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होली की रात करें ये 5 चमत्कारिक उपाय, मिलेगा जीवन में यश, धन, सम्मान सबकुछ

सोमवार,फ़रवरी 24, 2020
Holi 2020 Remedies
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फुलैरा दूज से गुलरियां बनाकर सुखाई जाती है, मध्यप्रदेश निमाड़ अंचल में इस बड़बुले कहते हैं। जिनमें गोबर से कई प्रकार की आकृतियां बनाकर माला बनाई जाती है। दो दीयों को मिलाकर उसमें कंकड़ डाल कर नारियल बनाया जाता है। उसी तरह पान, बरफी, मठरी, लड्डू सब ...
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साल 2020 में 25 फरवरी को फुलैरा दूज का त्योहार मनाया जाएगा। हम आपको बता रहे हैं फुलैरा दूज पर क्या करें और क्या न करें।
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फुलेरा दूज एक शुभ पर्व है, जिसे उत्तर भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है।यह त्योहार भगवान कृष्ण को समर्पित है।
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फुलैरा दूज के दिन से ही लोग होली के रंगों की शुरुआत कर देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से ही भगवान कृष्ण होली की तैयारी करने लगते थे और होली आने पर पूरे गोकुल को गुलाल से रंग देते थे।
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होली का रंगबिरंगा सजीला पर्व इस साल 9 और 10 मार्च 2020 को है। आइए जानते हैं रंगों से जुड़ी खास रोचक बातें...रंगों की पसंद से जान सकते हैं अपनी गर्लफ्रेंड को...
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आइए जानते हैं, वर्ष 2020 में कब मनाई जाएगी होली और किस दिन होगा होलिका दहन और क्या हैं शुभ मुहूर्त
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इस वर्ष 9 मार्च 2020, सोमवार को होलिका दहन किया जाएगा तथा 10 मार्च 2020, मंगलवार को रंगबिरंगा त्योहार होली हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। आइ ए जानते हैं 9 मार्च 2020 को कब दहन करें होली....
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शबरी का जिक्र तो आपने रामायण के दौरान सुना, जाना और पढ़ा ही होगा आइए आज जानते हैं उनके बारे में विस्तार से...
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महाशिवरात्रि और बाद में हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्‍त के समय अपने घर में बैठकर अपने गुरुदेव का स्मरण करके शिवजी का स्मरण करते समय ये 17 मंत्र बोलें। 'जो शिव है वो गुरु है, जो गुरु है वो शिव है' इसलिए हम गुरुदेव का स्मरण करते हैं।
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अमावस्या माह में एक बार ही आती है। मतलब यह कि वर्ष में 12 अमावस्याएं होती हैं। शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है। मतलब यह कि यह अमावस्याएं श्राद्ध, दान और स्नान हेतु होती है।
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यूं तो साल के 12 महीनों में 12 अमावस्याएं आती हैं, लेकिन उनमें से कुछ श्राद्ध कर्म, पितृ-तर्पण आदि कार्यों के लिए बहुत खास मानी जाती हैं। फाल्गुन अमावस्या उन्ही में से एक है।
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बैराठ। राजस्थान प्रांत के जयपुर जिले में अरावली की पहाड़ियों में बैराठ नामक एक नगर है जिसे प्राचीनकाल में विराटनगर कहा जाता था। कहते हैं कि यहां पांचों पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय बिताया था। इस दौरान उन्होंने वहां एक शिवलिंग की स्थापना की थी। ...
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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार अमावस्या के दिन चंद्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका क्षय और उदय नहीं होता है उसे अमावस्या कहा गया है। अमावस्या माह में एक बार ही आती है।
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यह अमावस्या सुख, संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी है। जीवन में सुख और शांति के लिए फाल्गुन अमावस्या का व्रत रखा जाता है।
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फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 21 फरवरी, शुक्रवार यानी आज है। आइए जानते हैं, राशि के अनुसार भगवान शिव को कैसे मनाएं अपने लिए.. .
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21 फरवरी की शाम 5:20 मिनट पर चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। जो 22 फरवरी को शाम 7 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगी। रात्रि में पूजन का समय 12 बजकर 9 मिनट से रात्रि एक के बीच रहेगा।
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23 फरवरी के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। प्रस्तु‍त हैं फाल्गुन अमावस्या के 2 सरल उपाय...
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रामायण में प्रसंग आता है कि भगवान श्रीराम ने शबरी के झूठे बैर खाएं थे। आओ जानते हैं माता शबरी के बारे में 5 रहस्य।
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महाशिवरात्रि का दिवस होना भी आवश्यक नहीं है। पुराण में 4 प्रकार की शिवरात्रि पूजन का वर्णन है। मासिक शिवरात्रि, प्रथम आदि शिवरात्रि तथा महाशिवरात्रि। पुराण वर्णित अंतिम शिवरात्रि है- नित्य शिवरात्रि।
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