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Last Modified: रविवार, 23 मई 2021 (14:37 IST)

आयात शुल्क घटने की अफवाह से तेल-तिलहन बाजार टूटे, अफरातफरी का रहा माहौल

आयात शुल्क घटने की अफवाह से तेल-तिलहन बाजार टूटे, अफरातफरी का रहा माहौल - Oil-oilseeds market broken due to rumor of import duty reduction
नई दिल्ली। सरकार द्वारा आयातित तेल-तिलहनों के आयात शुल्क में कमी किए जाने की अफवाह से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह बाजार में अफरातफरी का माहौल था तथा मांग प्रभावित होने से लगभग सभी प्रमुख तेल-तिलहनों के भाव नरमी दर्शाते बंद हुए।

जानकार सूत्रों ने कहा कि अफवाहों के कारण मांग गंभीर रूप से प्रभावित होने की वजह से मुख्य रूप से सीपीओ और सोयाबीन तेल कीमतों की अगुवाई में सरसों, मूंगफली, बिनौला सहित विभिन्न तेल तिलहन कीमतों में गिरावट देखी गई।

उन्होंने बताया कि अफ्रीकी देश मोजांबिक ने अपने यहां सोयाबीन के निर्यात को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। सोयाबीन के बिजाई का समय नजदीक है और बरसात के कारण पिछली फसल दागी निकलने की वजह से बिजाई के लिए सोयाबीन के बेहतर दाने की कमी है। वैसे सरकार ने सोयाबीन के बेहतर बीज की पर्याप्त आपूर्ति किए जाने का आश्वासन दे रखा है पर किसानों को अभी ये बीज उपलब्ध नहीं हैं।

हालात यह हैं कि महाराष्ट्र की लातूर मंडी में सोयाबीन की जो आवक 7-8 हजार बोरी प्रतिदिन की थी वह शनिवार को घटकर 4-5 हजार बोरी प्रतिदिन रह गई है और कीमतों में लगभग 50 रुपए क्विन्टल की तेजी है। अगर किसानों को अच्छे बीज नहीं मिले तो सोयाबीन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसकी अगली फसल बेहतर होने की संभावना जताई जा रही थी।

अफवाहों के संदर्भ में बाजार के जानकारों ने कहा कि सरकार की ओर से आयात शुल्क कम करने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि विदेशों में खाद्य तेलों के दाम बढ़ा दिए जाते हैं और स्थिति जस की तस बनी रहती है। इसका दूसरा गंभीर असर देश के तेल तिलहन उद्योग और तिलहन किसानों पर होता है जो भाव की अनिश्चिताताओं के कारण असमंजस की स्थिति का सामना करते हैं और साथ ही सरकार को राजस्व की हानि होती है। इससे तिलहन किसानों का हौसला टूटता है जिनके फसल की खरीद प्रभावित होती है।

सूत्रों ने कहा कि आयात शुल्क घटाने का कोई औचित्य ही नहीं है क्योंकि इन आयातित तेलों के भाव सरसों जैसे देशी तेल के मुकाबले पहले से ही नीचे चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आयातित तेलों के दाम का कम होना इस बात को साबित करता है कि आयातित तेलों की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है तो ऐसे में आयात शुल्क को और कम करने से कोई अपेक्षित नतीजा नहीं निकल सकता।

उन्होंने कहा कि कांडला बंदरगाह पर सोयाबीन डीगम के आने पर भाव 1,425 डॉलर प्रति टन बैठता है। मौजूदा आयात शुल्क और बाकी खर्चों के उपरांत इंदौर जाने पर इसका भाव 152 रुपए किलो बैठता है। लेकिन इंदौर के वायदा कारोबार में इस तेल के जुलाई अनुबंध का भाव 136 रुपए किलो और अगस्त अनुबंध का भाव 133 रुपए किलो बोला जा रहा है।

जब आयातकों को खरीद मूल्य से 16-19 रुपए नीचे बेचना पड़ेगा तो फिर आयात शुल्क कम किए जाने का क्या फायदा है? उन्होंने कहा कि मलेशिया और अर्जेन्टीना में जिन लोगों के तेल प्रसंस्करण संयंत्र हैं, सिर्फ उन्हें ही ऐसी अफवाहों का फायदा मिलता है। संभवत: इन्हीं वजहों से किसान धान और गेहूं की बुवाई पर जोर देते हैं और तिलहन उत्पादन पर कम ध्यान देते हैं।
उन्होंने कहा कि खासकर तिलहन बुवाई के मौसम के दौरान अफवाहें फैलाने वालों पर नियंत्रण किया जाना चाहिए और आयात शुल्क के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ करने से बचा जाना चाहिए। बीते सप्ताह, सरसों दाना का भाव 200 रुपए की हानि दर्शाता 7,300-7,400 रुपए प्रति क्विन्टल रह गया जो भाव उसके पिछले सप्ताहांत 7,550-7,600 रुपए प्रति क्विंटल था।
सरसों दादरी तेल का भाव भी 625 रुपए घटकर 14,500 रुपए प्रति क्विन्टल रह गया। सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी टिनों के भाव भी समीक्षाधीन सप्ताहांत में 75-75 रुपए की हानि दर्शाती क्रमश: 2,315-2,365 रुपए और 2,415-2,515 रुपए प्रति टिन पर बंद हुए।

सोयाबीन के दागी फसलों की मांग घटने से सोयाबीन दाना और लूज के भाव में 150-150 रुपए की हानि दर्ज हुई। आयात शुल्क में कमी किए जाने की अफवाह से कारोबारी मांग प्रभावित हुई जिसकी वजह से समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम के भाव क्रमश: 400 रुपए, 450 रुपए और 450 रुपए की गिरावट के साथ क्रमश: 15,600 रुपए, 15,300 रुपए और 14,050 रुपए प्रति क्विन्टल पर बंद हुए।
निर्यात मांग घटने और गुजरात की मंडियों में मूंगफली के गर्मी के फसल की आवक बढ़ने से मूंगफली दाना 125 रुपए की गिरावट के साथ 6,170-6,215 रुपए, मूंगफली गुजरात 300 रुपए हानि के साथ 15,200 रुपए क्विन्टल तथा मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 55 रुपए की गिरावट के साथ 2,435-2,485 रुपए प्रति टिन पर बंद हुआ।सप्ताह के दौरान अफवाहों के मद्देनजर मांग प्रभावित होने से कच्चा पाम तेल (सीपीओ) का भाव 360 रुपए घटकर 12,300 रुपए प्रति क्विन्टल रह गया।

पामोलीन दिल्ली और पामोलीन कांडला तेल के भाव भी समीक्षाधीन सप्ताहांत में क्रमश: 450 रुपए और 470 रुपए की गिरावट के साथ क्रमश: 14,100 रुपए और 13,100 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुए। गिरावट के आम रुख के अनुरूप समीक्षाधीन सप्ताहांत में बिनौला तेल भी 300 रुपए की हानि के साथ 14,550 रुपए क्विन्टल पर बंद हुआ। अन्य सभी तेल-तिलहनों के भाव पूर्ववत बंद हुए।(भाषा)
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