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बाल कविता : इंसानों का काम...

Updated: शुक्रवार, 24 जून 2016 (15:50 IST)
बल्ब फ्यूज था, हुआ अंधेरा,
हथिनी थी घबराई।







 





चढ़ी पोल पर बल्ब बदलने,
नहीं बदल पर पाई।
 
बल्ब होल्डर छोटा-सा था,
सूंड मुटल्ली भारी।
काम नहीं पूरा हो पाया,
उतर आई बेचारी।
 
बल्ब लगाना बल्ब फोड़ना,
इंसानों का काम।
हथिनी कैसे कर सकती थी,
इसको अपने नाम।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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