आज सुबह 10 बजे चांदी 15,651 रुपए की गिरावट के साथ 3,84,242 रुपए प्रति किलो थी। दोपहर 3.15 मिनट पर चांदी 15 प्रतिशत गिरकर 3,39,913 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई।
इसी तरह आज सोने के दामों में भारी कमी देखी गई। सुबह 10 बजे सोना 2,105 रुपए लुढ़ककर 1,67,298 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। दोपहर 3.15 मिनट पर सोने की कीमत भी 9 प्रतिशत गिर गई। इस समय सोना 15,246 रुपए गिरकर 1,54,157 प्रति 10 ग्राम रुपए रह गया।
क्यों गिरे सोने चांदी के दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी शुक्रवार को सोने की कीमतों में नरमी आई। डॉलर की मजबूती से सोने दबाव में हैं। हालांकि भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच लोग अभी भी सुरक्षित निवेश की तलाश में है।
वैश्विक स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दिखी। बजट से पहले बाजार में अनिश्चितता रहती है, इसलिए निवेशक सुरक्षित पोजिशन लेने लगे। इस वजह से दोनों कीमती धातुओं में नई खरीद कम हुई।
अमेरिका और यूरोप में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी सोना चांदी सस्ता हुआ है। ऐसा माना जाता है कि जब बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड की ओर जाते हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
कमोडिटी एक्सपर्ट योगेश बागौरा ने कहा कि 30 जनवरी, 2026 को सोने और चांदी में आई तेज गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में आए उछाल के कारण और गहरी हो गई। डॉलर के मजबूत होने से डॉलर में ट्रेड होने वाली कीमती धातुएं विदेशी खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे निवेश के तौर पर इनका आकर्षण कम हो जाता है।
डॉलर की इस मजबूती के पीछे बाजार में चल रही वह अटकलें थीं, जिनके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के रूप में केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को नामित कर सकते हैं (या शायद कर चुके हैं)। वॉर्श, जो फेड के पूर्व गवर्नर रह चुके हैं, अपनी 'हॉकिश' (कठोर मौद्रिक नीति के समर्थक) छवि के लिए जाने जाते हैं। उनके विचारों से संकेत मिलता है कि भविष्य में ब्याज दरों में उतनी कटौती नहीं होगी जितनी पहले उम्मीद की जा रही थी।
गिरावट के मुख्य कारण:
* ब्याज दरों की उम्मीदों में बदलाव: ब्याज दरों में कम कटौती की संभावना से 'रियल यील्ड' (वास्तविक रिटर्न) बढ़ जाता है, जिससे सोने और चांदी जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों (non-yielding assets) को रखने की लागत बढ़ जाती है।
* मुनाफावसूली (Profit-taking): सोने (लगभग $5,600+/oz) और चांदी (लगभग $121+/oz) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने के बाद निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की।
* तकनीकी सुधार: इन दोनों कारकों ने मिलकर बाजार में एक अस्थिर सुधार (volatile correction) पैदा किया, जिससे कीमतें महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे आ गईं।