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प्रधान के बाद अब गडकरी निशाने पर! 100% शुद्ध पेट्रोल के लिए 'E20 जनता पार्टी' मैदान में

EJP digital campaign
EJP digital campaign: केन्द्र की नरेन्द्र मोदी नीत सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन तो खत्म हो गया, लेकिन अब केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ मोर्चा खुल गया है। अब देश में E20 जनता पार्टी (EJP) ने भी दस्तक दे दी है। यह पार्टी पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का विरोध कर रही है। E20 जनता पार्टी कोई राजनीतिक दल नहीं है। यह भारत में नागरिकों और वाहन मालिकों द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल कैंपेन (नागरिक आंदोलन) है।
E20 जनता पार्टी ने पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति (E20) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने सरकार से पेट्रोल पंपों पर 100% शुद्ध पेट्रोल (बिना एथनॉल वाला) का विकल्प भी उपलब्ध कराने की मांग की है। इतना ही नहीं पार्टी ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का इस्तीफा भी मांगा है। खास बात यह है कि इस कैंपेन को कॉकरोच जनता पार्टी ने भी समर्थन‍ किया है। 
 

51000 से ज्यादा फॉलोअर्स

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसके 51000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। इस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे किसी तरह की सब्सिडी, मुफ्त ईंधन या एथनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को पूरी तरह बंद करने की मांग नहीं कर रहे हैं। इस मुहिम को ट्रांसपोर्टरों का भी बड़ा समर्थन मिल रहा है। 'दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन' ने E20 पेट्रोल के विरोध में 4 अगस्त को संसद मार्च निकालने का ऐलान किया है।
 
पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की वजह से गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है। गाड़ियों की देखभाल का खर्च बढ़ गया है और खासकर पुरानी गाड़ियों के इंजन की परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ रहा है।

क्या हैं ईजेपी की प्रमुख मांगें?

  • इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल का विकल्प : समूह की सबसे बड़ी मांग यह है कि पेट्रोल पंपों पर E20 (20% इथेनॉल मिलावटी पेट्रोल) के साथ-साथ ग्राहकों को 100% प्योर पेट्रोल खरीदने की भी आजादी मिले।
  • पारदर्शिता और सही डेटा : गाड़ियों के माइलेज में कमी, इंजन में जंग या खराबी और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए मांग की जा रही है कि सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग के असर और माइलेज पर इंडिपेंडेंट स्टडीज के डेटा सार्वजनिक करे।
  • विकल्प की मांग, विरोध नहीं : ग्रुप का कहना है कि वे इथेनॉल ब्लेंडिंग को पूरी तरह बंद करने या किसी सब्सिडी की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ उपभोक्ता के अधिकार की मांग कर रहे हैं ताकि वाहन मालिक अपने व्हीकल मैनुअल और जरूरत के हिसाब से ईंधन चुन सकें।
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