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प्रशासन की अति

सावधानी से बढ़ती है परेशानी

लोकसभा चुनाव प्रशासन आयोग आचार संहिता
नईदुनिया ब्यूरो
राजनीतिक दल चुनाव आचार संहिता के कड़ाई से पालन करने को उचित मानते हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि इस मामले में जनहित के कामों और पहले से चले आ रहे विकास कार्यों पर आयोग की तरफ से कोई रोक नहीं है, कई बार सिर्फ स्थानीय प्रशासन के अति सावधानी भरे कड़े कदमों से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए राजनीतिक दलों और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कौन सा काम मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए है और कौन सा काम जनहित में आवश्यक है।

कांग्रेस : पार्टी प्रवक्ता मोहन प्रकाश कहते हैं कि चुनाव आचार संहिता में नई घोषणाओं और मतदाताओं को लुभाने के लिए किए जाने वाले कामों और सरकारी साधनों के उपयोग पर रोक है। इसमें कांग्रेस को कोई एतराज नहीं है। कांग्रेस हमेशा निष्पक्ष और दबाव रहित मतदान की पक्षधर है। इसलिए चुनाव आचार संहिता के पालन पर पार्टी को कोई एतराज नहीं है। फिर अगर कहीं जनहित में कोई कदम उठाना जरूरी हो तो उसके लिए सरकार या प्रशासन आयोग से अनुमति लेकर ऐसा कर सकता है।

भाजपा : पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर भी कहते हैं चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सत्ताधारी दल किसी भी तरह मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश न कर सके। इसके लिए आचार संहिता का पालन ही एकमात्र तरीका है। जहां तक विकास कार्यों के जारी रहने की बात है,तो चुनावों की घोषणा होने से पहले स्वीकृत और जारी विकास कार्यों पर कोई रोक नहीं है। रोक सिर्फ नई घोषणाओं और चुनाव के बाद मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किए जाने वाले कामों पर रोक है।
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