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भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के प्रथम भाषण का अंश, यहां पढ़ें

मंगलवार,जनवरी 19, 2021
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भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। वर्ष 1957 में वे दोबारा राष्ट्रपति चुने गए।
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भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जो तीन रंगों- केसरिया, सफेद और हरे रंग से बना है और इसके केंद्र में नीले रंग से बना अशोक चक्र है।
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गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में भाई घनैया जी सेवा करते थे। भाई घनैया जी बहुत निर्मल स्वभाव के थे और गुरु घर में बहुत ही प्यार से सेवा करते थे।
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महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी संवत् कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। राजस्थान के कुंभलगढ़ में महाराणा प्रताप का
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रण में हाहाकार मचो तब, राणा की निकली तलवार मौत बरस रही रणभूमि में, राणा जले हृदय अंगार।
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हर वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस, भारत का राष्ट्रीय पर्व है, जिसे प्रत्येक भारतवासी पूरे उत्साह, जोश और सम्मान के साथ मनाता है। राष्ट्रीय पर्व होने के नाते इसे हर
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26 जनवरी 1950 को हमारा देश प्रजातांत्रिक गणतंत्र देश बना था। इस दिन हमारे देश का संविधान लागू हुआ था और भारत में इस पर्व को बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है और इसी अवसर पर भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।
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शाम हुई थका सूरज पहाड़ों की ओट में, करता विश्राम। गुलाबी, पीली चादर बादल की ओढ़े
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भारतीय थलसेना विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। यह पूर्णतः स्वेच्छिक सेवा है। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत थलसेना का नियंत्रण और संचालन का कार्य होता है।
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प्रत्‍येक वर्ष 15 जनवरी को थलसेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के सम्मान में मनाया जाता है। सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थलसेना की वीरता,
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भारतीय राजनीतिज्ञ गुलजारीलाल नंदा का जन्म पाकिस्तान के सियालकोट (अब पाकिस्तानी पंजाब) में 4 जुलाई 1898 को हुआ था। इनके पिता का नाम बुलाकीराम नंदा
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चाणक्य बदले की आग से इतना भर चुके थे कि उनका विवेक भी कई बार ठीक से काम नहीं करता था। चंद्रगुप्त ने लगभग पांच हजार घोड़ों की छोटी-सी सेना बना ली थी।
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संसार में मछलियों की लाखों प्रजातियां हैं और इतनी ही लुप्त हो गई हैं। समुद्र में तो ऐसी विचित्र किस्म की मछलियां हैं कि जिन्हें देख और जिनके बारे में सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे और सोचेंगे कि कहीं यह दूसरे ग्रह की मछलियां तो नहीं हैं? तो आओ जानते ...
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लाल पतंग घमंड से भरी झगड़ालू किस्म की थी। एक दिन आसमान में कुछ पक्षी भी उड़ रहे थे। उन्होंने अपने बीच लाल पतंग को उड़ते देखा तो दोस्ती करने उसके पास आ गए।
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पतंग कभी भी पॉवर लाइन या बड़े बिजली के खंभों के पास न उड़ाएं, क्‍यों‍कि अगर मांझा कभी कहीं नीचे गिरकर गीला हो गया हो और यदि ये पॉवर लाइन के संपर्क में आ जाए, तो जानलेवा हो सकता है।
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आज मकर संक्रांति का त्योहार है। इस दिन पतंग उड़ाना शुभ माना जाता है। गुरुजी की बात सुनकर शिष्य खुश हो गया। दोनों आश्रम के बाहर मैदान में आकर पतंग उड़ाने लगे। उनके साथ दो अन्य शिष्य भी
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पतंग क्या चीज बस हवा के भरोसे। जिंदगी हो इंसान की आकाश और जमीन के अंतराल को पतंग से
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मकर संक्रांति खुशियों का पर्व है। इस वर्ष यह पर्व 14 जनवरी 2021 को मनाया जा रहा है। पिछले साल से कोरोना का खतरा सभी पर मंडरा रहा हैं और अब बर्ड फ्लू भी घात लगाएं बैठा है ऐसे समय में हमें
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मकर संक्रांति का संबंध सीधा पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है। जब भी सूर्य मकर रेखा पर आता है, वह दिन 14 जनवरी ही होता है,
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