सचिन से लेकर विराट तक, ऐसे हुई कप्तानों की दुखद विदाई

Last Updated: सोमवार, 17 जनवरी 2022 (15:40 IST)
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विराट कोहली की टेस्ट कप्तानी छोड़ने के बाद एक बात फैंस के दिमाग में साफ हो गई है कि अंत हमेशा भला नहीं होता है। खासकर अगर कप्तानों की बात की जाए तो ऐसा बिल्कुल नहीं होता। विराट कोहली भारत के लिए सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में से एक हैं लेकिन अपने मन से ही उन्होंने टेस्ट की कप्तानी को अलविदा कह दिया।

सूत्रों के मुताबिक यह सुनाई दे रहा था कि जैसे पूर्व कप्तानों की बेइज्जती हुई थी वैसे ही विराट कोहली बीसीसीआई के सामने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुई टेस्ट सीरीज से 1-2 की हार के कारण पेश होने वाले थे। इससे पहले ही विराट ने अपना निर्णय सुना दिया।

जब वनडे क्रिकेट रंगीन लिबास में नहीं खेला जाता था तब भारतीय क्रिकेट टीम में कप्तानों के बीच म्यूजिकल चेयर खेली जाती थी। कभी बिशन सिंह बेदी तो कभी सुनील गावस्कर तो कभी वेंगसरकर किसी को भी कप्तानी सौंप दी जाती थी।

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भारत को वनडे विश्वकप जिताने वाले कपिल देव भी 90 के दशक तक आते आते अपनी कप्तानी खो चुके थे।

सिर्फ विराट कोहली ही नहीं पूर्व में कई भारतीय कप्तानों ने
लगभग ऐसे ही अपनी कप्तानी से हाथ धोना पड़ा। इसमें भारतीय क्रिकेट की त्रिमूर्ति मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर, टीम इंडिया के कोच राहुल द्रविड़, बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली तक शामिल है।
sachin tendulkar

- सचिन तेंदुलकर तेंदुल्कर जितने महान खिलाड़ी थे उतने ही खराब कप्तान, यह लगभग हर क्रिकेट फैन को पता है।साल 1996 में विश्वकप हार के बाद सचिन तेंदुलकर को कप्तानी सौंपी गई। लेकिन बोर्ड का यह नतीजा बिल्कुल फ्लॉप रहा और मोहम्मद अजहरुद्दीन को फिर कप्तानी सौंप दी गई।
इसके बाद 1999 के विश्वकप के बाद जब भारतीय टीम हारकर आयी थी तो बोर्ड ने कप्तानी में बदलाव किया था। सचिन तेंदुलकर को कप्तानी सौंपी गई थी लेकिन कप्तानी उनके व्यवहार के विरुद्ध काम साबित हुआ।

ना ही सचिन एक कप्तान की तरह आक्रमक थे ना ही मैदान पर बदलती परिस्थितियों के चलते अपना निर्णय बदल पाते थे। जितने समय टीम उनकी कप्तानी में रही टीम एक दम प्रीडिक्टिबल रही। एक बार उन पर मुंबई कि खिलाड़ी को तरहजीह देने का भी आरोप लगा।

दूसरी बार अजहर के बाद सचिन कप्तान इसलिए बनाए गए थे क्योंकि तब कोई भी खिलाड़ी दावे के साथ अपनी जगह को पक्की नहीं मान सकता था। खिलाड़ियों के फॉर्म में लय नहीं थी। सचिन की कप्तानी में भारत ने 73 मैच खेले और 43 मैच हारे और सिर्फ 23 में ही जीत मिली।उनकी कप्तानी में भारत एक भी बार एशिया कप जैसा मल्टी नेशनल टूर्नामेंट नहीं जीत सका।
टेस्ट मैचों में कप्तानी का अनुभव तो सचिन के लिए और भी खराब रहा। उन्होंने टीम इंडिया के लिए 25 टेस्ट मैचों में कप्तानी की और सिर्फ 4 मैचों में ही टीम इंडिया को जीत नसीब हो पायी।

पहली बार जब कप्तानी से उनको निकाला था तो इसकी खबर उन्हें मीडिया से मिली थी। इसके बाद वह काफी आहत हुए थे। दूसरी बार उन्होंने कुछ समय मजबूरी में यह काम ले तो लिया लेकिन इसके बाद कप्तानी से तौबा कर ली।



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