ganesh chaturthi

बाल गीत: बुढ्ढी के बाल

Updated: मंगलवार, 22 जुलाई 2025 (15:11 IST)
लेकर आया लल्लू लाल,
लाल लाल बुढ्ढी के बाल।
 
हरे गुलाबी पीले भी हैं।
स्वेत बैगनी नीले भी हैं।
सजे धजे बैठे डिब्बे में,
साफ और चमकीले भी हैं।
इतने सारे रंग सामने,
बच्चे देख हुए खुश हाल।
लाल लाल बुढ्ढी के बाल।
 
मुन्नी ने पीला खुलवाया।
छुन्नी को तो हरा सुहाया।
चुन्नू बोला नीला लूंगा।
राम गुलाबी पर ललचाया।
कल्लूजी ने लाल चबाया ,
ओंठ हो गए लाल गुलाल।
लाल लाल बुढ्ढी के बाल।
 
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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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