मध्यप्रदेश में 2023 विधानसभा चुनाव में केजरीवाल और ओवैसी किसका खेल बिगाड़ेंगे?

Author विकास सिंह| पुनः संशोधित सोमवार, 18 जुलाई 2022 (17:55 IST)
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भोपाल। में सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखे जा रहे नगरीय निकाय चुनाव में 2023 में होने वाले फाइनल मुकाबले की तस्वीर साफ कर दी है। 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक डेढ़ साल पहले हुए निकाय चुनाव के पहले चरण की रिजल्ट इस बात का साफ इशारा है कि 2023 के विधानसभा चुनाव का मुकाबला काफी दिलचस्प होने जा रहा है।

निकाय चुनाव में जिस तरह से की आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईआईएम ने अपनी जोरदार दस्तक दी है वह बताता है कि मध्यप्रदेश का 2023 विधानसभा चुनाव में मुकाबला बहुकोणीय होगा। निकाय चुनाव के परिणाम बताते है कि आम आदमी पार्टी और ओवैसी की पार्टी दोनों ही 2023 विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर भाजपा और कांग्रेस का खेल बिगाड़ने की ताकत के रूप में उभर रही है।

2023 में क्या बनेगी विकल्प?-मध्यप्रदेश में सिंगरौली महापौर पद पर अपना कब्जा जमाकर आम आदमी पार्टी ने जोरदार एंट्री की है। सिंगरौली में आम आदमी पार्टी की जीत को सियासी गलियारे में काफी चौंकाने वाली जीत माना जा रहा है। सिंगरौली महापौर पद पर अपना कब्जा जमाने के साथ आम आदमी पार्टी ने प्रदेश के 17 पार्षद पदों पर भी अपना कब्जा किया है। इसमें पांच प्रत्याशी सिंगरौली नगर निगम से चुनाव जीते है। वहीं ग्वालियर में की महापौर उम्मीदवार रूचि गुप्ता ने 50 हजार वोट हासिल कर जोरदार चुनौती दी है।



वहीं सिंगरौली के साथ आम आदमी पार्टी ने ग्वालियर-चंबल संभाग में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। मुरैना के पोरसा नगर पालिका में एक सीट जीतकर आम आदमी पार्टी ने चंबल की राजनीति में जोरदार एंट्री दर्ज की है। टीकमगढ़ की ओरछा नगर परिषद के वार्ड नंबर 3 में भी आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी गीता कुशवाहा ने जीत हासिल की है।

सिंगरौली में आप उम्मीदवार रानी अग्रवाल के महापौर का चुनाव जीतने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा “आप की मध्य प्रदेश में धमाकेदार एंट्री’। वहीं नगरीय निकाय चुनाव में जोरदार जीत के बाद मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी के हौंसले बुलंद है।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज सिंह कहते हैं कि दिल्ली मॉडल को मध्यप्रदेश की जनता अब विकल्प के रूप में देख रही है। अब वो दिन दूर नहीं जब मध्यप्रदेश में भी आम आदमी का राज होगा और दिल्ली जैसा परिवर्तन पूरे मध्यप्रदेश में करके दिखाएंगे।

2023 में ओवैसी बिगाड़ेंगे खेल?- आम आदमी पार्टी के साथ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने भी अपनी जोरदार दस्तक दी है। नगरीय निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने जबलपुर, खंडवा और बुराहनपुर में 4 पार्षद पदों पर जीत के साथ जोरदार दस्तक दी है। वहीं खंडवा और बुराहनपुर में एआईएमआईएम के महापौर उम्मीदवारों को दस हजार से अधिक वोटर मिलना पार्टी की लोकप्रियता को साबित करता है।

इसके साथ बुराहानपुर में ओवैसी की पार्टी के महापौर उम्मीदवार कांग्रेस उम्मीदवार की हार की बड़ी वजह भी माना जा रहा है। बुरहानपुर में एआईएमआईएम की प्रत्याशी कनीज़ बी को लगभग 10 हजार वोट मिले जबकि बुरहानपुर में भाजपा की महापौर उम्मीदवार माधुरी पटेल ने ने मात्र 542 वोटों से कांग्रेस उम्मीदवार शहनाज अंसारी को हराया।

वहीं खंडवा नगर निगम के चुनाव में छत्रपति शिवाजी वार्ड नंबर 14 से एआईएमआईएम की प्रत्याशी शकीरा बिलाल ने कांग्रेस की चार बार पार्षद रही मजबूत प्रत्याशी नूरजहां को 285 वोट से को हराते हुए वार्ड पार्षद का चुनाव जीत लिया। खंडवा में एआईएमआईएम के चलते कई वॉर्ड में कांग्रेस उम्मीदवारों की हार की बड़ी वजह भी साबित हुई।

जबलपुर में एआईएमआईएम ने दो वार्डो में जीत हासिल कर महाकौशल में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई है। नगरीय निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद अब ओवैसी की नजर 2023 विधानसभा चुनाव पर टिक गई है। अब देखना होगा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल और ओवैसी की एंट्री किसका खेल बिगाड़ती है।




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