पाक आतंकवाद का केन्द्र-मनमोहन

लंदन (भाषा)| भाषा|
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को आतंकवाद का केन्‍द्र करार देते हुए ने कहा है कि विश्व समुदाय को इस कड़वी सचाई को स्वीकार करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं करने को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना भी की।


गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी प्रस्तावित मुलाकात से पूर्व मनमोहनसिंह ने कहा विश्व की यह जिम्मेदारी है कि वह यह देखे कि भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने में अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देने के अपने वादे को पाकिस्तान ने कितना पूरा किया है।

उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों के दोषियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करना इस बात का जिंदा प्रमाण है कि पाकिस्तान आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है।

जी समूह की शिखर बैठक में शामिल होने के लिए यहाँ आने से पूर्व सिंह ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में मनमोहन सिंह ने कहा यह इस बात का ताजा उदाहरण है कि मेरे पूर्ववर्ती और मेरे साथ 2004 से लेकर किए गए विभिन्न वादों के बावजूद व्यवहार में आतंकवाद को काबू करने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गयी है।

मनमोहन ने कहा कि उसने वादा किया था कि भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में पाक अपनी धरती का इस्तेमाल नहीं होने देगा। कल यहाँ पहुँचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा हम सब यह बात जानते हैं कि आज दुनिया में पाकिस्तान है।
उन्होंने कहा कि 26/11 हमले पूर्व नियोजित थे और पाकिस्तानी धरती से इन्हें अंजाम दिया गया और अब हर कोई इस बात को स्वीकार कर चुका है जिनमें विकसित देशों की खुफिया एजेंसियाँ भी शामिल हैं।

यह पूछे जाने पर कि मुंबई बम हमलों के लिए आरोपित लश्कर-ए-तोइबा किस प्रकार इतनी जल्दी पुन: हमला करने में सक्षम हो सकता है, सिंह ने कहा ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान सरकार ने वादा किया था कि वह आतंकवाद और उसके सभी रूपों पर नियंत्रण बनाएगी लेकिन न तो वे उन्हें नियंत्रित करने में सक्षम हैं और न ही उन्हें नियंत्रित करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका चाहेंगे कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों आतंकवादी तत्वों के कब्जे से मुक्त हों। ओबामा की हाल ही में घोषित अफगानिस्तान पाकिस्तान रणनीति की सफलता की संभावनाओं के आकलन के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा मैंने ओबामा की योजना का अध्ययन नहीं किया है।

पर उनका कहना था कि हम आतंकवाद के शिकार हैं और उम्मीद करते हैं कि विश्व समुदाय जो भी योजना बनाता है उसमें इस बात पर पर्याप्त ध्यान देगा कि आतंकवाद अफगानिस्तान के साथ ही पाकिस्तान की भी समस्या है।



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