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कोरोना काल में अपने बच्चे को कैसे समझाएं, पढ़ें उपयोगी जानकारी

गुरुवार,मार्च 11, 2021
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अक्सर देखा गया है कि किसी बच्चे की खराब आदतों को देखकर लोग फब्तियां कसते हैं कि इस बच्चे को अच्छे संस्कार नहीं मिले। क्या संस्कारों को जबरन किसी बच्चे पर थोपा जा सकता है या कॉपी-पेन लेकर यह संस्कार उन्हें रटाए जा सकते हैं?
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ठंड/ सर्दी के मौसम में नवजात शिशु को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इस मौसम में सुबह-शाम चलने वाली ठंडी हवा शिशु के लिए नुकसानदेह होती है। इससे बचने के लिए शिशु को गर्म ऊनी कपड़े पहनाकर रखें। जिससे शिशु का बदन गरम रहे।
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प्रतिवर्ष 15 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक सुरक्षित मातृत्व सप्ताह मनाया जाता है। मां का दूध बच्चों के लिए अमृत होता है, जो हर बीमारी से उसकी रक्षा करता है। आइए जानें कैसे कराएं अपने शिशु को स्तनपान
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टिकटॉक पर रातोंरात प्रसिद्ध हो जाने की भूख इन्हें शार्टकट की ओर बेतहाशा दौड़ा रही है। ये अंतहीन है। अपनी जान की भी परवाह नहीं है इन्हें। अपना अच्छा-बुरा सोचने समझने की शक्ति इन एप्स को इन्होने गिरवे रख दी है। ऐसे कई उदाहरण रोज हमारे सामने हैं।
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शांत रात्रि में जब बच्चा गोद में आता है तब हृदय में पैदा होने वाले स्पंदन से निकलती हैं ये मीठी मधुर लोरियां। कभी धुन नहीं होती तो कभी शब्द नहीं होते…ध्वनि होती है, भावनाएं होती हैं। लोरियां बनती बिगड़ती रहती हैं।
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विरासत में मिले ये खेल अपने बच्चों को प्रयोग करके सीखने की कला के साथ साथ रचनात्मकता का गुण भी विकसित करते हैं। चूंकि खिलौने उनके द्वारा निर्मित किए गए हैं तो उनकी कमियों को सुधारने के लिए जिज्ञासु होते हैं जो उन्हें नए अविष्कार की ओर प्रेरित करते ...
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खिलौने वही सच्चे होते हैं जिनके साथ खेलते समय उनके टूटने का भय न हो।नए युग के अधिकांश महंगे खिलौनों के साथ ये डर मुफ्त में चला आता है। खेलने से ज्यादा इन्हें सम्हालकर खेलने की हिदायत का जोर आनंद में बाधा बना रहता है। बच्चे निडर भाव से खेलें, आनंद ...
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पुरानी सेल, माचिस के डिब्बियां, पुराने डब्बे या ऐसी ही मिलती-जुलतीं चीजों से रेलगाड़ी बना लेते। ज्यादा हुनरमंद तो इनमें छोटे ढक्कन या कोल्डड्रिंक की झब्बियों के पहियें भी लगा देते। पुराने दीपकों, डब्बों, झब्बियों के तो मंजीरे और तराजू बनाना प्रिय शगल ...
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गर्मी की छुट्टियां वैसे हमारे लिए लॉक डाउन का ही एक प्रकार हुआ करती थी। बल्कि ये कह सकते हैं कि अघोषित कर्फ्यू ही लगता था। ननिहाल हो या ददिहाल सभी जगह यही आलम। शाम घाम(धूप) जब कम होती तब घर से बाहर निकल के धमा-चौकड़ी मचा सकते थे।
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काम पर नहीं जा पारहे हैं ? बच्चों के स्कूल बंद हैं? हम सभी घर में हैं... स्कूल बंद होने का मतलब है हमें अपने बच्चों के ज्यादा करीब आने का मौका मिला है,यह हम पर निर्भर करता है कि कैसे हम उनके साथ क्वालिटी टाईम बिताते हैं....वेबदुनिया टीम ने खास आपके ...
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परीक्षाओं का दौर शुरू हो गया है। इन दिनों अभिभावकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं और बच्चों के दिमाग में पल रहे तनाव को साफ-साफ महसूस किया जा सकता है। अभिभावक सोचते हैं कि बच्चे मेहनत कर लें, अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो ...
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वैसे तो चुकंदर सभी के लिए बेहद फायदेमंद है, क्योंकि यह शरीर में खून बढ़ाने के साथ ही कई तरह के फायदे भी देता है। लेकिन प्रेग्नेंसी में अगर डायटीशियन की सलाह से आप इसका सेवन करती हैं, तो यह दोगुना फायदेमंद हो सकता है।
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ऐसे कई विद्यार्थी होते है जिन्हें रात में पढ़ाई करना ज्यादा भाता है व कई बार परीक्षा की घड़ी में रात-रात भर जागकर पढ़ने की जरूरत पड़ती है। अगर आप भी देर रात तक जागकर पढ़ाई करना चाहते हैं तो हम आपके लिए लेकर आए हैं कुछ आसान से टिप्स जिन्हें अपनाकर आपको
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क्या आप जानते है कि हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग क्या होती है? अगर नहीं तो अब जान लीजिए और खुद को भी परख लीजिए कि कही आप जाने-अनजाने हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग तो नहीं बन गए हैं।
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अधिकांश लड़कियां अपने नाखूनों को बढ़ाती हैं और उन्हें लंबे रखना पसंद करती हैं। अगर आप भी नाखून बढ़ाना पसंद करती हैं, तो आपको ये नहीं मालूम होगा कि ऐसा करना सेहत के साथ जोखिम लेने जैसा है। जानिए, नाखून बढ़ाने से सेहत को
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9 महीनों की गर्भावस्था के बाद मां बनना बेहद सुखद एहसास है, लेकिन मां और नवजात शिशु की सेहत के लिहाज से नाजुक समय भी यही होता है। मां बनने के बाद दर्द, पेट संबंधी एवं अन्य समस्याएं सेहत को काफी हद तक प्रभावित करती हैं।
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डायरिया वह सेहत समस्या है जिसमें बच्चों को दिन भर में तीन या उससे भी अधिक बार पानी की तरह पतले दस्त होना। इसके अलावा कई बार बुखार और उल्टी भी होती है। ऐसे में बच्चों में
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सावन सोमवार का व्रत अविवाहित हो या विवाहित अधिकांश महिलाएं रखती हैं। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट है तो आपको ये व्रत व अन्य कोई भी व्रत इस दौरान रखने से बचना चाहिए, वरना ये आपके साथ ही आपके शिशु को
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मानसून में बच्चों को बीमारियां जल्द ही अपनी चपेट में ले लेती है। इसलिए इस मौसम में बच्चों के खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। आइए, जानते हैं मानसून में बच्चों को बीमार होने से बचाने के लिए 5
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