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कुतुब मीनार का निर्माण किसने पूरा करवाया?

रविवार,अप्रैल 11, 2021
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महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था।उनकी माता का नाम चिमणाबाई तथा पिता का नाम गोविंदराव था।
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एक अप्रैल का दिन तो और खास है इस दिन मजाकिया स्वभाव का आदमी ही नहीं हर व्यक्ति छोटे-मोटे मजाक करने से नहीं चूकता।
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अप्रैल फूल कहीं नहीं खिलता मगर खिल जाता एक अप्रैल को क्या, क्यों, कैसे ? अफवाओं की खाद से और
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छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम भारत के उन वीर सपूतों में शुमार है जिन्होंने अपनी वीरता और पराक्रम के दम पर मुगलों को घुटने टेकने पर विवश कर दिया था।
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Motivational story : निडर शिवाजी

मंगलवार,मार्च 30, 2021
शिवाजी महाराज के पिता का नाम शाहजी था। वह अक्सर युद्ध लड़ने के लिए घर से दूर रहते थे। इसलिए उन्हें शिवाजी के निडर और पराक्रमी होने का अधिक ज्ञान नहीं था।
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वर्ष 2021 में छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती तिथि के अनुसार 31 मार्च को मनाई जाएगी। इस बार कोरोना के कारण सादगी से शिवजयंती मनाना उचित रहेगा
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होली का त्योहार पास में आया तो पोंगा पंडित ने मुहल्ले के लड़कों को चुनौती दी, 'मैं इस बार भी होली नहीं खेलूंगा। आज तक कोई मुझे रंग नहीं डाल सका। आगे भी किसी में इतनी हिम्मत
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हाथ चलाया जोरों से तो, फूट गई पिचकारी। रम्मू के मुंह पर ही आई, ठेल रंगों की सारी।
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अगर रंग में रासायनिक तत्व होंगे तो इससे आंखों में हल्की एलर्जी होगी या फिर बहुत तेज जलन होने लगेगी। मरीज में एलर्जी की समस्या, केमिकल बर्न, कॉर्नियल एब्रेशन और आंखों में जख्म की समस्या हो सकती हैं।
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holi ki kavita : होली के रंग

शनिवार,मार्च 27, 2021
वोट बैंक की आड़ में, लोग राजनेता बन रहे हैं। नाम राम का हो, या रहीम का, चलता हुआ भारत का पथ, लोगों को डरा रहा है।
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होली पर अक्सर हुड़दंग रहती है। अक्सर यह देखा गया है कि होली खेलने के बाद कई लोगों को आंखों में जलन होती है तो कईयों की त्वचा खराब हो जाती है। कई दिनों तक शरीर पर जमा रंग निकलता नहीं है। ऐसे में हर्बल रंग सबसे अच्छे होते हैं। इन्हें आप प्राकृतिक रंग ...
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लाल-लाल खिला पलाश सृष्टि की छवि मन हरती। फिर अपने आंगन में आई बसंती होली। मन पुलकित, तन पुलकित
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होली एक ऐसा रंग-बिरंगा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। बच्चे और युवा रंगों से खेलते हैं।
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बच्चों की हुड़दंग है, उड़ी अबीर-गुलाल, तन रंग में डूबा हुआ, मन है मालामाल। सिलबट्टे पर बैठकर, कक्कू घिसते भांग, दद्दू राजा नाचते, बना-बनाकर स्वांग।
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नाचो मगन, जरा रंग लो ये तन-मन, आया रे आया रंगों का त्योहार नाचो होके मगन। सखियों संग राधा पनघट पे आई
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आज गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस है। वे भीड़ से अलग थे, उससे घबराते नहीं थे। इसीलिए पत्रकारिता जगत में भी उनका अलग और सम्मानपूर्वक लिया जाता है। उनका जन्म 26 अक्टूबर 1890 को अतरसुइया में हुआ था। उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में ही अपनी
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404 पृष्ठ की यह मूल डायरी आज भगतसिंह के पौत्र भतीजे बाबरसिंह संधु के पुत्र यादविंदरसिंह के पास है, जिसे उन्होंने अनमोल धरोहर के रूप में संजोकर रखा है। दिल्ली के नेहरू मेमोरियल म्यूजियम में इस डायरी की प्रति भी उपलब्ध है, जबकि राष्ट्रीय संग्रहालय में ...
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भारत के अमर शहीदों में सरदार भगत सिंह का नाम सबसे प्रमुख रूप से लिया जाता है। जिस दिन भगत सिंह पैदा हुए उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया।
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आज देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर करने वाले तीन वीर सपूतों का शहीद दिवस है। 23 मार्च यानि क्रांतिकारी वीर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव का बलिदान दिवस
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