तारों के चारों ओर हैं पृथ्वी जैसे ग्रह : अध्ययन

मेलबर्न।|
मेलबर्न। विज्ञानियों ने अपनी गणनाओं के जरिए दावा किया है कि हमारे में अधिकतर तारों के आसपास पृथ्वी जैसे अरबों ग्रह हैं। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र टिम बोवेयर्ड और सहायक प्रोफेसर चार्ले लाइनवीवर के नेतृत्व में किए गए एक नए शोध ने यह निष्कर्ष 200 साल पुराने एक विचार को उन हजारों बाह्य ग्रहों पर लगाकर निकाला है, जिनकी खोज नासा के केपलर अंतरिक्ष दूरदर्शी ने की थी।
उन्होंने पाया कि एक मानक तारे (नक्षत्र) के लगभग दो ग्रह होते हैं। ये ग्रह कथित गोल्डीलॉक्स क्षेत्र में होते हैं। यह क्षेत्र तारे से परे वह क्षेत्र होता है, जहां जीवन के लिए जरूरी जल द्रव की अवस्था में रह सकता है। एएनयू के रिसर्च स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजीक्स के लाइनवीवर ने कहा कि जीवन के लिए जरूरी चीजें प्रचुर मात्रा में हैं और अब हम जानते हैं कि रहने लायक पर्यावरण भी पर्याप्त है।> > हालांकि ब्रह्मांड में इंसानों जैसी बुद्धिमत्ता रखने वाले एलियन (परग्रही जीव) नहीं हैं, जो रेडियो दूरदर्शी और अंतरिक्ष यान बना सकें वर्ना निश्चित तौर पर हमें उनके बारे में कुछ देखने या सुनने को मिल गया होता। लाइनवीवर ने कहा कि ऐसा भी हो सकता है कि जीवन की उत्पत्ति में कोई अन्य बाधा हो, जिसपर हमने अभी काम ही नहीं किया। या फिर संभव है बौद्धिक सभ्यताओं का विकास हुआ हो लेकिन फिर आत्म-विनाश हो गया हो।
केपलर अंतरिक्ष दूरदर्शी उन ग्रहों को देखता है, जो उनके तारों के बहुत पास होते हैं। ये द्रवित जल के लिए बेहद गर्म होते हैं। लेकिन टीम ने केपलर के नतीजों का इस्तेमाल उस सिद्धांत को अपनाते हुए किया, जिसे यूरेनस (वरुण) ग्रह के अस्तित्व की जानकारी देने के लिए प्रयोग किया गया था।

लाइनवीवर ने कहा कि जिन ग्रहों को केपलर नहीं देख सकता है, उन ग्रहों की स्थितियों का पता लगाने के लिए हमने टिटियस-बोड संबंध (एक नियम) और केपलर डाटा का इस्तेमाल किया। इस अध्ययन का प्रकाशन ‘मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ की पत्रिका में हुआ।  (भाषा)




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