dipawali
✕

क्षमावाणी : बैरभाव मिटाने और आत्मा की शुद्धता का पर्व...

Updated: बुधवार, 14 सितम्बर 2016 (12:23 IST)
* क्षमावाणी पर्व पर विशेष : मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है क्षमा-याचना... 
 

 
आचार्य विद्यासागरजी के अनुसार भी 'क्षमा' वीरों का आभूषण है। सही ही कहा जाता है कि क्षमा बराबर तप नहीं, क्षमा का धर्म आधार होता है। क्रोध सभी के लिए अहितकारी है और क्षमा सदा, सर्वत्र सभी के लिए हितकारी होती है। हर धर्म में क्षमा का महत्व है। वैदिक ग्रंथों में भी क्षमा की श्रेष्ठता पर बल दिया गया है। 
 
क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है। जिसके जीवन में क्षमा है, वही महानता को प्राप्त कर सकता है। क्षमावाणी हमें झुकने की प्रेरणा देती है।

दसलक्षण पर्व हमें यही सीख ‍देता है कि क्षमावाणी के दिन हमें अपने जीवन से सभी तरह के बैरभाव-विरोध को मिटाकर प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी चाहिए और हम दूसरों को भी क्षमा कर सकें, यही भाव मन में रखना चाहिए। यही क्षमावाणी है। 


 
सभी को जय जिनेंद्र का नाम लेकर झुकना सीखना चाहिए, क्योंकि क्षमा हमें झुकने की प्रेरणा देती है। चाहे छोटा हो या बड़ा, क्षमा पर्व पर सभी से दिल से क्षमा मांगी जानी चाहिए। क्षमा कभी भी सिर्फ उससे नहीं मांगी जानी चाहिए, जो वास्त‍व में हमारा दुश्मन है बल्कि हमें हर छोटे-बड़े जीवों से क्षमा मांगनी चाहिए।

जब हमें क्रोध आता है तो हमारा चेहरा लाल हो जाता है और जब क्षमा मांगी जाती है तो चेहरे पर हंसी-मुस्कुराहट आ जाती है। क्षमा हमें अहंकार से दूर करके झुकने की कला सिखाती है। क्षमावाणी पर्व पर क्षमा को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची मानवता है। 
 
हम क्षमा उससे मांग‍ते हैं जिसे हम धोखा देते है, जिसके प्रति मन में छल-कपट रखते हैंं। जीवन का दीपक तो क्षमा मांगकर ही जलाया जा सकता है अत: हमें अपनी प‍त्नी, बच्चों, बड़े-बुजुर्गों, पड़ोसी हो या हमारे मिलने-जुलने वाले- सभी से क्षमा मांगना चाहिए। 
 
क्षमा मांगते समय मन में किसी तरह का संकोच व किसी तरह का खोट नहीं होना चाहिए। हमें अपनी आत्मा से क्षमा मांगनी चाहिए, क्योंकि मन के कषायों में फंसकर हम तरह-तरह के ढोंग, स्वांग रचकर अपने द्वारा दूसरों को दुख पहुंचाते हैं। उन्हें गलत परिभाषित करने और नीचा दिखाने के चक्कर में हम दूसरों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखते, जो कि सरासर गलत है। 
 
दसलक्षण पर्व के दिनों में किया गया त्याग और उपासना हमें जीवन की सच्ची राह दिखाते हैं। हमें तन, मन और वचन से चोरी, हिंसा, व्यभिचार, ईर्ष्या, क्रोध, मान, छल, गाली, निंदा और झूठ इन दस दोषों से दूर रहना ‍चाहिए। 
 
दसलक्षण पर्व जैन धर्म के दस लक्षणों को दर्शाते हैं जिनको अपने जीवन में उतारकर हर मनुष्य मुक्ति का मार्ग अपना सकता है। 

आगे पढ़ें दसलक्षण पर्व के 10 धर्मों की शिक्षा

 

ये हैं दसलक्षण के दस धर्मों की शिक्षा :- 


 
* उत्तम क्षमा - क्षमा को धारण करने वाला समस्त जीवों के प्रति मैत्रीभाव को दर्शाता है। 

* उत्तम मार्दव - मनुष्य के मान और अहंकार का नाश करके उसकी विनयशीलता को दर्शाता है। 

* उत्तम आर्जव - इस धर्म को अपनाने से मनुष्य निष्कपट एवं राग-द्वेष से दूर होकर सरल हृदय से जीवन व्यतीत करता है। 

* उत्तम सत्य - जब जीवन में सत्य धर्म अवतरित हो जाता है, तब मनुष्य की संसार सागर से मुक्ति निश्चित है। 

* उत्तम शौच - अपने मन को निर्लोभी बनाने की सीख देता है, उत्तम शौच धर्म। अपने जीवन में संतोष धारण करना ही इसका मुख्य उद्देश्य है। 

* उत्तम संयम - अपने जीवन में संयम धारण करके ही मनुष्य का जीवन सार्थक हो सकता है। 

* उत्तम तप - जो मनुष्य कठिन तप के द्वारा अपने तन-मन को शुद्ध करता है, उसके कई जन्मों के कर्म नष्ट हो जाते हैं। 

* उत्तम त्याग - जीवन के त्याग धर्म को अपनाकर चलने वाले मनुष्य को मुक्ति स्वयंमेव प्राप्त हो जाती है। 
 
* उत्तम आंकिचन - जो मनुष्य जीवन के सभी प्रकार के परिग्रहों का त्याग करता है, उसे मोक्ष सुख की प्राप्ति अवश्य होती है। 

* उत्तम ब्रह्मचर्य - जीवन में ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करने से मोक्ष की प्राप्ति‍ अवश्य होती है। 

इस प्रकार दस धर्मों को अपने जीवन में अपनाकर जो व्यक्ति इसके अनुसार आचरण करता है, वह निश्चित ही निर्वाण पद को प्राप्त कर सकता है। पयुर्षण पर्व के यह दस दिन हमें इस तरह की शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा देते हैंं और निरंतर क्षमा के पथ पर आगे बढ़ाते हुए मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं। 
 
अत: क्षमावाणी के दिन बिना किसी संकोच के तन-मन से सभी से क्षमा-याचना मांगना (करना) ही जैन धर्म का उद्देश्य है अत: क्षमावाणी के इस पावन पर्व पर मैं दिल से सभी से क्षमा-याचना करती हूं।

अंत में बस इतना ही 'जय जिनेन्द्र! उत्तम क्षमा...।' 


लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
श्रीमती राजश्री कासलीवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव। धर्म, व्रत-त्योहार, ज्योतिष, रेसिपी, साहित्य, लाइफ स्टाइल और अन्य विषयों पर लेखन का कार्य। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब-एडिटर (कंटेंट) के पद पर कार्यरत हैं।  .... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 06 नवंबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर कब करें पूजा और अभ्यंग स्नान? जानें सटीक शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, विधि और कथा

Diwali 2026: दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, नोट करें संपूर्ण पूजन विधि, सामग्री और कथा

Diwali 2026: दिवाली की रात भूलकर भी न करें ये 5 तांत्रिक प्रयोग, हो सकता है भारी नुकसान

Diwali 2026: दिवाली की रात चुपचाप कर लें ये 5 गुप्त प्रयोग, साल भर होगी अपार धन की वर्षा

सभी देखें

धनतेरस पर आरोग्य की पूजा करें, अपने डॉक्टर को धन्यवाद दें

Dhanteras 2026: धनतेरस पर इस सरल विधि से करें भगवान धन्वंतरि की पूजा, नोट करें सटीक शुभ मुहूर्त और सामग्री

मंगल गोचर 2026: सिंह राशि में आ रहे हैं ग्रहों के सेनापति, इन 5 राशियों पर बरसेगी विशेष कृपा

धनतेरस पर इन चीजों की है सबसे ज्यादा मांग, बर्तन-सोने के साथ छाए ये नए ट्रेंड्स, जानें क्या खरीद रहे हैं लोग?

।। श्री लक्ष्मीजी की आरती ।। Lakshmi ji ki aarti

अगला लेख