sundarkand
✕

भारत में है विश्व का सबसे विशालकाय बरगद का पेड़

Updated: बुधवार, 18 अप्रैल 2018 (15:44 IST)
भारत में यूं तो बरगद के लाखों पेड़ काट दिए जाने के बाद अभी भी लाखों बरगद के पेड़ बचे हैं उनमें से कई हजार पुराने बरगदों में उज्जैन का सिद्धवट, प्रयाग का अक्षयवट, मथुरा-वृंदावन का वंशीवट, गया का गयावट, पंचवटी (नासिक) का पंचवट प्रमुख माना जाता है, लेकिन इसके अलावा भी भारत में कई विशालकाय वट वृक्ष पाए जाते हैं। उन्हीं में से एक है 'द ग्रेट बनियान ट्री'।
 
 
इसे अवश्य पढ़ें... 10 विचित्र पेड़ों के बारे में जानकर रह जाएंगे आप हैरान
 
 
इस विशालकाय वृक्ष पहली बार देखने से समझ में यह आता है कि यह कोई छोटा सा जंगल है जिसमें हजारों एक जैसे वृक्ष उगे हुए हैं लेकिन गौर से देखने पर समझ में आता है कि यह तो एक ही वृक्ष है जिसकी जटाएं, जड़ और तने चारों और फैल गए हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में ही है यह विश्व का सबसे बड़ा और विशालकाय बरगद का पेड़। हर साल देश-विदेश से हजारों टूरिस्ट इस बरगद को देखने के लिए आते हैं।
 
 
ये बरगद का पेड़ कोलकाता के आचार्य जगदीश चंद्र बोस बॉटनिकल गार्डन में है। साल 1787 में जब इस बोटेनिकल गार्डेन को स्थापित किया गया, उस समय इस बरगद की उम्र 15 से साल 20 साल थी। इस लिहाज से आज इस बरगद की उम्र लगभग 250 साल से भी अधिक है। इस बरगद को दूर से देखें तो ये एक जंगल की तरह नजर आता हैं। दरअसल, बरगद के पेड़ की शाखाओं से निकली जटाएं पानी की तलाश में नीचे जमीन की और बढती गईं, जो बाद में जड़ के रूप में पेड़ को पानी और सहारा देने लगीं।
 
 
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये बरगद दुनिया का सबसे चौड़ा पेड़ है, जो लगभग 14,500 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। इस बरगद की 3,372 से अधिक जटाएं जड़ का रूप ले चुकी हैं। सबसे सुखद यह कि यह बरगद पक्षियों की 87 अलग-अलग प्रजातियां का सुकून भरा घर भी है। मूल तने की परिधि जमीन से 1.7 मी. की ऊंचाई पर 16.5 मी. थी। वर्तमान में यह लगभग 18.918 वर्ग मी. के क्षेत्र में फैला है। वृक्ष की परिधि लगभग 486 मी. है। इसकी सबसे ऊंची शाखा 24 मी. लंबी है। वर्तमान में जमीन तक पहुंचने वाली स्तंभ जड़ों की कुल संख्या 3,772 है।
 
 
साल 1884 और 1987 में आए 2 चक्रवाती तुफानों ने इस बरगद को काफी नुकसान पहुंचाया था। साल 1925 में इस विशाल बरगद की मुख्य शाखा में फंगस लग गया, जिसके बाद मुख्य शाखा को काटना पड़ा, लेकिन इतना कुछ झेलने के बाद भी ये बरगद आज शान से अपनी जगह पर अडिग और अटल खड़ा है। 19वीं शताब्दी की कुछ यात्रा वृत्तातों में इसका उल्लेख अवश्य मिलता है।
 
इसकी विशलता को देखते हुए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसका नाम दर्ज है। इस विशाल बरगद के सम्मान में भारत सरकार ने साल 1987 में डाक टिकट जारी किया था और यह बरगद बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया का प्रतीक चिन्ह भी है।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

Tata Punch EV और Nexon EV को कड़ी टक्कर देगी Hyundai की सस्ती EV कार, जानिए कितनी मिलेगी रेंज

PM Kisan 24th Installment : किसानों के खाते में आ गए ₹2,000, पीएम मोदी ने जारी की 19 हजार करोड़ रुपये की किस्त, ऐसे चेक करें अपना स्टेटस

Samsung W27 : धमाका करने आया सैमसंग का सस्ता स्मार्टफोन, कंपनियों के छूटे पसीने

IDBI Bank Privatization : निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी पर पलटवार, कांग्रेस राज के बैंक घोटालों की खोली पोल

क्यों गिर रहे सोने-चांदी के भाव? रिकॉर्ड हाई से गोल्ड 51000 सस्ता, सिल्वर 2.33 लाख से अधिक टूटी, क्या खरीदारी का यही है सही मौका या करें इंतजार?

सभी देखें

आंध्रप्रदेश में 10वीं की छात्रा पर आरी से हमला, दायां हाथ कटा, चेहरे, गर्दन, कान पर गंभीर चोटें, दरिंदगी देख दहला सबका दिल

कौन हैं सीएम उमर अब्‍दुल्‍ला की दूसरी बीवी निधि राजदान, कितनी पढ़ी लिखी हैं और पहले किससे हुई थी शादी?

PM नरेंद्र मोदी ने ली एकता परेड की सलामी, देश की सुरक्षा के लिए सजग रहने की दिलाई शपथ

इजरायल में नेतन्याहू या आइसेनकोट, 10 नवंबर को होगा फैसला, आखिर किसकी होगी ताजपोशी?

अगला लेख