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कारों क्रांति : बिना ड्राइवर खुद ही पार्क हो जाएगी कार, सोलर कार भी मचाएगी धूम, मगर कीमत...

Updated: बुधवार, 14 दिसंबर 2022 (15:46 IST)
जर्मनी की दो नामी कंपनियों, मर्सिडीज़-बेंज़ और बॉश ने मिलकर बिना ड्राइवर की ऐसी स्वचालित कार बनाई है, जिसका नियमित (सीरियल) उत्पादन जल्द ही शुरू हो सकता है। जर्मनी के मोटर-वाहन प्राधिकरण ने नियमित उत्पादन की हरी झंडी दिखा दी है। किसी पूरी तरह स्वचालित कार के नियमित उत्पादन की दुनिया में यह पहली आधिकारिक अनुमति है। यह कार बिना किसी चालक के अपने आप को स्वयं ही पार्क भी कर सकती है।
 
मर्सिडीज़-बेंज़ की यह कार उन सभी सुविधाओं से लैस है, जो अन्यथा कार चालक की सहायता करने वाले 'ड्राइविंग एसिस्टेंस सिस्टम' के लेवल4 के अंतर्गत आती हैं। स्वाचालित कारों के लिए बना इस समय लेवल4 ही दूसरा उच्चतम स्तर है। इस स्तर में एक ऐसा पार्किंग सिस्टम होता है, जिस के द्वारा कार को, बिना ड्राइवर के, पार्किंग गैरेज में पार्क किया जा सकता है। स्वचालित पार्किंग की सुविधा वाली आधिकारिक अनुमति जर्मनी में अभी मर्सिडीज़ की केवलS-क्लास और उसी के जैसे EQS मॉडल के लिए है और वह भी जर्मनी के केवल श्टुटगार्ट हवाई अड्डे के P6 पार्किंग हाउस के लिए। श्टुटगार्ट ही इसलिए, क्योंकि मर्सिडीज-बेंज श्टुटगार्ट में ही स्थित है।
 
मर्सिडीज़ की स्वचालित कार के मालिक को, या जो कोई उस का उपयोग कर रहा होगा उसे, श्टुटगार्ट हवाई अड्डे के इस बहुमंजिला पार्किंग हाउस में कार खड़ी करने के लिए पहले एक जगह बुक (आरक्षित) करनी होगी। इसके बाद वह स्मार्टफोन के लिए एक विशेष ऐप द्वारा कार को वहां जा कर ख़ुद ही अकेले पार्क होने का आदेश दे सकता है। इसी ऐप के द्वारा वह कार को बाद में वापस भी बुला सकता है।
 
यदि सब कुछ ठीक चला, तो इसी तरह भविष्य में, कार पार्क करने की ऐसी सभी जगहों और गैरजों में ऑटो-पायलट सिस्टम वाली कारों को अपने आप पार्क करने के लिए कहा जा सकता है, जो बॉश कंपनी के ऐसे सेंसरों से लैस हों, जिनका काम यह देखना होगा कि पार्किंग के लिए आती-जाती करें एक-दूसरे के रास्ते में आड़े न आवें, कोई टक्कर या दुर्घटना न हो। ये सेंसर, कारों के ऑटो-पायलट के संपर्क में रहेंगे और उन्हें सही निर्देश दिया करेंगे।
 
मर्सिडीज़-बेंज की सहयोगी कंपनी बॉश, भविष्य में दुनिया भर में सैकड़ों बहु-मंजिला कार पार्कों को स्वायत्त पार्किंग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचों और प्रौद्योगिकी से लैस करना चाहती है।
 
मर्सिडीज़-बेंज के इंजीनियर 2015 से स्वचालित ड्राइविंग पर काम करते रहे हैं। 2019 की शुरुआत में, श्टुटगार्ट में ही स्थित मर्सिडीज़ संग्रहालय के पार्किंग गैरेज में नवविकसित वाहनों के साथ चालक रहित पार्किंग के कई परीक्षण किये गए।
 
पहली सोलर कार का उत्पादन शुरू : नीदरलैंड (हॉलैंड) की एक नई स्टार्ट-अप कंपनी, 'लाइटइयर' का कहना है कि वह सौर ऊर्जा से बिजली बनाने वाली अपनी इलेक्ट्रिक कार का उत्पादन शुरू कर रही है। इस कार की छत धूप को बिजली में बदलने वाले फ़ोटोवोल्टाइक पैनलों जैसी सामग्री की बनी होगी। कार में लगी बैटरी सौर ऊर्जा से अपने आप चार्ज हुआ करेगी।
 
बैटरी को निरंतर सौर ऊर्जा का सहारा मिलने से कार की पहुंच को प्रति दिन 70 किलोमीटर तक बढ़ाना संभव होगा। लेकिन, ध्यान देने की बात यह है कि यह अतिरिक्त दूरी हर समय और हर जगह संभव नहीं होगी। यह दूरी किसी देश या स्थान की भौगोलिक स्थित पर निर्भर करेगी। जहां एक दिन में और पूरे वर्ष में जितने अधिक समय तक धूप रहती होगी, वहां सौर ऊर्जा से मिली यह अतिरिक्त दूरी भी उतनी ही अधिक होगी। जहां धूप जितने कम समय तक रहती होगी, वहां यह दूरी भी उतनी ही कम मिलेगी।
 
'लाइटइयर' ने हिसाब लगाया है कि स्वयं नीदरलैंड में, जो बहुत उत्तर में है और जहां सारे वर्ष अक्सर बरसात होती रहती है, यह अतिरिक्त दूरी प्रतिदिन केवल दो महीनों तक ही मिल पाएगी। किंतु, पुर्तगाल में, जो नीदरलैंड की अपेक्षा काफ़ी दक्षिण में है, यह लाभ 7 महीनों तक मिल सकता है। भारत तो और अधिक दक्षिण में कर्क रेखा के दोनों ओर स्थित होने के कारण यूरोप के किसी भी देश की अपेक्षा कहीं अधिक धूपहला देश है। इसलिए भारत में 'लाइटइयर' सोलर कार से मिलने वाली अतिरिक्त दूरी और अधिक होगी। समस्या होगी उसकी क़ीमत!
 
क़ीमत होगी 250,000 यूरो : लाइटइयर के पहले मॉडल 'लाइटइयर-0' की क़ीमत 250,000 यूरो (करीब 2,19,78, 485.70 रुपए) होगी। एक यूरो भारत में इस समय क़रीब 87 रुपए के बराबर है। स्टार्ट-अप का कहना है कि उसे पहले ही 150 ऑर्डर मिल चुके हैं। इस कार को फिनलैंड की एक फैक्ट्री में बनाया जाएगा। दिसंबर के शुरू में वहां प्रति सप्ताह एक कार बन रही थी। 2023 की दूसरी छमाही से यह गति प्रति सप्ताह 5 कारें हो जानी चाहिए।
 
लाइटइयर का कहना है कि वह एक नए, सस्ते मॉडल के विकास पर भी काम कर रही है। इस नए मॉडल 'लाइट ईयर-2' को शुरू-शुरू में 30,000 यूरो में बेचा जाएगा। उसका उत्पादन 2025 में शुरू होने की संभावना है। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
लेखक के बारे में
राम यादव
राम यादव डायचे वेले हिन्दी (जर्मनी) के पूर्व प्रमुख हैं। देश-विदेश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर इनकी अच्छी पकड़ है। आधी सदी से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। .... और पढ़ें

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