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दया, प्रेम, करुणा एवं अहिंसा के प्रणेता भगवान महावीर की जयंती

शुक्रवार,अप्रैल 16, 2021
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अहिंसा के पालनकर्ता कौन? सामान्य-सा जवाब होगा महावीर को मानने वाले जैन मतावलंबी, गांधी के अनुयायी। लेकिन क्या वास्तव में मात्र जैन कुल में जन्म लेने वाला
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने 'कैवल्य ज्ञान' की जिस ऊंचाई को छुआ था वह अतुलनीय है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के ...
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जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंककर भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक नहीं प्रतिपादक थे। उन्होंने श्रमण संघ की परंपरा को एक व्यवस्थित रूप दिया।
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भगवान महावीर स्वामी के चौंतीस भव (जन्म) इस प्रकार हैं -
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भगवान महावीर स्वामी ने पंचमहाव्रत की शिक्षा दी है। यह ज्ञान उनसे पूर्व वेदों में और उनके बाद पतंजली योग सूत्र में मिलेंगे। पंच महाव्रत का पालन करने वाले को किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता। वह पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है।
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भगवान महावीर स्वामी के उपदेश आज भी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। अहिंसा का मार्ग अपना कर दुनिया को बचाया जा सकता है। वर्तमान में परिस्थितियां बहुत बिगड़ गई है। लोग हिंसा का मार्ग अपना कर अपना ही अहित करने लगे है।
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओत-प्रोत था। उन्होंने एक लंगोटी तक का परिग्रह नहीं रखा।
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भगवान महावीर स्वामी ने भय और अहिंसा के बारे में बहुत कुछ कहा है। यहां यह समझता जरूरी है कि अहिंसा भय नहीं निर्भिक व्यक्ति का स्वभाव है। यहां इस संबंध में छोटा सा सूत्र।
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महावीर जयंती पर अवश्‍य पढ़ें मंगलमयी श्री महावीर चालीसा का पाठ
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रंग लाग्यो महावीर, थारो रंग लाग्यो, थारी भक्ति करवाने म्हारो भाव जाग्यो ॥ रंग लाग्यो…॥
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यहां पढ़ें जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की आरती। जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो।
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भगवान महावीर ने विभिन्न विषयों पर दुनिया के लोगों के लिए संदेश दिए हैं। जिन्हें हम महावीर के उपदेश के नाम से जानते हैं। यहा हमने महावीर स्वामी आत्मा पर दिए गए उपदेश प्रस्तुत कर रहे हैं। आप भी जानिए क्या कहते हैं भगवान महावीर-
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कैवल्य ज्ञान क्या है यह समझाना मुश्‍किल है। यहां संक्षिप्त में ही जानें। इसमें कोई संशय नहीं कि महावीर का मार्ग पूर्णत:, स्पष्ट और कैवल्य ज्ञान प्राप्त करने का मार्ग है। यह राजपथ है। उनके उपदेश हमारे जीवन में किसी भी तरह के विरोधाभास को नहीं रहने ...
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वेदों में अहिंसा के सूत्र मिलते हैं। कई अन्य अहिंसक लोग भी हुए हैं। अहिंसा पर प्रवचन देने वाले भी अनेक हैं, लेकिन महावीर स्वामी सबसे अलग हैं और उनकी अहिंसा की धारणा भी कहीं ज्यादा संवेदनशील है। संसार के प्रथम और अंतिम व्यक्ति हैं भगवान महावीर, ...
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दुनिया एक झमेला है, आने-जाने का एक मेला है, अनन्त बार जन्म लिए अनन्त बार मरण किए।
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भारत में अधिकतर हिन्दू महावीर स्वामी की मूर्ति देखते हैं तो वे उसे बुद्ध की मूर्ति मान बैठते हैं। हिन्दुओं को तो ज्यादा शिक्षा की जरूरी है क्योंकि वे खुद के ही धर्म और समाज को ही अच्छी तरह नहीं जानते हैं। तभी उनकी बुद्धि में ज्यादा विरोधाभास और भ्रम ...
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जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओत-प्रोत था। उन्होंने एक लंगोटी तक का परिग्रह नहीं रखा।
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प्रत्येक वर्ष भगवान महावीर की जन्म-जयंती हम मनाते हैं। समस्त विश्व में जैन समाज और अन्य अहिंसा प्रेमी व्यक्तियों द्वारा बड़े हर्ष और उल्लास के साथ उनकी जयंती मनाई जाती है।
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यहां पढ़ें जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की आरती।
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