बाल कविता : बाबू गधाराम...
गधा चेंपू-चेंपू क्यों बोलता है?
प्यार बच्चों,
क्या आप जानते हैं गधा चेंपू-चेंपू क्यों बोलता है?
क्या कहा?
नहीं...!!!!
तो कोई बात नहीं, जानना चाहते हो तो सुनो...।
FILE
एक गधे को मिली नौकरी,
दफ्तर के बाबू की।
सबसे अधिक कमाऊं थी जो,
वह कुर्सी काबू की।
काम कराने के बदले वे,
जमकर रिश्वत लेते।
जितना खाते उसमें से,
आधा अफसर को देते।
अफसर भालूराम मजे से,
सभी काम कर देता।
बाबू गधाराम था उसका,
सबसे बड़ा चहेता।
रोज मजे से भालूजी,
अंग्रेजी दारू पीते।
और बुला कर गधेराम को,
देशी पकड़ा देते।
देशी पीकर गधेराम का,
गला हो गया भोंपू।
इस कारण अब करते रहते,
दिन भर चेंपू-चेंपू।
क्या आप जानते हैं गधा चेंपू-चेंपू क्यों बोलता है?
क्या कहा?
नहीं...!!!!
तो कोई बात नहीं, जानना चाहते हो तो सुनो...।
एक गधे को मिली नौकरी,
दफ्तर के बाबू की।
सबसे अधिक कमाऊं थी जो,
वह कुर्सी काबू की।
काम कराने के बदले वे,
जमकर रिश्वत लेते।
आधा अफसर को देते।
अफसर भालूराम मजे से,
सभी काम कर देता।
बाबू गधाराम था उसका,
सबसे बड़ा चहेता।
रोज मजे से भालूजी,
अंग्रेजी दारू पीते।
और बुला कर गधेराम को,
देशी पकड़ा देते।
देशी पीकर गधेराम का,
गला हो गया भोंपू।
इस कारण अब करते रहते,
दिन भर चेंपू-चेंपू।
