मोहर्रम की अहम तारीख
कत्ल की रात, मोहर्रम का विसर्जन 17 को
मोहर्रम की आठवीं तारीख मुस्लिमों ने अकीदत के साथ मनाई। गुरुवार को कत्ल की रात है। इस दिन बाजे-गाजे के साथ ताजिए निकाले जाएँगे। साथ ही सुबह से ही शेर नाच की धूम रहेगी। बुधवार को मोहर्रम का आठवाँ दिन था, लिहाजा अन्य दिनों की तरह आज भी शोहदाए करबला की याद में मातम, मजलिश, मरसिया, रोजा, इबादत और नमाज का दौर चलता रहा। शहर में मंगलवार की तरह आज भी शेर नाच की धूम रही। 16 और 17 दिसंबर को मोहर्रम की अहम तारीख रहेगी।इस मौके पर लोग यौमे आशुरा की नमाज अदा कर फातिहा खानीकर शोहदाए करबला को याद करेंगे। इस दिन सुबह से ही शेरों का नाच शुरू हो जाएगा। शाम ढलते ही शहर में ढोल-ताशों से आसमान गूँजने लगेगा और इमामबाड़ों से शान से ताजिए निकाले जाएँगे।
मोहर्रम के इस रात को कत्ल की रात के रूप में मनाकर अकीदतमंद अपनी श्रद्घा पेश करेंगे। मोहर्रम का विसर्जन 17 दिसंबर को होगा। इस दिन शराबबंदी रहेगी। इस्लामी उसूलों को न भुलाएँ :- हजरत इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों की शहादत इस्लाम के अनुयायियों के लिए सबक हैं कि आधुनिकता व पश्चिमी तहजीब की चकाचौंध में इस्लामी उसूलों को भुला न दें। हजरत इमाम हसन-हुसैन के जीवन से प्रेरणा लेकर सदाचारी जिंदगी जीने की कोशिश करें।हजरत इमाम हुसैन की कर्बला मैदान की शहादत ये संदेश देती है कि अन्यायी कितना ही ताकतवर क्यों न हो, उसके सामने झुकना नहीं चाहिए। न्याय को जिंदा रखने के लिए चंद साथियों के साथ उसका मुकाबला किया जा सकता है, भले ही जान क्यों न गँवाना पड़े। इमाम हुसैन की शहादत से न्याय को जिंदा रखने के लिए सब कुछ कुर्बान करने का सबक मिलता है। कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश कर ये संकल्प लिया जाना चाहिए कि न्याय को जिंदा रखने के लिए कोई भी कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेंगे।कर्बला के मैदान में लड़ी गई जंग हक और बातिल के बीच थी। हजरत इमाम हुसैन ने 80 साल के बुजुर्गों से लेकर नन्हे-मुन्ने बच्चों की शहादत देकर हक पर कायम रहने की दुनिया को सीख दी। सच्चाई और अच्छाई से न्याय का रास्ता ही मुल्क, सूबे, समाज में शांति और सद्भाव को मजबूत बनाने में मदद करता है। कर्बला के शहीदों की याद में मनाए जा रहे मोहर्रम में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की शब की यादगार शब-ए-शहादत नौ मोहर्रम यानी 16 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन रात में ताजिए गस्त पर निकलेंगे। अगले दिन 17 दिसंबर को यौम-ए-शहादत मनाया जाएगा, जिसमें ताजिए दफनाए जाएँगे। दाऊदी बोहरा समाज का यौमे आशुरा : दाऊदी बोहरा समाज का यौमे आशुरा 16 दिसंबर को मनाया गया। सभी बोहरा मस्जिदों में आमिल साहेबान हजरते इमाम हुसैन और कर्बला के सभी शहीदों की शहादत पर वा"ज फरमाएँगे। पूरे दिन वा"ज होने के कारण सभी समाजवासी पूर्ण अवकाश रखेंगे। इस अवसर पर समाजवासियों को सिगरेट, शराब, तंबाकू और तमाम तरह के व्यसन से दूर रहने की हिदायत दी जाएगी। जो लोग किसी भी किस्म की नशे की लत से जुड़े हैं, वे मौला की खातिर इसे इसी वक्त त्याग दें और हमेशा-हमेशा के लिए तौबा कर लें। यौमे आशुरा को समाज की सभी मस्जिदों में समाजवासियों के सहयोग से हलीम (मिश्रित अनाजों से निर्मित खिचड़ा) और रवे का मीठा हलवा भी बनाया जाएगा।