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राम मंदिर चढ़ावा विवाद, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा, क्या है इन दोनों का इतिहास
Champat Rai Anil Mishra Resignation: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के चलते चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव (General Secretary) पद से इस्तीफा दे दिया है। राय के साथ ही ट्रस्ट के एक प्रमुख और प्रभावशाली सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने भी पद से इस्तीफा दे दिया है। दरअसल, चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर के बाद से ही माना जा रहा था कि ये दोनों वरिष्ठ पदाधिकारी अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। इस बीच, खबर है कि अब ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाएगा।
हालांकि चंपत राय और अनिल मिश्रा पर सीधे तौर पर कोई वित्तीय आरोप दर्ज नहीं है, लेकिन उनके अधीन काम करने वाली टीम और करीबियों द्वारा इतने बड़े गबन को अंजाम देने और निगरानी में भारी चूक के कारण उन पर भारी दबाव था। अंततः नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दोनों ने ट्रस्ट से अपना त्यागपत्र दे दिया। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध
क्या है चढ़ावा चोरी से जुड़ा पूरा मामला?
यह विवाद 7 जून 2026 को तब गरमाया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपए का चंदा और कीमती सामान गायब है। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जांच की मांग की।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
विवाद बढ़ता देख 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को एक 3-सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया। एसआईटी ने अयोध्या में 6 दिनों तक डेरा डालकर वित्तीय दस्तावेजों, दानपात्रों के खुलने और नकदी के रख-रखाव से जुड़े रिकॉर्ड्स की गहन जांच की और ट्रस्ट के सदस्यों से पूछताछ की। SIT की रिपोर्ट के आधार पर, ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई। 26 जून 2026 को पुलिस और एसआईटी ने नामजद सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनके नाम हैं— रमाशंकर यादव (टिन्नू), अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमा शंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष यादव। ALSO READ: हे राम! चढ़ावा चोरी के बाद अब 40% कमीशन के आरोप से गरमाई अयोध्या
क्या है चंपत राय का इतिहास?
चंपत राय बंसल अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ और कद्दावर नेता हैं। वे पिछले कई दशकों से राम जन्मभूमि आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा भी रहे हैं। चंपत राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं। युवावस्था में वे कॉलेज में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर थे, लेकिन राम मंदिर आंदोलन और सामाजिक कार्यों के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता (प्रचारक) बन गए।
जब साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने मंदिर निर्माण के लिए 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का गठन किया, तो चंपत राय को इसका महासचिव बनाया गया। जनवरी 2024 में हुए भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से लेकर मंदिर के निर्माण कार्य, बजट और प्रबंधन की पूरी कमान उन्हीं के हाथों में थी। हाल ही में राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे और वित्तीय गबन का एक बड़ा घोटाला सामने आया, इसमें चंपत राय का नाम भी आया है। इसकी जांच यूपी सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) कर रही है।
क्या है अनिल मिश्रा का इतिहास?
डॉ. अनिल कुमार मिश्रा अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक प्रमुख और प्रभावशाली सदस्य (ट्रस्टी) रहे हैं। हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे से जुड़े विवादों के कारण वे काफी चर्चा में आए हैं। डॉ. मिश्रा पिछले लगभग चार दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राम जन्मभूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। वे अवध प्रांत के 'प्रांत कार्यवाह' (प्रांतीय कार्यकारी प्रमुख) भी रह चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश के होम्योपैथिक विभाग से एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और अयोध्या (फैजाबाद) में ही निवास करते हैं।
जनवरी 2024 में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले होने वाले अनुष्ठानों में डॉ. अनिल मिश्रा को मुख्य 'यजमान' चुना गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य समारोह में शामिल होने से पहले के सभी शुरुआती अनुष्ठान उन्हीं की देखरेख में संपन्न हुए थे। वे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ मिलकर मंदिर निर्माण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने वाले प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं।
मंदिर निर्माण से जुड़े एक पूर्व इंजीनियर ने भी उन पर वित्तीय गड़बड़ी और कमीशनखोरी के आरोप लगाए थे। इस चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के विवाद के बीच, जून 2026 में डॉ. अनिल मिश्रा और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
