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Last Updated :बेंगलुरु , गुरुवार, 29 जनवरी 2026 (19:02 IST)

HAL और रूस के बीच 'सुखोई सुपरजेट-100' के लिए समझौता, Civil Aviation में देश को कैसे होगा फायदा

Tejas
तेजस और सुखोई-30 MKI जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अब नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रही है। मीडिया खबरों के मुताबिक HAL ने रूस की यूनिटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ भारत में 'सुखोई सुपरजेट-100' (SSJ-100) यात्री विमान बनाने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे भारत में स्वदेशी यात्री विमान उत्पादन की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। मीडिया खबरों के मुताबिक इस समझौते पर UAC के सीईओ वादिम बदेहा और HAL के सीएमडी डॉ. डीके सुनील ने हस्ताक्षर किए। 

क्या होगा समझौते में 

HAL को भारत में सुपरजेट-100 बनाने का लाइसेंस मिलेगा। विमान की बिक्री, मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी भी HAL की होगी।  रूसी कंपनी UAC डिजाइन, तकनीकी सहायता और उत्पादन में सहयोग प्रदान करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सुपरजेट-100 भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 'शॉर्ट रनवे' पर काम करना है। शिमला, कुल्लू और पूर्वोत्तर भारत के हवाई अड्डों पर रनवे की लंबाई कम और इलाका चुनौतीपूर्ण है, जहां बोइंग या एयरबस के बड़े विमान नहीं उतर सकते। सुपरजेट-100 को विशेष रूप से ऐसी स्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है।  इस विमान का एयरफ्रेम और एरोडायनामिक डिजाइन सुखोई के लड़ाकू विमानों के अनुभव से लिया गया है, जो इसे बेजोड़ मजबूती और प्रदर्शन क्षमता देता है।

खराब मौसम में भी सुरक्षित उड़ान

आधुनिक एवियोनिक्स से लैस यह जेट घने कोहरे, कम दृश्यता (Poor Visibility) और प्रतिकूल मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम है। इससे मौसम के कारण उड़ानों के रद्द होने या दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाएगा।
वर्तमान में भारतीय बाजार में या तो 70 सीटों वाले छोटे टर्बोप्रॉप विमान हैं या 180 सीटों वाले बड़े नैरो-बॉडी जेट। 90 से 100 सीटों वाले सेगमेंट में एक बड़ा अंतर है, जिसे सुपरजेट-100 भरेगा।
यह विमान 0.81 मैक (लगभग 870 किमी प्रति घंटा) की गति से उड़ान भर सकता है।  इसकी गति बड़े जेट विमानों के बराबर है, जिससे दिल्ली-पटना या मुंबई-इंदौर जैसे रूटों पर यात्रा का समय टर्बोप्रॉप विमानों की तुलना में काफी कम हो जाएगा। Edited by : Sudhir Sharma