dharma sangrah
✕

यहां बैठकर वेद व्यास ने कही और गणेशजी ने लिखी थी महाभारत

Updated: सोमवार, 22 अक्टूबर 2018 (15:46 IST)
व्यास पोथी नामक स्थान बद्रीनाथ से 3 क‌िलोमीटर की दूरी पर उत्तराखंड के माणा गांव में स्थित है। यहां महाभारत के रचनाकार महर्षि वेद व्यासजी की गुफा है। इसके समीप ही गणेश गुफा है, मान्यता है की इसी गुफा में व्यासजी ने महाभारत को मौखिक रूप दिया था और गणेशजी ने उसे लिखा था। जहां यह कथा लिखी गई थी वह गुफा अलकनंदा और सरस्वती नदी के संगम तट पर मौजूद है।
 
माता पावर्ती और भगवान शिव के पुत्र गणेश जी मंगलकर्ता और ज्ञान एवं बुद्घि के देवता माने जाते हैं। इसलिए जब भी कोई नया काम शुरू किया जाता है तो सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। वेदव्यास जी ने जब महाभारत महाकाव्य की रचना शुरू की तब उन्होंने न सिर्फ गणेश जी का स्मरण किया बल्कि गणेश जी को इस बात के लिए भी तैयार कर लिया कि आप महाभारत खुद अपने हाथ से लिखें।
 
गणेश जी ने कहा कि मैं महाभारत लिख तो दूंगा लेकिन आप लगातार कथा बताते रहना होगा अन्यथा यदि आपकी कथा रुकी तो मेरी लेखनी तो रुकेगी ही साथ ही मैं लेखन का कार्य भी छोड़ दूंगा। फिर आपकी कथा पूर्ण हो या अधूरी। कहते हैं व्यास जी ने भी नियम का पालन किया। पहले महाभारत का नाम जय गाथा था।
 
कहा जाता है कि यहां स्थित गुफा में रहकर वेदव्यास जी ने सभी पुराणों की रचना भी की थी। व्यास गुफा को बाहर से देखकर ऐसा लगता है मानो कई ग्रंथ एक दूसरे के ऊपर रखे हुए हैं। इसलिए इसे व्यास पोथी भी कहते हैं।
 
माना जाता है की उत्तराखंड में अवस्थित पांडुकेश्वर तीर्थ में अपनी इच्छा से राज्य त्याग करने के बाद महाराज पांडु अपनी रानियों कुंती और मादरी संग निवास करते थे। इसी स्थान पर पांचों पांडवों का जन्म हुआ था।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

शारदीय नवरात्रि 2026: मां कालरात्रि की पूजा विधि, मंत्र, आरती और पौराणिक कथा जानें

विजयादशमी का महाउपाय: 100 रुपए की इस एक दिव्य वस्तु से चमक जाएगी आपकी किस्मत

शारदीय नवरात्रि: व्रत पारण की तिथियाँ एवं सही नियम

दशहरा 2026: शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? जानें सही विधि और धार्मिक महत्व

विजयादशमी 2026: दशहरा पर दशहरी देने की परंपरा क्या है, जानिए इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व

अगला लेख