dharma sangrah
✕

बाल गीत : घड़ा धूप का...

Updated: गुरुवार, 20 अप्रैल 2017 (16:51 IST)
जाने क्या सूझा सूरज को,
जन जीवन पर हमला बोला।
मार्च माह जाते-जाते ही,
दाग दिया गर्मी का गोल।
 
सर फर्राती हवा चल पड़ी।
तीर चले अंगारों वाले।
धरती हो गई गर्म तवा-सी,
पड़ने लगे पगों में छाले।
मौसम के नीले सागर में
इस निर्मम ने लावा घोला।
 
खतम परीक्षा आए नतीजे,
पर शाला से मिली न छुट्टी।
बस्ता कंधे पीठ किताबों,
से कर पाए अभी न कुट्टी।
नहीं किसी शाला ने अब तक,
छुट्टी देने को मुंह खोला।
 
सूरज शिक्षक सरकारों को,
नहीं दया हम पर आती है।
किरणों के चाबुक से हमको,
भरी दुपहरिया पिटवाती है।
सूरज से अब हम क्या बोलें,
घड़ा धूप का सिर पर ढोला।
 
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?

31 अक्टूबर पुण्यतिथि: इंदिरा गांधी की मृत्यु कब, कहां, क्यों और कैसे हुई थी?

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

अगला लेख