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महिला दिवस पर सिर्फ एक दिन ही क्यों हो सम्मान...?

बुधवार,फ़रवरी 26, 2020
महिला दिवस 2020
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ओशो रजनीश के पत्रों के संकलन से एक कथा- बात उस समय की है जब लाइट नहीं थी। लोगों ने अंधकार को दूर करने के बहुत उपाय सोचे, पर असफल रहे। तब एक चिंतक ने कहा- हम अंधकार को टोकरियों में भरकर गड्ढों में डाल दें। ऐसा करने से धीरे-धीरे अंधकार समाप्त हो
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अपने दैनिक जीवन में हम प्रायः कंफर्ट अर्थात् सुविधा को प्राथमिकता देते हैं। ठंडी हवा चाहिए, तो कूलर है, एसी है। गर्मी चाहिए, तो हीटर है। पानी गर्म करना हो, तो गीजर है।
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जहां की यह दास्‍तान है वहां के लोग अतीत की इस खौफनाक कहानी की आहटभर से आज भी कांप जाते हैं, सहम जाते हैं।
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साहित्यिक समागम से आपले वाचनालय में आयोजित रचना संवाद कार्यक्रम भाषाई वैशिष्ट्य और समृद्धि से महक उठा।
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श्रीदेवी के बाद हमने एक ऑफस्क्रीन उदासी और ऑनस्क्रीन सेंस ऑफ ह्यूमर खो दिया।
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संयुक्त राष्ट्र ने बीते वर्ष जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन किया था जिसमें मानव जनित जलवायु परिवर्तन पर चिन्तन हुआ।
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निश्चय ही ज्यादातर नेता शपथग्रहण के निमंत्रण का इंतजार कर रहे होंगे।
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यह कहानी ओशो रजनीश ने अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि संतों के या तीर्थंकरों के प्रवचन या उनकी शिक्षाएं कितनी काम की होती है।
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वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनकी किताबें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं।
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सावरकर क्रांतिकारी तो थे ही, लेकिन वे कवि थे, साहित्‍यकार और लेखक भी थे। हो सकता है, क्रांतिकारी मकसद की वजह से उन्‍होंने अपने इस हिस्‍से को हाशिए पर ही रख छोड़ा हो।
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सियासत की जाने कैसी ये आग है, आज़ाद है ’शाहीन’, कैद में बाग है। उन्हें सिखा रहे हो उसूल मुहब्बत के
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विवेकानंद एक बड़े विद्वान देवसेन के साथ ठहरे थे। उनके पास एक नई प्रकाशित पुस्‍तक थी। विवेकानंद ने कहा- क्‍या मैं इसे देख सकता हूं? देवसेन ने कहा- जरूर देख सकते हो, मैंने इसे बिलकुल नहीं पढ़ा है, क्योंकि यह अभी ही प्रकाशित हुई है।
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एक बार नारदजी एक पर्वत से गुजर रहे थे। अचानक उन्होंने देखा कि एक वटवृक्ष के नीचे एक तपस्वी तप कर रहा है। नारद के दिव्य प्रभाव से वह जाग गया और उसने प्रणाम करके पूछा- हे नारद! मुझे प्रभु के दर्शन कब होंगे?
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दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएं लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई 10 हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा।
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तीसरे दिन की शाम का आगाज़ शोभना चंद्रकुमार पिल्लई की एकल भरतनाट्यम प्रस्तुति से हुआ। भारतनाट्यम की उनकी यह प्रस्तुति पारंपरिक मूल्यों और नवाचार को समाहित करती हुई प्रतीत हुई।
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यह एक नीति कथा है। यह कहानी है न्याय के प्रति सजग राजा अभय सिंह की। अभय सिंह के राज्य में शांति और समृद्धि थी और उनके राज्य की सीमाएं दूर तक फैली थीं। इसका कारण यह था कि अभय सिंह जनता के बीच लोकप्रिय था। वह प्रजा की सुख शांति के लिए निरंतर कार्य ...
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डोनाल्ड ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया के साथ 2 दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे दिल्‍ली और गुजरात के अहमदाबाद का भ्रमण करेंगे।
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एक लंबे अरसे के बाद वो अपनी मौसी के घर रात रुकी थी। रात को अपने मौसी, मौसाजी, पापा, मम्मी, भाई, भाभी और बच्चों को एक साथ भोजन करते देखकर उसे रूहानी खुशी हुई। उसने कहा -" अरे, वाह, कितना सुंदर दृश्य है। "
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इस कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत निदेशक उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी मप्र शासन के अखिलेश ने किया।
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