बड़ा एक्टर बनना चाहते थे, किडनी-लिवर देकर असली हीरो बने गौरव दवे, अहमदाबाद गया उनका दिल, गार्ड ऑफ ऑनर मिला
ऑर्गन डोनेट करने पर गौरव दवे को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
इंदौर अब अंगदान में भी देशभर में सिरमौर बनता जा रहा है। अंगदान का जो ताजा उदाहरण सामने आया है उसकी वजह से पूरे देश में इंदौर की चर्चा हो रही है। इंदौर के कलाकार गौरव दवे का दिल अब अहमदाबाद के एक शख्स में धड़केगा। बता दें कि गौरव की देह के लगभग सारे अंग की दान कर दिए गए हैं।
उनकी किडनियां और लिवर इंदौर में ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं, जबकि आंखें आई बैंक को दान की गई है। दिल अहमदाबाद के मरीज को लगाया जाएगा। बता दें कि गौरव ब्रेन डेड हो गए थे। जिसके बाद उनके परिवार ने यह फैसला लिया। अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए इंदौर में ग्रीन कोरिडर तैयार किया गया और उनका दिल अहमदाबाद भेजा गया है।
13 जुलाई को ब्रेनडेड हुए थे गौरव: इंदौर में खजूरी बाजार निवासी सतीश दवे और कविता दवे के 25 वर्षीय बेटे गौरव को 13 जुलाई को अचानक ब्रेन हेमरेज हुआ। उन्हें राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने इलाज किया, लेकिन गौरव की हालत नहीं सुधरी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत दो बार मेडिकल चेकअप के बाद स्पेशलिस्ट टीम ने गौरव को रविवार रात ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
इंदौर में बना 68वां ग्रीन कॉरिडोर : इसके बाद दवे परिवार ने ऐसा फैसला लिया, जिसने कई लोगों की जिंदगी में नई उम्मीद जगा दी। परिवार की सहमति से गौरव का हार्ट, लिवर, किडनियां और आंखें दान की गई हैं। इसके लिए सोमवार को इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। गौरव फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर का काम करते थे। वे एक्टर भी बनना चाहते थे। इस दौरान ऑर्गन डोनर गौरव दवे को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बता दें कि ब्रेन डेथ की पुष्टि होने के बाद गौरव की बहन वैदेही राठी, बहनोई पल्केश राठी और भाई रितिक चावरे ने माता-पिता को संभाला। उनसे गौरव के अंग दान करने को लेकर बातचीत की। माता-पिता ने इसके लिए सहमति दे दी।
अंगदान में मुस्कान का सहयोग : अंगदान की प्रक्रिया में मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य और लकी खत्री ने दवे परिवार का सहयोग किया। आर्य ने बताया कि डॉक्टरों ने परिवार को ब्रेन डेथ और अंगदान के बारे में समझाया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई।
कहां और किसे मिली नई जिंदगी : सोमवार सुबह गौरव का लिवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती 42 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। हार्ट ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद स्थित यूएन मेहता हॉस्पिटल भेजा गया, जहां 28 वर्षीय युवक को लगाया जाएगा। उनकी दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती 22 और 52 वर्ष की दो महिला मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं जबकि आंखें शंकरा आई बैंक के माध्यम से दान की गईं।
कौन थे गौरव, क्या करते थे : गौरव कास्टिंग डायरेक्टर थे, लेकिन उनका सपना बड़ा अभिनेता बनने का भी था। वे अपनी मेहनत, ईमानदारी और मिलनसार स्वभाव के कारण सभी के प्रिय थे। लेकिन गौरव ने जाते-जाते कई लोगों को नई जिंदगी देकर वे सच्चे मायनों में हीरो बन गए। मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के संदीपन आर्य ने बताया कि दवे परिवार ने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर जो निर्णय लिया, वह समाज के लिए एक बेहतरीन उदारहण है। सफाई के साथ ही अंगदान में भी इंदौर अब प्रेरणा बनता जा रहा है।
उनकी किडनियां और लिवर इंदौर में ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं, जबकि आंखें आई बैंक को दान की गई है। दिल अहमदाबाद के मरीज को लगाया जाएगा। बता दें कि गौरव ब्रेन डेड हो गए थे। जिसके बाद उनके परिवार ने यह फैसला लिया। अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए इंदौर में ग्रीन कोरिडर तैयार किया गया और उनका दिल अहमदाबाद भेजा गया है।
13 जुलाई को ब्रेनडेड हुए थे गौरव: इंदौर में खजूरी बाजार निवासी सतीश दवे और कविता दवे के 25 वर्षीय बेटे गौरव को 13 जुलाई को अचानक ब्रेन हेमरेज हुआ। उन्हें राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने इलाज किया, लेकिन गौरव की हालत नहीं सुधरी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत दो बार मेडिकल चेकअप के बाद स्पेशलिस्ट टीम ने गौरव को रविवार रात ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
अंगदान में मुस्कान का सहयोग : अंगदान की प्रक्रिया में मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य और लकी खत्री ने दवे परिवार का सहयोग किया। आर्य ने बताया कि डॉक्टरों ने परिवार को ब्रेन डेथ और अंगदान के बारे में समझाया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई।
कहां और किसे मिली नई जिंदगी : सोमवार सुबह गौरव का लिवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती 42 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। हार्ट ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद स्थित यूएन मेहता हॉस्पिटल भेजा गया, जहां 28 वर्षीय युवक को लगाया जाएगा। उनकी दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती 22 और 52 वर्ष की दो महिला मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं जबकि आंखें शंकरा आई बैंक के माध्यम से दान की गईं।
कौन थे गौरव, क्या करते थे : गौरव कास्टिंग डायरेक्टर थे, लेकिन उनका सपना बड़ा अभिनेता बनने का भी था। वे अपनी मेहनत, ईमानदारी और मिलनसार स्वभाव के कारण सभी के प्रिय थे। लेकिन गौरव ने जाते-जाते कई लोगों को नई जिंदगी देकर वे सच्चे मायनों में हीरो बन गए। मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के संदीपन आर्य ने बताया कि दवे परिवार ने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर जो निर्णय लिया, वह समाज के लिए एक बेहतरीन उदारहण है। सफाई के साथ ही अंगदान में भी इंदौर अब प्रेरणा बनता जा रहा है।
