तात्या टोपे की देशभक्ति

स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी

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जन्म - 1814
मृत्यु - 18 अप्रैल, 1859

दांतों में उंगली दिए मौत भी खड़ी रही,

फौलादी सैनिक भारत के इस तरह लड़े

अंग्रेज बहादुर एक दुआ मांगा करते,

फिर किसी तात्या से पाला नहीं पड़े।'

- राष्ट्रीय कवि स्व. श्रीकृष्ण 'सरल'

तात्या टोपे का में येवला में हुआ। तात्या का वास्तविक नाम था, परंतु लोग स्नेह से उन्हें तात्या के नाम से पुकारते थे। पिता का नाम पांडुरंग त्र्यंबक भट था तथा माता का नाम रुक्मिणी बाई था। वे एक देशस्थ कुलकर्णी परिवार में जन्मे थे।
उनके पिता बाजीराव पेशवा के धर्मदाय विभाग के प्रमुख थे। उनकी विद्वत्ता एवं कर्तव्य परायणता देखकर बाजीराव ने उन्हें राज्सभा में बहुमूल्य नवरत्न जड़‍ित टोपी देकर उनका सम्मान किया था, तबसे उनका उपनाम 'टोपे' पड़ गया।



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