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लोहड़ी है बहन-बेटियों का त्योहार, जानिए पौराणिक महत्व

Updated: बुधवार, 12 जनवरी 2022 (19:15 IST)
Lohri Festival 2022: खेतों में सरसों के फूल लहराते दिखाई देते हैं। वर्ष की सभी ऋतुओं पतझड, सावन और बसंत में कई तरह के छोटे-बड़े त्योहार मनाए जाते हैं, जिन में से एक प्रमुख त्योहार लोहड़ी है जो बसंत के आगमन के साथ 13 जनवरी, पौष महीने की आखरी रात को मनाया जाता है। इसके अगले दिन माघ महीने की सक्रांति को माघी के रूप में मनाया जाता है। वैसाखी त्योहार की तरह लोहड़ी का सबंध भी पंजाब के गांव, फसल और मौसम से है। इस दिन से मूली और गन्ने की फसल बोई जाती है। इससे पहले रबी की फसल काटकर घर में रख ली जाती है। लोहड़ी के त्योहार को नववधू, बहन, बेटी और बच्चों का उत्सव माना जाता है। आओ जानते हैं इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।
 
 
क्या है पौराणिक मान्यता : पौराणिक मान्यता अनुसार सती के त्याग के रूप में यह त्योहार मनाया जाता है। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष के यज्ञ की आग में कूदकर शिव की पत्नीं सती ने आत्मदाह कर लिया था। उसी दिन की याद में यह पर्व मनाया जाता है। यही कारण है कि इस त्योहार में बहन और बेटियों का बहुत महत्व माना जाता है।
 
 
नववधू, बहन, बेटी और बच्चों का उत्सव : पंजाबियों के लिए लोहड़ी उत्सव खास महत्व रखता है। जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है। प्राय: घर में नव वधू या बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष होती है। इस दिन बड़े प्रेम से बहन और बेटियों को घर बुलाया जाता है।
 
बच्चों का उत्सव : गांवों में पौष मास के पूर्व से ही लड़के-लड़कियां और बच्चे लोहड़ी के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले एकत्रित करते हैं। इसी से मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है। 
 
नव विवाहित लड़के या जिन्हें पुत्र होता है उनके घर से पैसे लेकर अपने क्षेत्र में रेवड़ी बांटते हैं ये काम बच्चे करते हैं। लोहड़ी के दिन या उससे कुछ दिन पूर्व बच्चे मोहमाया या महामाई का चंदा मांगते हैं, इनसे लकड़ी एवं रेवड़ी खरीदकर सामूहिक लोहड़ी में उपयोग में लाते हैं।
 
कहते हैं कि कुछ लड़के दूसरे मुहल्लों में जाकर 'लोहड़ी' से जलती हुई लकड़ी उठाकर अपने मुहल्ले की लोहड़ी में डाल देते हैं। इसे 'लोहड़ी व्याहना' कहलाता है। कई बार इस कार्य में छीना झपटी और झगड़े भी होते हैं। लोहड़ी के दिन विशेष पकवान बनते हैं जिसमें गजक, रेवड़ी, मुंगफली, तिल-गुड़ के लड्डू, मक्का की रोटी और सरसों का साग प्रमुख होते हैं। लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी हेतु लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं। 

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