63 संतों में से एक अनय नयनार का परिचय

anaya nayanar
Last Updated: बुधवार, 8 जनवरी 2020 (17:40 IST)
- आर. हरिशंकर

अनया एक शैव संत है और उन्हें 63 नयनारों में से एक माना जाता है। वह भगवान शिव के नाम और मंत्र को अपनी बांसुरी से बजाते थे और ऐसे लगता था जैसे वे भगवान श्रीकृष्ण हों।

जीवन
अनया समुदाय से थे। अनया का जन्म और पालन पोषण त्रिची में हुआ था। त्रिची में कई पवित्र मंदिर है जैसे मलाईकोट्टाई विनायक मंदिर। और समवेदेश्वर मंदिर भी शामिल है जो एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है।


वह अपनी गायों की देखभाल करते और गाय के दूध के साथ अपनी आजीविका के लिए कमाते थे और वे समवेदेश्वर मंदिर में भगवान शिव के अभिषेकम के लिए कुछ दूध दिया करते थे। अयनार अपने शरीर पर पवित्र राख लगाते और रुद्राक्ष को गले में पहनते थे।

उनके मधुर संगीत के कारण, आस-पास के गांव के लोग भी आकर्षित होत और उनके संगीत को सुनते थे। यहां तक की उनके संगीत से पशु और पक्षियों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया, यह सब उन्हें घेर लेते और उनके संगीत को सुनते थे। ऐसा माना जाता है कि स्वर्ग से आए डेमी देवता भी उनके बांसुरी संगीत को सुनने के लिए उनके सामने प्रकट हुए थे।


उनकी ईमानदारी और शुद्ध भक्ति की सराहना में,, भगवान शिव माता पार्वती के साथ प्रकट हुए और उन्होंने अनयार को आशीर्वाद दिया। अपनी मृत्यु के बाद, वह भगवान शिव के पवित्र निवास कैलाश में पहुंचे। शिव मंदिरों में, की मूर्ति भगवान कृष्ण के समान बनाई गई, क्योंकि वे बांसुरी बजाते हुए थे। लोगों द्वारा अन्य नयनारों के साथ साथ ही शिव मंदिर में अनाया नयनार की पूजा विशेष रूप से तमिल महीने कार्तिगई में की जाती है।

महत्वपूर्ण
शिव की प्रशंसा में गायों की देखभाल करने और बांसुरी बजाने के अलावा, वह एक अच्छे स्वभाव और मृदुभाषी व्यक्ति थे। वह भगवान शिव के सच्चे भक्त थे और उनकी भावना हमेशा शिव से ही जुड़ी हुई थी। उन्होंने कभी भी अवांछित चीजों के बारे में नहीं सोचा और अपना पूरा जीवन भगवान शिव को समर्पित करने में लगा दिया। आइए हम महान नयनार संत की पूजा करें और धन्य हो।
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