गुस्से में छिपा प्यार
मानसी
हेलो दोस्तो! भावनाओं के बिना रिश्ते का काम नहीं चलता है। व्यावहारिकता से संभाला हुआ रिश्ता यूं तो बहुत ही संवारा, सजाया हुआ दिखता है पर उसमें कोई जान नहीं होती है। एक रोबोट कितना ही सक्षम क्यों न हो पर उसमें भरे हुए प्रोग्रामिंग से अलग उसे चाहे जितना भी सरल सा काम या प्रश्न दिया जाए वह उसे हल नहीं कर सकता है। ऐसी घड़ी में उसकी सारी एक्यूरेसी धरी रह जाती है। इसीलिए बेहद व्यावहारिक रिश्ते में सब कुछ अपने सही ठिकाने पर होने के बावजूद वह खुशी या संतुष्टि नहीं मिलती है जो मिलनी चाहिए।भावनाओं के कारण कई बार रिश्ते में उथल-पुथल सी महसूस होती है पर थोड़ा-बहुत झटका भी रिश्ते को नई गति देता है। इसी प्रकार नाराजगी या गुस्से को भी रिश्ते में एक ऊंचा मुकाम हासिल है। अक्सर रिश्ते में किसी के गुस्से को लेकर यही राय बनती है कि उसे प्यार नहीं है। पर गुस्से और नाराजगी का ताल्लुक प्यार नहीं या कम होने के बजाय प्यार अधिक होने से भी हो सकता है। गुस्से के कारण कई बार दोनों ही नकारात्मक ढंग से सोचने लगते हैं और मानते हैं कि अब रिश्ता समाप्त कर देना चाहिए। शायद यह सही कदम नहीं है।प्रेरणा (बदला हुआ नाम) भी कई बार अपने पति के गुस्से से परेशान होकर उसे छोड़ने का मन बना लेती है। उसे उलझन इस बात से होती है कि उसकी चिंता करने में भी उसका पति गुस्सा करता है और कभी प्रेरणा उसके मन के अनुरूप काम नहीं करती है तब भी वह गुस्सा ही करता है। प्रेरणा को यही महसूस होता है कि उसका पति उसे प्यार नहीं करता है जबकि उसके पति का दावा है कि वह उससे बेहद प्यार करता है।प्रेरणा जी, अपने पति पर विश्वास करें, वे झूठ नहीं बोलते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि उन्हें आपसे प्यार है। इसका सबूत है उनका आपके लिए छोटी-बड़ी तकलीफों के लिए चिंता व फिक्र करना। सही समय पर आपके खाना नहीं खाने या बीमारी में दवाई की अनदेखी करने पर एक प्यार करने वाला साथी ही गुस्सा कर सकता है। उनके इस प्रकार भड़क उठने से आपको उसमें हमदर्दी नहीं बल्कि झगड़े का भान होता है और आपको लगता है कि इतना चीखने-चिल्लाने से बेहतर है कि वह आपको आपके हाल पर छोड़ दें।दरअसल, एक ही बात को कह-कहकर वह भी थक चुके हैं। जब कोई व्यक्ति अपने आपको अधिक असहाय महसूस करता है तो वह ज्यादा चीखता-चिल्लाता है। आपको लगता है, आप भी समझदार हैं और अपना खयाल रख सकती हैं इसलिए इतना शोर-गुल की जरूरत नहीं है। हर व्यक्ति का अपना स्वभाव होता है। आप तो उनके इसी स्वभाव यानी परवाह करने वाले स्वभाव के कारण प्यार करने लगी थीं फिर अब क्यों बुरा लग रहा है। शायद शांति से की गई चिंता से प्रेम टपकता है और गुस्से व नाराजगी से प्यार की भावना काफूर हो जाती है। सच तो यह है कि यदि आपके पति सेहत से खिलवाड़ वाली बातों पर बिल्कुल ही प्रतिक्रिया देना बंदकर दें तो आपको कितना बुरा लगेगा इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकती हैं। भारी सामान उठाना आपको मना है और आप उठाकर खुद को चोट पहुंचा लें फिर भी आपके पति उस पर कुछ भी प्रतिक्रिया न दिखाकर केवल काम की बातें करते रहें तो शायद आपके मन में यही प्रश्न कौंधेगा कि अब उन्हें आपसे प्रेम नहीं रहा। आपके मन में यही विचार आएगा कि अब उन्हें केवल घर चलाने की चिंता है, घर में चाहे कोई मरे या जीए। विश्वास करें ऐसी खामोशी, निष्ठुरता या व्यावहारिकता में आपका दम घुट जाएगा।बेशक आप भाग्यशाली हैं जो अब भी आपके पति का प्रेम बना हुआ है। हां, यह सही है कि किसी भी भावना का उग्र रूप या अति उसके मौलिक गुण को नष्ट कर देता है। उन्हें बदलने के बजाय आप थोड़ा सचेत हो जाएं। आपकी जिन लापरवाहियों से उनका पारा गर्म होता है, उन्हें न करें। जो उन्हें पसंद है उस बात का खयाल रखें। क्या अपने प्रेम को बचाने के लिए आप इतना भी नहीं कर सकती हैं। आपने पहले पे्रम किया फिर उसे एक मंजिल तक पहुंचाया यानी घर बसाया। क्या अपने बसे-बसाये संसार को केवल आलस और लापरवाही की भेंट चढ़ा देंगी। यकीन मानें जब आपके पति को यह महसूस होगा कि आप उन बातों का खयाल रख रही हैं जो उन्हें पसंद हैं तो वह भी आगे बढ़कर अपना व्यवहार ठीक करना चाहेंगे। अभी उनके गुस्से के कारण आप चिढ़कर और लापरवाही करती हैं, जवाब में उनका गुस्सा और बढ़ जाता है। इतने प्यारे से रिश्ते को जानबूझकर बेवकूफी में खत्म करने के बजाय इसे समय रहते संभाल लें क्योंकि अभी भी आपके रिश्ते में प्यार बाकी है।