मौत का जाम, ब्रांडेड बोतलों में 'जहर' परोस रहा इंदौर का माफिया, जाम छलकाने से पहले हो जाएं अलर्ट!
इंदौर में नकली शराब की फैक्ट्री का खुलासा, ब्रांड्स के लेबल लगाकर थी खपाने की साजिश, इंटरनेशन तस्करी की आशंका
अगर आप इंदौर में रहते हैं और जाम छलकाने के शौकीन हैं, तो ठहर जाइए! क्योंकि आपकी अगली घूंट जिंदगी की आखिरी घूंट साबित हो सकती है। जिसे आप ब्रांडेड और महंगी शराब समझकर मोटी रकम चुका रहे हैं, मुमकिन है कि वह किसी कोने में बैठ कर बनाई गई जानलेवा नकली शराब हो। सियागंज के व्यापार से लेकर पब कल्चर तक के लिए मशहूर इंदौर में अब 'मौत की फैक्ट्री' का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने पूरे शहर के होश उड़ा दिए हैं।
प्रशासन ने एक ऐसी हाईटेक अवैध फैक्ट्री को बेनकाब किया है, जहां नामी-गिरामी ब्रांड्स के फर्जी लेबल और ढक्कन लगाकर बड़े पैमाने पर नकली शराब को असली बताकर खपाने की गहरी साजिश रची जा रही थी। मामला सिर्फ स्थानीय मिलावट का नहीं है, बल्कि इसके तार इंटरनेशनल स्मगलिंग (अंतरराष्ट्रीय तस्करी) से जुड़े होने की भी गंभीर आशंका है। दरअसल, इंसानी जिंदगियों का सौदा करने वाला एक बड़ा सिंडिकेट यहां सक्रिय है। ज़हरीली शराब का यह काला कारोबार कब आपकी दहलीज तक पहुंच जाए, कहा नहीं जा सकता। इंदौर को हिलाकर रख देने वाले इस पूरे रैकेट की इनसाइड स्टोरी...
ब्रांडेड बोतलों में धोखा: नामी ब्रांड्स के हुबहू लेबल और ढक्कन लगाकर नकली शराब बेचने का नेटवर्क सक्रिय।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: मामले में सिर्फ लोकल डीलर नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर शराब तस्करी के तार जुड़े होने का अंदेशा।
जनता को सीधा अलर्ट: ज़हरीली शराब से जान जाने का सीधा खतरा, पाठकों और शौकीनों को बेहद सतर्क रहने की चेतावनी।
नकली शराब बेचने वालों पर इंदौर में कार्रवाई की गई है। जांच में मध्य प्रदेश और राजस्थान के नकली लेबल बरामद होने के कारण एक बड़े संगठित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है, जिसके तहत मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी गई है।
इंदौर के पॉश और विकसित आवासीय क्षेत्र तुलसीनगर में बड़े पैमाने पर चल रहे एक अवैध शराब निर्माण नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी कामयाबी मिली है। जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने बेहद मुश्तैदी दिखाते हुए समय रहते इस सुनियोजित कार्रवाई को अंजाम दिया।
रेकी कर दबोचा पुलिस टीम ने : बता दें कि इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए आबकारी विभाग की टीमों ने लगभग तीन दिनों तक तुलसीनगर इलाके में सिविल ड्रेस यानी सादे कपड़ों में रहकर गोपनीय निगरानी रखी। इस दौरान संदिग्ध गतिविधियों की बारीकी से पुष्टि की गई। पूरी प्लानिंग के साथ एक तीन मंजिला आलीशान भवन के भीतर दबिश दी गई। जैसे ही टीम घर के अंदर दाखिल हुई, वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। उस रिहायशी मकान के भीतर अवैध रूप से शराब का निर्माण और उसकी पैकेजिंग करने की पूरी यूनिट संचालित की जा रही थी।
नकली होलोग्राम ब्रांडेड कैप और ब्लेंडर मशीनें मिलीं : तलाशी के दौरान टीम ने 144 बल्क लीटर यानी लगभग 16 पेटी तैयार मदिरा जब्त की। इसके साथ ही भारी मात्रा में स्प्रिट, कैरेमल, पैकेजिंग सामग्री और हजारों की संख्या में नामी कंपनियों के डुप्लीकेट लेबल एवं होलोग्राम बरामद किए गए। कार्रवाई में विभिन्न नामी अंग्रेजी शराब ब्रांडों के बॉटल कैप, कागजी कार्टून और दो बड़ी ब्लेंडर मशीनें भी हाथ लगी हैं। बरामद की गई सामग्री से यह खुलासा हुआ है कि यहां अवैध रूप से शराब बनाकर उसे असली और वैध उत्पाद बनाकर ऊंचे दामों में खपाने की साजिश थी।
विभाग को अंतरराज्यीय तस्करी की आशंका : मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिकने वाली शराब के लेबलों के साथ-साथ राजस्थान राज्य में प्रचलित विभिन्न ब्रांडों के नकली लेबल, होलोग्राम और पैकेजिंग सामग्री भी भारी मात्रा में मिली है। इससे जांच अधिकारियों को आशंका है कि यह महज स्थानीय स्तर का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा संगठित अंतरराज्यीय अवैध शराब निर्माण और तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों, निर्माण की तकनीक, वितरण की पूरी श्रृंखला और इसमें शामिल अन्य रसूखदार व्यक्तियों की भूमिका की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल
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