने आज कहा कि ... -
सिकन्दर हमीद इरफ़ान की शायरी
क़रीब बीस साल पहले एक नौजवान खन्डवा से आकाशवाणी के इन्दौर केन्द्र पर युवाणी प्रोग्राम में अपना कलाम सुनाने के लिए मदऊ ... -
कुर्बानी का त्योहार : ईदुज्जुहा
बक़र ईद को आम आदमी बकरा ईद भी कहता है। शायद इसलिए कि इस ईद पर बकरे की क़ुर्बानी की जाती है। वैसे इस ईद को ईदुज़्ज़ोहा औए ... -
कुर्बानी का त्योहार : ईदुज्जुहा
बक़र ईद को आम आदमी बकरा ईद भी कहता है। शायद इसलिए कि इस ईद पर बकरे की क़ुर्बानी की जाती है। वैसे इस ईद को ईदुज़्ज़ोहा औए ... -
अहमद फ़राज़ की ग़ज़लें
हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू कहाँ गया है मेरे शहर के मुसाफ़िर तू -
मोमिन की ग़ज़लें
अगर ग़फ़लत से बाज़ आया जफ़ा की तलाफ़ी की भी तो ज़ालिम ने क्या की -
फ़ाज़िल अंसारी के अशआर
इतना न अपनी क़िस्मत-ए-रोशन पे नाज़ कर चढ़ता है आफ़ताब तो ढलता ज़रूर है आया था अपने गाँव से दामन में लेके फूल जाता ... -
आज तुम याद बेहिसाब आए
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं ------फ़ैज़ -
ग़ालिब की ग़ज़ल (शे'रों के मतलब के साथ)
दुनिया में आसान से आसान काम भी मुश्किल होता है। जिसका सुबूत ये है कि आदमी वैसे तो इंसान ही है लेकिन फिर भी इसका मुकम्मल ... -
ग़ालिब के अशआर और उनके माअनी
ख़ुदा की बनाई हुई हर चीज़ फ़ना होने वाली है। हर चीज़, हर तस्वीर का लिबास काग़ज़ का है जो कभी भी जल सकता है, गल सकता है, फ़ना ... -
दिनेश चंचल की ग़ज़लों की पहली किताब 'इज़हार'
उर्दू के रस्मुलख़त को लेकर एक बहस बरसों से जारी है। कुछ अदबी शख़्सियतों ने ज़ोर देकर कहा है कि उर्दू अब देवनागरी में लिखी ... -
दहशत गर्दी का खात्मा सूफ़ीइज़्म से-प्रो. सादिक़
प्रो. सादिक़ की मादरी ज़ुबान उर्दू है लेकिन उन्हें हिन्दी, मराठी, गुजराती, सिन्धी, पंजाबी, वग़ैरा ज़ुबानें न सिर्फ़ आती हैं ... -
मोमिन खाँ मोमिन
बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के उस्ताद थे शायर ज़ौक़। जो शायर बादशाह का उस्ताद होगा उसमें कुछ तो ख़ूबियाँ ज़रूर होंगी लेकिन ... -
बच्चे की माँ
उस माँ की नज़्र जिसकी मोहब्बत का ज़िक्र क्या...धुंधला सा अक्स भी न हुआ देखना नसीब..एक मेहमान आने वाला है इस क़दर खुश है ... -
नई किताब 'चमन-दर-चमन'
इन्दौर से धार ज़्यादा दूर नहीं है। आबादी और रक़बे में इन्दौर से धार बहुत छोटा है, इन्दौर एक सिनअती शहर है तो धार के लोगों ... -
गुलमोहर
मुझ को खुशी मिली, तेरे जीवन से गुलमोहर तू मेरे दिल के साथ है बचपन से गुलमोहर रग़बत दर-ओ-दीवार से मुझ को नहीं ज़रा मैं ... -
क्या बताऊँ किस तरह जीता है दोस्त
मुझको अपने ग़म से ही फ़ुरसत नहीं क्या बताऊँ किस तरह जीता है दोस्त दिन में जो हँस-हँस के मिलता है 'अज़ीज़' रात में उठ-उठ ... -
सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते-जाते
बेशक ग़ज़ल, शायरी की सबसे मकबूल सिन्फ़ (विधा) से है। लेकिन इसकी मकबूलियत में चार चाँद लगाए हैं कुछ शायरों और कुछ ग़ज़ल ... -
मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी और जनाब रेहबर जोनपुरी
उर्दू हिन्दुस्तान की ज़ुबानों में अपने लबो-लेहजे की तवंगरी और शीरीनी की बाइस हरदिल अज़ीज़ और मक़बूले आम है। इस ज़ुबान की ...
