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विक्रमादित्य ने सुशासन के प्रतिमान स्थापित किए, 2 हजार साल बाद भी उनके आदर्श प्रासंगिक: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

Updated: गुरुवार, 19 मार्च 2026 (14:53 IST)
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रवीन्द्र भवन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत कोटि सूर्य उपासना कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गुड़ी पड़वा है। संपूर्ण सृष्टि में गुड़ जैसी मिठास फैल गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में आज से नव संवत्सर एवं नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि नव संवत्सर सृष्टि के आरंभ दिवस की अमृत बेला को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला पर्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से एक नए संवत् और भारतीय नववर्ष का प्रारंभ हो गया है। हमारे यहां संवत् सृष्टि के साथ, प्रकृति के सानिध्य में और शासक के पुरुषार्थ से प्रारंभ होता है। सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को परास्त किया। तत्कालीन समाज के अराजक तत्वों और आतताईयों का दमन किया। उन्होंने अपनी संपूर्ण प्रजा को कर्जमुक्त बनाया। सच्चे अर्थों में सामाजिक सद्भाव की नींव रखी। वे लोकतंत्र के महानायक थे। उनके पुरुषार्थ से ही प्रारंभ किया गया विक्रम संवत् आज 2083 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य के ओजस्वी शासन उनके शौर्य, साहस, पराक्रम एवं न्याय के प्रतिमानों को आत्मसात करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास किया। हम समाज के हर वर्ग के चहुंमुखी विकास के लिए प्रयासरत हैं। हमने वीर विक्रमादित्य शोधपीठ सहित वैदिक घड़ी की भी स्थापना की है।
 
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ब्रम्ह ध्वज की स्थापना कर कहा कि यह ध्वज हमें सदैव एकजुट रहकर देश-प्रदेश की सेवा करने की प्रेरणा देता है। विक्रमोत्सव-2026 के आयोजन में निहित भावों और इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी शासन व्यवस्था से राज व्यवस्था को लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलने का सूत्रपात्र किया। उनका नेतृत्व और राज-काज शैली ऐसी थी, जिसमें बाद के शासकों को जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था के लिए प्रेरित किया। आज यदि दो हजार साल बाद भी सम्राट विक्रमादित्य को याद कर रहे हैं, तो इसके पीछे यह भाव परिलक्षित होता है कि भारत राष्ट्र की सरकार और राज्य सरकारें, वीर विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था को अंगीकृत करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज स्वस्फूर्त और अनुशासित समाज है। हमने हमेशा जियो और जीने दो सहित सबको लेकर चलने की भावना से जीना सीखा है। सम्राट विक्रमादित्य ने लोकतंत्र को बढ़ावा दिया, इसी से लोकतंत्र के सूत्र हम भारतीयों के शरीर में रक्त की तरह प्रवाहित है और अब यह हमारे अस्तित्व की पहचान भी बन गया है।
 

लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें

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