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कोरोना काल की कहानियां : मजबूरी से निकली रोजगार की राह

शनिवार,अप्रैल 10, 2021
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पूना में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करनेवाली स्नेहा का शुरू से सपना था, कि शादी के बाद वो सिर्फ पति के साथ रहे। दोनों कमाएं, खाएं,घूमें, मौज करें। परिवार में अन्य सदस्यों का बस मेहमानों की तरह हस्तक्षेप हो।
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कोरोना काल हम सब पर भारी है,पर ऐसा जरुरी तो नहीं कि आज उनकी तो कल हमारी बारी है। वैसे भी जिंदगी तो बेवफा है एक दिन ठुकराएगी, मौत महबूबा है अपने साथ ले कर जाएगी। पर मर के जीने की अदा यदि हमें आ जाए, तो जिंदगी से इश्क का मजा दुगुना हो जाए। दुर्घटना से ...
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कोरोनाग्रस्त इंसान बदहाल हो जाता है….पता है, फेफड़े धीरे-धीरे काम करना बन्द कर देते हैं… यह भी पता है, कोरोना पीड़ित को सांस ले पाने में तकलीफ होती है… पता है। हर बार कोरोना नए-नए रूप में हमारे शरीर पर अटैक करता है… पता है..., कहीं कोई मर गया तो ...
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लोगों की यह जानने की भारी उत्सुकता है कि बंगाल चुनावों के नतीजे क्या होंगे? ममता बनर्जी हारेंगी या जीत जाएंगी? सवाल वास्तव में उलटा होना चाहिए। वह यह कि बंगाल में नरेंद्र मोदी चुनाव जीत पाएंगे या नहीं? बंगाल में चुनाव ममता और मोदी के बीच हो रहा है। ...
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गोलीबारी में घिरने के बाद भी जवानों ने पूरी वीरता से सामना किया, अपने साथियों को लहूलुहान होते देखकर भी हौसला नहीं खोया, माओवादियों का घेरा तोड़ते हुए उनको हताहत किया तथा घायल जवानों और शहीदों के शव को घेरे से बाहर भी निकाल लिया। ऐसे बहादुरों को पूरा ...
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नागार्जुन से एक चोर ने कहा था कि तुम ही एक आदमी हो जो शायद मुझे बचा सको। यूं तो मैं बहुत महात्‍माओं के पास गया, लेकिन मैं जाहिर चोर हूं, मैं बड़ा प्रसिद्ध चारे हूं, और मेरी प्रसिद्धि यह है कि मैं आज तक पकड़ा नहीं गया हूं, मेरी प्रसिद्धि इतनी हो गई ...
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यह नया इम्प्रिंट प्रतिलिपि के प्रतिभाशाली लेखकों की किताबों का प्रकाशन मुद्रित और ई- बुक दोनों स्वरूपों में करेगा। फ़िक्शन श्रेणी की ये किताबें मुख्य रूप से लघु कथाएं और उपन्यास होंगी। प्रतिलिपि डॉटकॉम एक लोकप्रिय फ्री टू रीड डिजिटल प्लेटफार्म है।
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मरीज होटल के रूम के लिए जो भी कमरा चुनता है उसे उसके हिसाब से शुल्‍क देना होगा। मसलन अगर वो सिंगल ड‍िलक्‍स, डबल ड‍िलक्‍स या सुइट का चयन करता है तो उसे निर्धारित शुल्‍क देना होगा। जहां तक मेड‍िक्‍लेम का सवाल है तो डॉक्‍टर कुणाल ने बताया कि अभी ...
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तुम जो मेरे हुए !! मिली हर ख़ुशी चूड़ियों की खन-खन पायल की छन-छन दास्तां नई सुनाने लगी तुम जो मेरे हुए.... रातें हुईं मदभरी ख़ूबसूरत सबेरे हुए साँसे मेरी महकी बदन खुशबुओं के डेरे हुए
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बीजेपी के सबसे अनुभवी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह की राजनीति का अब एकमात्र मंत्र और एकमेव सूत्र है; 'संघ को साधना'! मुख्यमंत्री के रूप में अपनी चौथी पारी में शिवराजसिंह चौहान एकदम नए तरह के राजनेता के रूप में दिख रहे हैं। पश्चिम बंगाल और केरल में उनकी ...
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यह कहानी भी बहुत बार पढ़ने और सुनने को मिलती है। एक गांव था जहां बारिश नहीं होती थी। वहां के लोग बड़े दु:खी रहते थे। फसल के लिए पानी कहां से लाएं। निराश और दु:खी होकर लोग कई तरह की मन्नते मांगते परंतु कुछ नहीं होता। थोड़ी बहुत बारिश होती और रुक ...
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यह कहानी एक अमीर और भिखारी की है। अपनी कार से आते जाते अमीर आदमी रोज एक भिखारी को भिख मांगते हुए देखता था। एक दिन अमीर आदमी को उस भिखारी पर दया आ गई।
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पिछले साल की तरह इस वर्ष का यह प्रतिपदा पर्व चिरस्मरणीय होगा।जीवन की इस अनिश्चितता में, जबकि मृत्यु के भय और अभय का सूक्ष्म अंतर समाप्त होने की कगार पर विश्व जूझ रहा है, हमें विनयावनत होना चाहिए, अपनी जगतधात्री प्रकृति, सभी धर्म, गोचर-अगोचर व ...
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ऐसा कई क्षण आते हैं जबकि व्यक्ति निराश या हताश हो जाता है। वह खुद को हारा हुआ महसूस करता है और उसे लगता है कि अब जिंदगी में कुछ नहीं बचा। सबकुछ एबीसीडी से शुरू करना होगा। परंतु बहुत कम लोग होते हैं जो इस हाताशा और निराशा को मात देकर फिर से खड़े हो ...
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धमम् तपड़......धमम् तपड़.... धमम् तपड़... जसोदाबाई नीम तले ढोलक ठोक रही थी। बेसुरा, बेताल। ढोलक की दोनों चाटी पर पूरे हाथ पड़ रहे थे और बेढब आवाज़ दूर तक जा रही थी। आज से पहले जसोदाबाई को इस रूप में किसी ने नहीं देखा था। ढोलक पर सदा लटकनेवाले झालरदार ...
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कोलकाता से निकलने वाले अंग्रेज़ी के चर्चित अख़बार ‘द टेलिग्राफ’ के सोमवार (29 मार्च,20121) के अंक में पहले पन्ने पर एक ख़ास ख़बर प्रकाशित हुई है। ख़बर गुवाहाटी की है और उसका सम्बन्ध 27 मार्च को असम में सम्पन्न हुए विधान सभा चुनावों के पहले चरण के ...
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दुनिया भर में प्रकृति और पर्यावरण को लेकर जितनी चिंता वैश्विक सगंठनों की बड़ी-बड़ी बैठकों में दिखती है, उतनी धरातल पर कभी उतरती दिखी नहीं। इस बात से इंकार नहीं
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2014 में जब उनकी मृत्यु हो गई तो उनकी पत्नी ममता ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारा और वह भी सांसद बनी। जो शांतनु ठाकुर ओरकांडी मंदिर में मोदी के साथ थे वे अभी बनगांव से भाजपा के सांसद हैं। उन्होंने ही अपनी चाची ममता ठाकुर को हराया। भाजपा ने उनके के ...
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Motivation Story : क्या आप भी आलसी हैं?

गुरुवार,अप्रैल 1, 2021
कई बार ऐसा होता है कि हमारे जीवन में अवसर आते हैं लेकिन हम उसे चूक जाते हैं और कई बार ऐसा भी होता है कि हम थोड़ीसी मेहनत से ही कुछ हासिल कर सकते हैं परंतु हमारे भीतर का आलस्य हमें खा जाता है। ऐसा भी होता कि हम कोई कार्य करना चाहें और फिर सोंचते हैं ...
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