MP विधानसभा उपचुनाव : सांची में 2 चौधरियों के बीच है दिलचस्प मुकाबला

Last Updated: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020 (15:33 IST)
सांची। मध्यप्रदेश के सांची विधानसभा उपचुनाव में 2 'चौधरियों' के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां से राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा उम्मीदवार डॉ. प्रभुराम चौधरी एक बार फिर विधानसभा में पहुंचने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सांची विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में 7 बार तो पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती 3 सभाएं कर चुकी हैं। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री भी कांग्रेस प्रत्याशी मदनलाल चौधरी के पक्ष में 3 सभाएं ले चुके हैं।
दलबदल कर वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ इसी वर्ष मार्च माह में भाजपा में शामिल हुए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी को अपना मंत्री पद बचाने के लिए हर हाल में यह उपचुनाव जीतना होगा। डॉ. चौधरी, सिंधिया के कट्टर समर्थकों में शुमार हैं, इसलिए परोक्ष रूप से यहां पर सिंधिया की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने यहां से पूरन सिंह अहिरवार को मैदान में उतारा है। चुनाव विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर भी टिकी हैं कि अहिरवार चुनाव में कुछ ठोस कर पाएंगे या फिर मुख्य प्रत्याशियों के वोट में सेंध लगाने में सफल होंगे। सांची में कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में।
दूसरी ओर मध्यप्रदेश में सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा के पहले से स्थापित नेताओं और कार्यककर्ताओं के बीच कथित असंतोष की खबरों के बीच सभी की निगाहें सांची क्षेत्र में भाजपा के पूर्व मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, उनके पुत्र मुदित शेजवार और उनके समर्थकों पर भी टिकी हैं। दरअसल जब डॉ. प्रभुराम चौधरी कांग्रेस में थे, तो वे भाजपा नेता डॉ. शेजवार के परंपरागत प्रतिद्वंद्वी थे।
वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में डॉ. चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर डॉ. शेजवार के पुत्र एवं भाजपा प्रत्याशी मुदित शेजवार को पराजित किया था। इसके पहले भी डॉ. शेजवार और डॉ. चौधरी कई चुनावों में आमने सामने आ चुके हैं।

राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार डॉ. चौधरी का विधानसभा में पहुंचना इस बात पर भी अधिक निर्भर करेगा कि उन्हें 2 पूर्व 2 मंत्री रामपाल सिंह और सुरेंद्र पटवा का भी कितना 'दिली समर्थन' मिलता है और वे डॉ. शेजवार तथा डॉ. चौधरी के बीच के रिश्तों को कितना मधुर और प्रगाढ़ बना पाते हैं। डॉ. शेजवार एक तरह से राजनीति से संन्यास लेकर अपने पुत्र मुदित को ही आगे बढ़ाते हुए नजर आते हैं।

विदिशा सीट से भाजपा सांसद रमाशंकर भार्गव ने यूनीवार्ता से चर्चा के दौरान पार्टी में अंतर्कलह से साफ तौर पर इंकार नहीं किया और सफाई देते हुए कहा कि डॉ. शेजवार और मुदित शेजवार व्यक्तिगत कारणों से कुछ सभाओं में शामिल नहीं हो पाए थे, लेकिन अब वे सक्रिय हैं, वहीं पूर्व मंत्री एवं क्षेत्रीय चुनाव प्रभारी रामपाल सिंह ने कहा कि 'दूध में शक्कर' घुलने में समय तो लगता हैं।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि चूंकि कांग्रेस प्रत्याशी मदनलाल चौधरी और भाजपा के डॉ. चौधरी एक ही समाज से आते हैं, इस स्थिति में बसपा प्रत्याशी पूरन अहिरवार की उपस्थिति ने अवश्यक इनकी चिंताएं बढ़ाई हुई होंगी। इसलिए ये देखना रोचक है कि अहिरवार किस दल के प्रत्याशी के वोट में सेंध लगाने में सफल होते हैं।

सांची क्षेत्र के लिए कांग्रेस के मीडिया प्रभारी भूपेंद्र गुप्ता का दांवा है कि कांग्रेस उम्मीदवार चौधरी की चुनाव में जीत पक्की है, क्योंकि दलबदल के कारण यहां के मतदाता भाजपा उम्मीदवार डॉ. प्रभुराम चौधरी से नाराज हैं। अब चुनाव परिणाम से ही पता चल सकेगा कि किसके दांवे में कितना दम है। सांची विधानसभा क्षेत्र के इतिहास पर नजर डाली जाए, तो 1998 से लेकर 2018 तक यहां पर 5 विधानसभा चुनाव हुए हैं और इसमें से 3 बार भाजपा के डॉ. गौरीशंकर शेजवार विजय दर्ज कराई तो 2 बार कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर के डॉक्टर प्रभुराम चौधरी जीते।
वर्ष 1998 में भाजपा नेता डॉ. शेजवार ने कांग्रेस के प्रभुराम चौधरी को 3130 मतों के अंतर से हराया। डॉ. शेजवार राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सुभाष कामता बाबू को 14806 मतों के अंतर से शिकस्त दी और 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के डॉ. प्रभुराम चौधरी ने भाजपा के डॉ. शेजवार को 9197 मतों के अंतर से पराजित किया। वर्ष 2013 के चुनाव में डॉ. चौधरी कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में 20936 मतों के भारी अंतर से भाजपा के डॉ. शेजवार के हाथों पराजित हुए थे।
वर्ष 2018 के चुनाव में डॉक्टर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत में ही कांग्रेस के डॉ. प्रभुराम चौधरी से पराजित हो गए। देखने वाली बात यही होगी कि 3 नवंबर को मतदान के बाद 10 नवंबर को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में दर्ज मतों की गिनती के साथ सांची का अगला विधायक कौन होगा। सांची विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 40 हजार 745 मतदाता हैं जिनमें से महिला मतदाता 1 लाख 12 हजार 370 और पुरुष मतदाता 1 लाख 28 हजार 366 हैं। (भाषा)



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