बोतल का दूध है नुकसानदेह

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आजकल काम की व्यस्तता में कामकाजी महिलाएँ या व्यस्त गृहिणियाँ अपने शिशुओं को बोतल से पिलाना ज्यादा आसान समझती हैं। क्योंकि अब उनके पास बच्चे को गोद में लिटाकर चम्मच से दूध पिलाने के लिए समय और धैर्य दोनों की कमी है।

* कई माताएँ जो कांशियस होती हैं वे भी बच्चे को करवाने से कतराती हैं। लेकिन बच्चे को बोतल से दूध पिलाने से कई हानियाँ हैं। बच्चों को बोतल से दूध पिलाने पर उनके शरीर पर गहरा और हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

* कई बार माताएँ सोते हुए बच्चे के मुँह में बोतल लगा देती हैं इससे कभी-कभी गले की नली में ही दूध की कुछ मात्रा रह जाती है, जिससे बच्चे को साँस लेने में कठिनाई होती है और उसके फेफड़ों में निमोनिया जैसी भयंकर बीमारी भी हो सकती है। इसके अलावा बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में पेट के संक्रमण की कई बीमारियाँ, जैसे डायरिया, दस्त आदि होते रहते हैं।

* लगातार बोतल से दूध पीने वाले बच्चे चबाने वाली चीजें ज्यादा नहीं खाते, क्योंकि उन्हें चूसने की अपेक्षा चबाना अधिक कष्टदायक लगता है। नतीजतन बच्चे को कब्ज की शिकायत हो जाती है।

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* अगर बच्चे की जल्दी ही बोतल छुड़वा दी जाए तो उसका एक फायदा यह भी होता है कि उसे समय से सब कुछ खाने की पड़ जाती है। उचित मात्रा में आहार लेने की वजह से उसका शारीरिक विकास भी उचित रूप से होता है। जिस बच्चे को जितना अधिक स्तनपान कराया जाता है, उस बच्चे के मधुमेह से पीड़ित होने का खतरा उतना ही कम होता है।



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