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80वां स्वतंत्रता दिवस 2026: 15 अगस्त आजादी से जुड़ी 10 रोचक बातें, जो हर भारतीय को जाननी चाहिए

The image features Mahatma Gandhi, Bhagat Singh 'Azad', Subhash Chandra Bose, and Jawaharlal Nehru, with the Tricolour, the Red Fort, and a fighter jet in the background.
भारत 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) मना रहा है। 1947 में भारत के ऐसे कई क्षेत्र थे जो भारतीय संघ में शामिल नहीं हुए थे। इसी के साथ यह भी जानिए कि कैसे हम एक गणतंत्र राष्ट्र बने और किस तरह झंडा हो गया तिरंगा। आजादी की इस गौरवशाली यात्रा से जुड़ी ऐसी 10 बेहद दिलचस्प और रोचक बातें, जो हर भारतीय को पता होनी चाहिए।

1. 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई?

भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख चुनी थी। इसका मुख्य कारण यह था कि 15 अगस्त 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) में जापान की सेना ने मित्र राष्ट्रों (Allied Forces) के सामने आत्मसमर्पण किया था। माउंटबेटन इस दिन को अपने लिए शुभ मानते थे। हालांकि कुछ ज्योतिषियों ने भी इसी 15 की सलाह दी थी।
 

2. स्वतंत्रता दिवस vs गणतंत्र दिवस: ध्वजारोहण में बड़ा अंतर

15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के ध्वजारोहण में दो बड़े अंतर होते हैं:
15 अगस्त: प्रधानमंत्री लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज को नीचे से ऊपर खींचकर फहराते हैं, जिसे ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहते हैं।
26 जनवरी: राष्ट्रपति राजपथ (कर्तव्य पथ) पर पहले से बंधे हुए झंडे की गांठ खोलकर फहराते हैं, जिसे ध्वज फहराना (Flag Unfurling) कहते हैं।
 

3. आजादी के समय राष्ट्रगान नहीं था

15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, तब हमारे पास कोई आधिकारिक राष्ट्रगान (National Anthem) नहीं था। हालांकि, रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया 'जन गण मन' 1911 में ही रचा जा चुका था, लेकिन इसे 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक रूप से भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया।
 

4. 15 अगस्त 1947 को महात्मा गांधी जश्न में शामिल नहीं थे

जब 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दिल्ली में नहीं थे। वे बंगाल के नोआखली में हिंदू-मुस्लिम दंगों को शांत कराने और शांति स्थापित करने के लिए भूख हड़ताल पर बैठे थे।
 

5. पांच अन्य देश भी इसी दिन मनाते हैं आजादी

15 अगस्त सिर्फ भारत का ही स्वतंत्रता दिवस नहीं है! दुनिया के 5 अन्य देश भी 15 अगस्त को ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं:
दक्षिण कोरिया (South Korea) और उत्तर कोरिया (North Korea) (जापान से 1945 में आजादी)
बहरीन (Bahrain) (ब्रिटेन से 1971 में आजादी)
कांगो गणराज्य (Republic of the Congo) (फ्रांस से 1960 में आजादी)
लिकटेंस्टीन (Liechtenstein) (जर्मनी से 1866 में आजादी)
 

6. भारत और पाकिस्तान की आजादी एक साथ हुई थी

15 अगस्त 1947 की आधी रात (12:00 AM) को ही दोनों देश आजाद घोषित किए गए थे। लेकिन पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है, क्योंकि लॉर्ड माउंटबेटन ने 14 अगस्त को कराची जाकर सत्ता हस्तांतरित की थी ताकि वे 15 अगस्त को दिल्ली में उपस्थित रह सकें।
 

7. भारतीय तिरंगे से जुड़े कड़े नियम

हमारा राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' विशेष रूप से खादी (सूती या रेशमी) कपड़े का ही बना होना चाहिए। कर्नाटक का 'कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ' (KGSS) देश की एकमात्र ऐसी संस्था है जिसे आधिकारिक तौर पर तिरंगा बनाने और आपूर्ति करने का प्रमाण पत्र प्राप्त है।
 

8. पंडित नेहरू का ऐतिहासिक भाषण "Tryst with Destiny"

14 अगस्त 1947 की आधी रात को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संसद भवन से अपना प्रसिद्ध भाषण दिया था, जिसे "Tryst with Destiny" (नियति से वादा) के नाम से जाना जाता है। इसे 20वीं सदी के सबसे महान भाषणों में गिना जाता है।
 

9. 1947 में रुपये की कीमत डॉलर के बराबर थी?

एक बहुत लोकप्रिय मिथक है कि 1947 में 1 डॉलर = 1 रुपया था। दरअसल, उस समय भारत का रुपया अमेरिकी डॉलर से नहीं, बल्कि ब्रिटिश पाउंड (GBP) से बंधा हुआ था और 1 पाउंड की कीमत 13.33 रुपए थी। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की दर उस वक्त लगभग 3.30 से 4 के आसपास थी।
 

10. 1947 में आजादी के समय भारत में विलय नहीं हुए थे ये क्षेत्र:

आजादी के समय भारत में कुल 565 देसी रियासतें थीं। सरदार वल्लभभाई पटेल और वी. पी. मेनन के प्रयासों से इनमें से 552 रियासतों (जो भौगोलिक रूप से भारत की सीमा में थीं) का भारतीय संघ में विलय कराया गया।इनमें से अधिकतर ने 15 अगस्त 1947 से पहले ही 'इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसिन' (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर कर दिए थे। हालांकि, कुछ प्रमुख रियासतों का विलय 1947 के बाद हुआ:-
 
15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत आजाद जरूर हो गया था, लेकिन गोवा पुर्तगालियों के अधीन था और हैदराबाद निजाम के शासन में था। 
गोवा को 1961 में (ऑपरेशन विजय द्वारा) और हैदराबाद को सितंबर 1948 में (ऑपरेशन पोलो द्वारा) भारत संघ में शामिल किया गया।
जूनागढ़ (गुजरात): फरवरी 1948 में जनमत संग्रह (Referendum) के बाद विलय हुआ।
जम्मू और कश्मीर: 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह द्वारा विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद जुड़ा।
मणिपुर: सितंबर 1949 में आधिकारिक रूप से विलय समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
कलत और अन्य छोटी रियासतें (जैसे भोपाल, त्रावणकोर आदि): इन्हें 1947 से 1949 के बीच पूरी तरह भारत में मिला लिया गया।
 

फ्रांसीसी उपनिवेश (French Possessions)— कुल 5 क्षेत्र

चंद्रनगर: 1949 में जनमत संग्रह के बाद 1950/1952 में भारत को सौंपा गया।
पुडुचेरी (Puducherry)
कराईकल (Karaikal)
माहे (Mahe)
यनाम (Yanam)
(1 नवंबर 1954 को ये चारों क्षेत्र भारत को सौंपे गए और 1962 में कानूनी रूप से इनका विलय हुआ।)
 

पुर्तगाली उपनिवेश (Portuguese Possessions)— कुल 3 क्षेत्र

दादरा और नगर हवेली: 1954 में स्थानीय राष्ट्रवादियों द्वारा आजाद कराया गया और 1961 में भारत में विलय हुआ।
गोवा: 19-20 दिसंबर 1961 को 'ऑपरेशन विजय' (सैन्य कार्रवाई) के ज़रिए भारत का हिस्सा बना।
दमन और दीव: 1961 में ही गोवा के साथ आजाद कराकर भारत में शामिल किया गया।
3. अन्य स्वतंत्र क्षेत्र
सिक्किम: 1947 के बाद भारत का एक 'संरक्षित राज्य' (Protectorate) था। 1975 में 36वें संविधान संशोधन के जरिए सिक्किम पूर्ण रूप से भारत का 22वां राज्य बना।
 
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