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बस जी रहा हूँ...

बस जी रहा हूँ...
- अखिलेश
ND

बहार कहती है मुझसे कि
वो आएगी जरूर
मगर वो है कि आती नहीं है

उसके न आने से
चाँदनी की तपन भी मुझे
झुलसाती है

ताँता लगा है अपनों का आसपास
मगर इस भीड़ में भी तन्हा हूँ
बस उसकी याद के सहारे
जी रहा हूँ।