suvichar

Rohini Vrat 2024: जैन पर्व रोहिणी व्रत, जानें महत्व, पूजा विधि, कथा और लाभ

Written By WD Feature Desk
Updated: शनिवार, 16 मार्च 2024 (09:56 IST)
HIGHLIGHTS
 
• कैसे किया जाता है रोहिणी व्रत। 
• रोहिणी व्रत महत्व और कथा के बारे में जानें।
• रोहिणी व्रत में किस भगवान का होता है पूजन। 

ALSO READ: jain calendar: जैन धर्म का फाल्गुन अष्टाह्निका विधान कब से हो रहा है प्रारंभ?
 
Rohini Vrat 16th March 2024 : जैन धर्म के अनुसार प्रतिमाह रोहिणी व्रत मनाया जाता है। रोहिणी व्रत का जैन समुदाय में खास महत्‍व है। जैन पंचांग के अनुसार, 16 मार्च 2024, शनिवार को रोहिणी व्रत मनाया जा रहा है। 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। यह व्रत स्वास्थ्य, सुख और शांति देता है। इस व्रत के प्रभाव से आर्थिक समस्याओं से छुटकारा भी मिलता है। 
 
व्रत का महत्व- दिगंबर जैन समुदाय में रोहिणी व्रत का बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। 27 नक्षत्रों में शामिल रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत होता है, इसी वजह से इसे रोहिणी व्रत कहा जाता है। यह व्रत महिलाओं के लिए अनिवार्य माना गया है। हालांकि इस व्रत को कोई भी कर सकता है।

इस व्रत को पुरुष और महिलाएं दोनों कर सकते हैं। यह व्रत आत्‍मा के विकारों को दूर कर कर्म बंधन से छुटकारा दिलाने में सहायक है। इस व्रत में पूरे विधि-विधान के साथ भगवान वासुपूज्य की पूजा की जाती है। इस दिन जैन धर्म के अनुयायी वासुपूज्य स्वामी की पूजा और उपासना करके व्रत रखते है। जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर के रूप में भगवान वासुपूज्य स्वामी को जाना जाता है। इस व्रत का समापन उद्यापन के बाद ही किया जाता है। 
 
व्रत की पूजन विधि : रोहिरी व्रत की पूजन विधि के अनुसार इस दिन महिलाएं प्रात: जल्दी उठकर स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करके पवित्र होकर पूजा करती हैं। इस व्रत में जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का पूजन किया जाता है। इस पूजन के लिए वासुपूज्‍य भगवान की पांचरत्‍न, ताम्र या स्‍वर्ण प्रतिमा की स्‍थापना की जाती है। उनकी आराधना तथा रोहिणी व्रत का पालन करके गरीबों को दान देने का महत्व होता है। यह व्रत उदया तिथि में रोहिणी नक्षत्र के दिन से शुरू होकर अगले नक्षत्र मार्गशीर्ष तक चलता है। 
 
कथा-Rohini Vrat Katha  
 
रोहिणी व्रत पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में चंपापुरी नामक नगर में राजा माधवा अपनी रानी लक्ष्‍मीपति के साथ राज करते थे। उनके 7 पुत्र एवं 1 रोहिणी नाम की पुत्री थी। एक बार राजा ने निमित्‍तज्ञानी से पूछा कि मेरी पुत्री का वर कौन होगा? तो उन्‍होंने कहा कि हस्तिनापुर के राजकुमार अशोक के साथ तेरी पुत्री का विवाह होगा।

यह सुनकर राजा ने स्‍वयंवर का आयोजन किया जिसमें कन्‍या रोहिणी ने राजकुमार अशोक के गले में वरमाला डाली और उन दोनों का विवाह संपन्‍न हुआ। एक समय हस्तिनापुर नगर के वन में श्री चारण मुनिराज आए। राजा अपने प्रियजनों के साथ उनके दर्शन के लिए गया और प्रणाम करके धर्मोपदेश को ग्रहण किया। इसके पश्‍चात राजा ने मुनिराज से पूछा कि मेरी रानी इतनी शांतचित्त क्‍यों है?

तब गुरुवर ने कहा कि इसी नगर में वस्‍तुपाल नाम का राजा था और उसका धनमित्र नामक एक मित्र था। उस धनमित्र की दुर्गंधा कन्‍या उत्पन्‍न हुई। धनमित्र को हमेशा चिंता रहती थी कि इस कन्‍या से कौन विवाह करेगा? धनमित्र ने धन का लोभ देकर अपने मित्र के पुत्र श्रीषेण से उसका विवाह कर दिया, लेकिन अत्‍यंत दुर्गंध से पीडि़त होकर वह एक ही मास में उसे छोड़कर कहीं चला गया।
 
इसी समय अमृतसेन मुनिराज विहार करते हुए नगर में आए, तो धनमित्र अपनी पुत्री दुर्गंधा के साथ वंदना करने गया और मुनिराज से पुत्री के भविष्य के बारे में पूछा। उन्‍होंने बताया कि गिरनार पर्वत के निकट एक नगर में राजा भूपाल राज्‍य करते थे। उनकी सिंधुमती नाम की रानी थी।

एक दिन राजा, रानी सहित वनक्रीड़ा के लिए चले, सो मार्ग में मुनिराज को देखकर राजा ने रानी से घर जाकर मुनि के लिए आहार व्यवस्था करने को कहा। राजा की आज्ञा से रानी चली तो गई, परंतु क्रोधित होकर उसने मुनिराज को कड़वी तुम्‍बी का आहार दिया जिससे मुनिराज को अत्‍यंत वेदना हुई और तत्‍काल उन्‍होंने प्राण त्‍याग दिए।
 
जब राजा को इस विषय में पता चला, तो उन्‍होंने रानी को नगर में बाहर निकाल दिया और इस पाप से रानी के शरीर में कोढ़ उत्‍पन्‍न हो गया। अत्‍यधिक वेदना व दु:ख को भोगते हुए वो रौद्र भावों से मरकर नर्क में गई। वहां अनंत दु:खों को भोगने के बाद पशु योनि में उत्‍पन्न और फिर तेरे घर दुर्गंधा कन्‍या हुई। यह पूर्ण वृत्तांत सुनकर धनमित्र ने पूछा- कोई व्रत-विधानादि धर्म कार्य बताइए जिससे कि यह पातक दूर हो। 
 
तब स्वामी ने कहा- सम्‍यकदर्शन सहित रोहिणी व्रत पालन करो अर्थात प्रति मास में रोहिणी नामक नक्षत्र जिस दिन आए, उस दिन चारों प्रकार के आहार का त्‍याग करें और श्री जिन चैत्‍यालय में जाकर धर्मध्‍यान सहित 16 प्रहर व्‍यतीत करें अर्थात सामायिक, स्‍वाध्याय, धर्मचर्चा, पूजा, अभिषेक आदि में समय बिताए और स्‍वशक्ति दान करें। इस प्रकार यह व्रत 5 वर्ष और 5 मास तक करें।

दुर्गंधा ने श्रद्धापूर्वक व्रत धारण किया और आयु के अंत में संन्यास सहित मरण कर प्रथम स्‍वर्ग में देवी हुई। वहां से आकर तेरी परमप्रिया रानी हुई। इसके बाद राजा अशोक ने अपने भविष्य के बारे में पूछा, तो स्‍वामी बोले- भील होते हुए तूने मुनिराज पर घोर उपसर्ग किया था, सो तू मरकर नरक गया और फिर अनेक कुयोनियों में भ्रमण करता हुआ एक वणिक के घर जन्म लिया, सो अत्‍यंत घृणित शरीर पाया, तब तूने मुनिराज के उपदेश से रोहिणी व्रत किया।

फलस्‍वरूप स्वर्गों में उत्‍पन्‍न होते हुए यहां अशोक नामक राजा हुआ। इस प्रकार राजा अशोक और रानी रोहिणी, रोहिणी व्रत के प्रभाव से स्‍वर्गादि सुख पाने के उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
 
व्रत के लाभ : Rohini Vrat Ke Labh 
 
1. इस दिन व्रत रखने से भगवान वासुपूज्य और माता रोहिणी के आशीर्वाद से घर से आर्थिक समस्या दूर होती हैं।
2. घर में सदैव धन की देवी मां लक्ष्मी का वास बना रहता है। 
3. ऋण मुक्ति और आय बढ़ाने का मार्ग मिल जाता है। 
4. माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से पति की आयु लंबी हो जाती है और उनका स्वास्थ अच्छा रहता है। 
5. इस व्रत से ईर्ष्या, द्वेष, जैसे भाव भी दूर हो जाते हैं। 
6. घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की निरंतर बढ़ोतरी होती है। 
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

16 September Birthday: आपको 16 सितंबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (16 सितंबर, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 16 सितंबर 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

परिवर्तिनी एकादशी 2026 का व्रत कब रखा जाएगा, क्या है इसका महत्व?

Ganesh Visarjan 2026: गणपति विसर्जन की सरल विधि, जानें पूजा से लेकर विदाई तक के नियम

अगला लेख