Daily Horoscope
✕

कैसे हुई करवा चौथ की शुरुआत? जानिए इतिहास और व्रत के खास नियम

Updated: गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 (11:47 IST)
Karva Chauth 2026: करवाचौथ व्रत कार्तिक माह की कृष्‍ण चतुर्थी के दिन रखा जाता है। इस बार 29 अक्‍टूबर गुरुवार 2026 को करवाचौथ का व्रत रखा जाएगा। महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी आयु और सेहत के साथ ही घर की सुख समृद्धि के लिए यह निर्जला व्रत रखती हैं। चांद को देखने के बाद ही यह व्रत खोला जाता है। करवाचौथ हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। आखिर कैसे हुई करवाचौथ की शुरुआत? जानें इसका इतिहास और व्रत के खास नियमों के बारे में विस्‍तार से...
 
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर, 2026 को 01:06 बजे। 
चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर, 2026 को रात्रि 10:09 बजे।
 
करवाचौथ पूजा मुहूर्त: शाम 05:38 से 06:56 बजे तक।
करवाचौथ व्रत समय: सुबह 06:31 से रात्रि 08:17 बजे तक।
करवाचौथ के दिन चन्द्रोदय: रात्रि 08:17 बजे। 
 

क्या है करवाचौथ का इतिहास?

पौराणिक कथाओं में एक जोर जहां माता पार्वती अपने पति शिवजी को पाने के लिए तप और व्रत करती है और उसमें सफल हो जाती है तो दूसरी ओर सावित्री अपने मृत पति को अपने तप के बल पर यमराज से भी छुड़ाकर ले आती है यानी स्त्री में इतनी शक्ति होती है कि वो यदि चाहे, तो कुछ भी हासिल कर सकती है। इसीलिए महिलाएं करवाचौथ के व्रत के रूप में अपने पति की लंबी उम्र के लिए एक तरह से तप करती हैं।
 
यह भी कहा जाता है कि करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री के नाम पर ही करवाचौथ का नाम करवाचौथ पड़ा है। कहते हैं कि करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गांव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान कर रहा था तभी एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कहकर अपनी पत्नी को पुकारने लगा। उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी हुई आई और आकर उसने मगरमच्‍छ को कच्चे धागे से बांध दिया।
ALSO READ: Karwa Chauth: करवा चौथ का व्रत कब रखा जाएगा? जानें पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त और चन्द्रोदय का समय
मगर को बांधकर वो यमराज के यहां पहुंच गई और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगरमच्छ ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप नरक में ले जाओ। यमराज बोले, लेकिन अभी मगर की आयु शेष है। अतः मैं उसे नहीं मार सकता।

इस पर करवा बोली, अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आपको श्राप देकर नष्ट कर दूंगी। सुनकर यमराज डर गए और उन्होंने मगरमच्‍छ को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु रहने का आशीर्वाद दिया। तभी से उस महिला को करवा माता कहने लगे।
 

करवाचौथ पर है चांद का खास महत्‍व

करवाचौथ का व्रत चतुर्थी के चांद को देखकर ही खोला जाता है। हर शहर में चंद्रोदय का समय अलग-अलग होता है। इस दिन महिलाएं चंद्रमा को देखे बिना न तो कुछ खाती हैं और न ही पानी ग्रहण करती हैं। चंद्रमा का उदय होने के बाद सबसे पहले महिलाएं छलनी में से चंद्रमा को देखती हैं फिर अपने पति को, इसके बाद पति अपनी पत्नियों को लोटे में से जल पिलाकर उनका व्रत पूरा करवाते हैं।
 

ये हैं करवाचौथ के खास नियम 


Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

22 October Birthday: आपको 22 अक्‍टूबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (22 अक्‍टूबर, 2026)

कैसे हुए करवाचौथ की शुरुआत? जानें इतिहास और व्रत के खास नियम

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 22 अक्‍टूबर 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

क्यों मनाई जाती है शरद पूर्णिमा? देवी लक्ष्मी से क्या है संबंध? जानिए इसका धार्मिक महत्व

अगला लेख