पांच दिन का मैच, चार दिन में खत्म, पैसा वसूल

सीमान्त सुवीर| पुनः संशोधित बुधवार, 12 अक्टूबर 2016 (00:55 IST)
इंदौर। भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच दिन का टेस्ट मैच चार दिन में खत्म हो गया, लेकिन इन चार दिनों में जिस किसी ने भी लाइन में लगकर काफी मशक्कत के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया, उनका पैसा वसूल हो गया। स्टेडियम की भव्यता और मैदान पर हो रहे नजारे ने उनकी सारी थकान उतार दी और जब उन्होंने विराट कोहली के धुरंधरों को चौथे दिन की शाम विजयादशमी के दिन लगातार 10वीं टेस्ट जीत दर्ज करते हुए देखा तो उन्हें लगा कि वे तो धन्य हो गए...
एमपीसीए के होलकर स्टेडियम में डेब्यू टेस्ट मैच था, जो पांच दिन के बजाय चार दिन में ही खत्म हो गया। चार दिनों तक यहां क्रिकेट का मेला जैसा लगा...हर दिन लगा कि यह टेस्ट नहीं वन-डे मैच है...खूब रन बने और खूब विकेट भी गिरे...होलकर स्ट‍ेडियम की क्षमता 27 हजार दर्शकों की है और 22 से 25 हजार दर्शकों का टेस्ट मैच देखना यहा साबित करता है कि की जनता कितना अधिक क्रिकेट को प्यार करती है। मैच भले ही चार दिन में खत्म हो गया लेकिन दर्शकों का पैसा वसूल हो गया।
इंदौर के अनुशासित दर्शकों ने मन मोह लिया : टेस्ट मैच को उबाऊ कहा जाता रहा है लेकिन इंदौर की जनता ने इसे सफल बनाकर बीसीसीआई के सामने एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। चार दिनों में सुरक्षा का यह आलम था कि टिकट चेकिंग चार चरणों में हुई वह भी पूरी सख्ती के साथ। दर्शकों के लिए पानी की बोतल, खाने का सामान, सिक्के, कैमरा, मोबाइल चार्जर, पर्स, पैन, चाबी आदि की मनाही थी। 
इंदौरी दर्शकों नेभ भी अपनी शालीन परंपरा का निर्वहन करते हुए सुरक्षाकर्मियों का पूरा साथ दिया। मैदान पर चार दिनों तक न तो किसी ने पानी की बोतल फेंकी और न ही कागज के हवाई जहाज बनाकर उड़ाए। दर्शकों के बस में था शोर करना और विराट कोहली के साथ-साथ टीम इंडिया के लिए कानफोडू नारे लगाना। इसके अलावा मैक्सिकन वेव बनाते और अपनी खुशी का इजहार करते.... 
 
एक दिन का वेतन टीम इंडिया को समर्पित : होलकर स्टेडियम में 'प्रेस बॉक्स' के ठीक ऊपर बने गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया के 'स्पेशल बॉक्स' में जब होलकर टीम को खेलते हुए देखने वाले सुशील चन्द्र बायस ने कचरा बीन रहे एक कर्मचारी से पूछा कि पांचवें दिन खेल ही नहीं होगा और तुम्हारा एक दिन का वेतन भी कट जाएगा, क्या करोगे? उस कर्मचारी ने हंसते हुए जवाब दिया 'टीम इंडिया जीत गई है...मैंने एक दिन का वेतन टीम इंडिया को समर्पित कर दिया।' इसके बाद वह कर्मचारी फिर अपने काम में जुट गया...



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