ओबामा ने मोदी से कहा, 'आप कर्मयोगी'

ने पई ताव (म्यांमार)| Last Updated: गुरुवार, 13 नवंबर 2014 (00:08 IST)
-शोभना जैन 
 
ने पई ताव (म्यांमार)। यहां चल रहे पूर्वी एशियाई शिखर बैठक और आसिआन भारत शिखर बैठक में हिस्सा लेने आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को दुनिया की दो विशिष्ट हस्तियों से मिले। यह हस्तियां थीं अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, जिन्होंने एक भव्य रात्रिभोज के दौरान मोदी को 'कर्मयोगी' बताया जबकि दूसरी पूर्व निर्धारित मुलाकात में की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सांग सू की ने भारत को 'अपना दूसरा घर' बताया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने ओबामा-मोदी की इस 'सरसरी सी मुलाकात' का फोटो ट्वीट करके ओबामा की टिप्पणी साझा की। इससे पूर्व गर्मजोशी से भरे माहौल में नोबेल पुरस्कार विजेता म्यांमार में विपक्ष की नेता और लोकतंत्र समर्थक आंग सांग सू की ने मोदी से मुलाक़ात के दौरान कहा कि भारत उनका 'दूसरा घर' है। 
 
मोदी की राष्ट्रपति ओबामा से संक्षिप्त मुलाकात शिखर बैठकों में हिस्सा लेने आए दुनियाभर के नेताओं के सम्मान में दिए गए रात्रिभोज के दौरान हुई, जिसमें म्यांमार की पारंपरिक पोशाक पहने दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया तो ओबामा ने मुस्कराते हुए उनसे कहा, 'आप कर्मयोगी हैं'। 
इससे पूर्व सुश्री सु ने मोदी से मुलाकात के दौरान भारत प्रवास से जुड़ी  स्मृतियां भी साझा कीं। सुश्री सू की काफी बरस तक भारत में रही हैं। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई तथा कॉलेज शिक्षा यही से की है। प्रधानमंत्री मोदी यहां जिस रॉयल होटल में रुके हैं, वहां के प्रेसीडेंशियल सुइट में आज शाम यह मुलाकात हुई। 
 
मुलाकात के बाद मोदी ने ट्वीट किया 'यह उनके लिए पहला मौका था, जब वे किसी लोकतंत्र समर्थक नेता से मिल रहे हैं। सू की से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने भी ट्वीट किया कि म्यांमार की नेता ने प्रधानमंत्री से कहा कि भारत उनका 'दूसरा घर' है। मोदी से सुश्री की यह पहली मुलाकात है।
 
विदेशी मामलों के विशेषज्ञ के अनुसार, 'म्यांमार के राष्ट्रपति यु थिन सेन के साथ मुलाकात के साथ-साथ भारत के प्रधानमंत्री का विपक्ष की नेता सु की से मिलना भारत के लोकतंत्र के परिपक्व सोच की परिचायक है।
 
गौरतलब  है कि म्यांमार में इस वक्त इस  मसले पर राष्ट्रीय बहस हो रही है कि नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की अध्यक्ष और महासचिव सुश्री सू की को 2015 के संसदीय चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाए या नहीं। फिलहाल संविधान के एक प्रावधान के चलते उन पर चुनाव लड़ने से रोक लगी है।
 
सुश्री सू की दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में पढ़ी हैं। आंग सू की सू की के पिता आंग सान की हत्या के बाद उनकी मां डाव खीन यी 1960 में भारत और नेपाल में बर्मा की राजदूत नियुक्त थीं और वे उनके साथ भारत रही थीं। उन्होंने नई दिल्ली के जीसस कॉन्वेंट और मैरी स्कूल में स्कूली शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1987 में कुछ समय तक वे शिमला के इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी में फेलो भी रही हैं।   
 
सू की नवंबर 2012 में सांसद की हैसियत से भारत यात्रा पर आई थीं। यह यात्रा म्यांमार में आम चुनावों के दो वर्ष बाद हुई थी, जिसके बाद वहां सैन्य शासन समाप्त हुआ था। चालीस वर्ष बाद हुई सू की उस भारत यात्रा में उनका जोरदार स्वागत हुआ था और भारत के लोकतंत्र समर्थकों सहित सभी ने उनका पूरे जोश से अभिनंदन किया था। म्यांमार के सैन्य शासन ने उनके लोकतंत्र समर्थक विचारों की वजह से उन्हें वर्षों तक नजरबंद रखा था।
 
इससे पहले प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय वार्ताओं और 12वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में भारत की नई आर्थिक विकास यात्रा में 10 देशों के समूह आसियान को हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया दिया। विशेष तौर पर समूह के देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातों में ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया।
 
मोदी ने आसियान नेताओं से कहा कि भारत में आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण तथा व्यापार का एक नया युग शुरू हो चुका है। आज विश्व तथा क्षेत्र को एक मजबूत भारत-आसियान साझेदारी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित होता भारत और आसियान एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार हो सकते हैं। (वीएनआई)
 



और भी पढ़ें :