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अमेरिका ने चाबहार को बनाया निशाना, क्या है इस ईरानी शहर का भारत से कनेक्शन?
सीजफायर खत्म होते ही अमेरिका ने दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार समेत कई ईरानी शहरों पर बड़ा हमला किया। अमेरिकी सेना की एयर स्ट्राइक से चाबहार और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इस हमले से चाबहार में दहशत फैल गई। ALSO READ: अमेरिकी हमलों से दहले ईरान के 8 शहर, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के पास धमाके
अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह शहर पर अमेरिकी सेना ने पहली बार हमले किए हैं। बताया जा रहा है कि इस हमले में चाबहार को भारी नुकसान हुआ।
चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत प्रमुख भागीदार
ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख भागीदार है। यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं का केंद्र है। चाबहार बंदरगाह केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि भारत के लिए भू-राजनीतिक सेतु है। यह अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस के साथ व्यापार का मुख्य मार्ग है। यह 7,200 किलोमीटर लंबे अंतराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का हिस्सा है, जो यूरोप तक पहुंच आसान बनाता है। ALSO READ: ईरान ने जारी किया अयातुल्ला खामेनेई के घर पर हमले का वीडियो, मलबे में तब्दील दिखा पूरा परिसर
2015 से चाबहार में निवेश कर रहा है भारत
भारत ने 2015 से इस परियोजना में निवेश शुरू किया और मई 2024 में भारत की कंपनी India Ports Global Limited (IPGL) ने ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का समझौता किया। भारत बंदरगाह के आधुनिकीकरण और संचालन में वित्तीय व तकनीकी सहयोग दे रहा है।
क्यों खास है चाबहार बंदरगाह
भारत ने 2023 में चाबहार बंदरगाह का उपयोग अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं की सहायता भेजने के लिए किया था। इसके पहले 2021 में इसके जरिए ईरान को पर्यावरण के अनुकूल कीटनाशकों की आपूर्ति भी की गई थी। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है। इसे आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से जोड़ने की योजना है। 7200 किलोमीटर लंबा ये गलियारा भारत को ईरान, अजरबैजान के रास्ते होते हुए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ेगा।
बजट में चाबहार के लिए नहीं था पैसा
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्तवर्ष 2026-27 के लिए पेश आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए धनराशि आवंटित नहीं की गई थी।
