ट्रंप का ईरान पर 'Final Blow' प्लान? जानें क्या है सेंटकॉम की 'शक्तिशाली' सैन्य योजना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गुरुवार को एक ऐसी जानकारी दी गई है, जो न केवल मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को हिला सकती है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर और ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल डैन कैन ने ट्रंप को ईरान के खिलाफ नई सैन्य योजनाओं से अवगत कराया है।
क्या है सेंटकॉम की 'संक्षिप्त और शक्तिशाली' योजना?
ताजा रिपोर्टों और सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बेहद सटीक रणनीति तैयार की है। इस योजना के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:
- बुनियादी ढांचे पर सीधा प्रहार : सेंटकॉम ने ईरान के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर "संक्षिप्त मगर शक्तिशाली" हमलों का प्रस्ताव रखा है।
- मकसद : इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान को बातचीत की मेज पर लाना और परमाणु मुद्दे पर उसके अड़ियल रुख को नरम करना है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण : एक अन्य बड़े विकल्प के रूप में होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए ज़मीनी सेना की तैनाती भी की जा सकती है ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।
- विशेष अभियान (Special Ops) : ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करने के लिए 'स्पेशल फोर्सेज' के ऑपरेशन पर भी चर्चा की गई है। ALSO READ: हाथ में राइफल और ईरान को खुली चेतावनी; ट्रंप की इस फोटो ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका
ट्रंप की पहली पसंद : बमबारी या नाकेबंदी?
ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वे सीधे युद्ध के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने Axios को बताया कि उन्हें 'नौसैनिक नाकेबंदी' (Naval Blockade) बमबारी की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी लगती है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल, ट्रंप नाकेबंदी को अपना सबसे बड़ा हथियार मान रहे हैं, लेकिन अगर ईरान ने अपना रुख नहीं बदला, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ALSO READ: डोनाल्ड ट्रंप का दावा, टूटने की कगार पर ईरान, Hormuz को खोलने के लिए गिड़गिड़ाया
इतिहास की पुनरावृत्ति? (26 फरवरी का संबंध)
यह पहली बार नहीं है जब एडमिरल कूपर ने ट्रंप को ऐसी ब्रीफिंग दी है। गौर करने वाली बात यह है कि 26 फरवरी को भी कूपर ने राष्ट्रपति को इसी तरह की जानकारी दी थी। उसके ठीक दो दिन बाद, अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया था। क्या इस बार की बैठक भी किसी बड़े हमले का पूर्व संकेत है? ALSO READ: ईरान पर परमाणु हमले के सवाल पर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, किसे बताया बेवकूफ
विशेषज्ञ सलाह : आम जनता और निवेशकों पर प्रभाव
अगर आप वैश्विक बाजार या कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखते हैं, तो सावधान हो जाइए। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे आपके पेट्रोल-डीजल के दाम और शेयर बाजार को प्रभावित करेगा। ऐसे समय में सोने (Gold) जैसे सुरक्षित निवेश पर ध्यान देना समझदारी हो सकती है।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि किसी भी हमले का उत्तर "पीड़ादायक" होगा। फिलहाल, फैसला ट्रंप के हाथ में है। क्या वे शांति के लिए 'नाकेबंदी' का रास्ता चुनेंगे या 'शक्तिशाली हमले' के जरिए आर-पार की जंग छेड़ेंगे?

