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5 अप्रैल की रोशन रात… जैसे जीने के जज्‍बे और जीतने की उम्‍मीद का कोई द‍िन उग आया हो

रविवार,अप्रैल 5, 2020
5 April 2020
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अगर ये लोग बीमार होते हैं, तो न तो कोई डॉक्‍टर है देखने वाला और न ही कोई अस्‍पताल उनलब्‍ध है इनके इलाज के ल‍िए।
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ब्रिटेन में एक मां को अपने बेटे का अंतिम संस्कार ‘ऑनलाइन’ देखना पड़ा।
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तो बांटने की प्रथा को जारी रखते हुए.. आज बांटते हैं.. रोशनी..नन्हे दीप की.. जो जले मेरी देहरी पर,उजाला हो तेरे आंगन में .... जो जले तेरी देहरी पर,उजाला हो मेरे मन में.. इस तरह जले करोड़ों दीये और उजाला हो.. इस धरा पर,उस गगन में .. समूची दुनिया ...
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हवा का रुख़ देखकर लगता है कि लोगों की बेचैनी बढ़ रही है, वे पहले के मुक़ाबले ज़्यादा नाराज़ होने लगे हैं और अकेलेपन से घबराकर बाहर कहीं टूट पड़ने के लिए छटपटा रहे हैं।
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ये अपने इंदौर को किसकी नजर लग गई रे!! डिठौना लगा दो मिल कर इसकी सुंदर, सलोनी, स्वच्छ शक्ल पर...माथे किनारे लगायें काजल का टीका....और बचाएं इसे बुरी नजर से, हम सब मिल कर. नजर उतारो इसकी पावन कलश विधान से जो है सबके लिए एक सामान. उतारो नजर इसकी ...
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आइये, चलें...कोरोना के इस घनघोर अंधकार की लड़ाई में एक और ज्योति-प्रकाश अध्याय जोड़ने चलें। सिर्फ नौ मिनिट...क्योंकि ये लड़ाई है दिए की और तूफान की। पर अंत में हमेशा ऐसे तूफान रूपी अन्धकार को भी हार मान लेनी पड़ेगी जब हमारा पूरा देश अपनी देहरी पर अपने ...
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल, रविवार को रात्रि नौ बजे देशवासियों से एक दिया जलाने, प्रकाश करने की अपील क्या कर दी कि देश की मोदी विरोधी राजनीति में जलाजला सा आ गया। सबसे पहले कांग्रेस नेता श्री अधीररंजन चैधरी ने मीडिया पर आकर घोषित ...
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दरअसल रॉय ने राजनीति से लेकर गरीबी और स्वास्थ्य आदि से जोड़ते हुए एक लेख लिखा है। इसी लेख के बाद उनका नाम ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगा। ज‍िसमें लोगों ने उन्‍हें खूब आलोचना की।
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जमात सम्मेलन के भागीदार देश में कोरोना संक्रमण के बड़े प्रसारक साबित हो रहे हैं। जमात में अनेक राज्यों के साथ विदेशी भी शामिल हुए थे।
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जमात सम्मेलन के भागीदार देश में कोरोना संक्रमण के बड़े प्रसारक साबित हो रहे हैं। जमात में अनेक राज्यों के साथ विदेशी भी शामिल हुए थे।
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कोरोना की लड़ाई के बीच एक हरकत फिर की जा रही है वह है दो संप्रदायों के बीच वैमनस्य की खाई को चौड़ा करने की...सोशल मीडिया पर किसी हीबा बेग़ के लेख का हुसैन हैदरी द्वारा किया अनुवाद चल रहा है जिसका शीर्षक है ' भारत में मुसलमान होने का मतलब'...इस लेख ...
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क्‍या यह दुन‍िया की पर‍िभाषा बदलने वाला दृश्‍य है। या यूं कहें क‍ि प्रकृति‍ धीरे-धीरे जीवन का कॉन्‍सेप्‍ट बदल रही है।
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ऐसा भी नहीं है कि प्रश्नों की तीक्ष्ण वर्षा कर कुछ ढूंढ़ने का प्रयत्न कर रहा हूं जिसके लिए यह सब कहना पड़ रहा है।
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कवि‍ता: क्वारंटाईन और दीवारें

शुक्रवार,अप्रैल 3, 2020
कितना कुछ सुनना चाहती हैं ये दीवारें..!
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अब 23 साल की संजना कई द‍िनों से इटली के म‍िलान शहर में अकेली है।
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जैसे जीते जी तुम्हारी आत्मा भटक रही है और तुम उसे भटकते हुए देख रहे हो।
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भीतर मेरे कई मुखौटे, कई पहरे परछाइयां,कई तहों में छिपे सिमटे, बंद आंखों में भीतर गुपचुप!
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चिकित्सकों ने सीमित ज्ञान से चेचक हैजा जीता, अब अथक ज्ञान समुद्र से कोरोना जंग जीत लेंगे !
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राजधानी दिल्ली के चर्चित शाहीनबाग़ और प्रसिद्ध सूफ़ी संत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह के बीच ज़मीनी फ़ासला लगभग दस किलो मीटर का है जिसे बीस मिनट में तय किया जा सकता है।
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