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आजाद भारत का 63वाँ साल कैसा होगा

मंगलवार,सितम्बर 1, 2009
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आजादी के 62 वर्षों में भारतीय दर्शन के छह अंगों में से एक 'योग' की शिक्षा-दीक्षा आश्रम-जंगलों से निकल कर अब क्लास रूम और रिसॉर्टों में पहुँच गई है। भारत की आजादी के बाद योग के स्वरूप और प्रचार-प्रसार में बहुत हद तक बदलाव हो चुका है। पहले योग ...
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अमेरिकी मंदी का असर भारत सहित पूरे विश्व पर हुआ, लेकिन भारतीय परिपेक्ष्य में यह असर शेयर बाजार, इंपोर्ट और एक्पोर्ट, आउसोर्सिंग बिजनेस पर ही ज्यादा दिखाई दिया। एक समय 21000 के स्तर पर चल रहा सेंसेक्स मार्च 2009 तक 8000 के स्तर पर आ गया, याने डाउ ...
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भारत को आजाद हुए 62 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। भार‍त ने चारों ओर अपने पराक्रम और भारतीय संस्कृति का परिचय लहराया है। इससे संपूर्ण विश्व मंडल के पटल पर भार‍त छा गया है। चाहे वो आईटी क्षेत्र हो, व्यापार हो या फिर हम इंडियन फूड की ही बात क्यों न करें। ...
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यदि कुछ वर्ष पहले यदि दुनिया के किसी कोने में ‘बॉलीवुड’ शब्द बोला जाता तो सामने वाला उसे हॉलीवुड ही सुनता क्योंकि बॉलीवुड उसके लिए एक अनुसना शब्द था। हाल ही के वर्षों में दुनिया एक छोटे परिवार में तब्दील हो गई है। इंटरनेट और मोबाइल के जरिये ...
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स्‍वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत में महात्‍मा गाँधी ने ग्रामीण भारत के वि‍कास को प्रेरि‍त करने के लि‍ए वैज्ञानि‍क शक्ति‍यों के दोहन की आवश्‍यकता पर प्रकाश डालते हुए 'जन आंदोलन के लि‍ए वि‍ज्ञान' का मंत्र दि‍या था। नि‍श्चि‍त रूप से वि‍ज्ञान का कि‍सी भी ...
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पि‍छले 62 सालों में भारत की उपलब्‍धि‍याँ तो बहुत हैं। लि‍खने बैठे तो कई कि‍ताबें लि‍खी जा सकती हैं। भारत वर्ष दर वर्ष वि‍कास के नए आयाम गढ़ रहा है। चंद्रयान और परमाणु पनडुब्‍बी कुछ ऐसी परि‍योजनाएँ है जि‍नके कारण पूरा वि‍श्व भारत को उभरती महाशक्ति‍ ...
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इस स्वतंत्रता दिवस पर हमारी ‍मुख्य चिंता का विषय स्वाइन फ्लू है। एक आयाति‍त बीमारी। देखा जाए तो स्वाइन फ्लू देश पर आई कोई नई विपदा नहीं है। इससे पहले भी देश ने कई महामारियाँ झेली हैं। सवाल यह उठता है कि हमारे देश की प्रतिरोधक क्षमता इतनी कम क्यों है ...
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15 अगस्त 1947 की आधी रात को अंग्रेजी चंगुल से आज़ाद हुआ भारत आज तरक्की के शिखर पर है। भारत ने तकनीक के लगभग हर क्षेत्र में अपना परचम फहराया है। इसके तकनीकी वैज्ञानिकों ने इसे तकनीक के क्षेत्र में बुलन्दियों पर पहुँचाया है। अक्टूबर 2008 में भेजा ...
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देश में बीते छह दशक से जारी जश्न-ए-आजादी के सिलसिले में लाल किले की प्राचीर से सबसे ज्यादा 17 बार तिरंगा लहराने का मौका प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को मिला, वहीं उनकी पुत्री इंदिरा गाँधी ने भी राष्ट्रीय राजधानी स्थित सत्रहवीं शताब्दी ...
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पूरा देश 15 अगस्त 1947 को जब आजादी का जश्न मना रहा था. उस समय एक शख्स ऐसा भी था। जो ब्रिटिश शासन की गुलामी से मुक्ति के इस महोत्सव में शामिल नहीं था। वह बडी़ खामोशी के साथ राजधानी दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर कोलकाता में हिन्दुओं और मुसलमानों के ...
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15 अगस्‍त को हमारा 63वाँ स्वतंत्रता दिवस है। एक राष्ट्र की स्वतंत्रता बुजुर्ग हो रही है लेकिन उसकी राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायपालिका में जिस गति से परिपक्वता और गंभीरता आनी थी, अफसोस कि वह नहीं आ सकी। यह दिवस राष्ट्र का गौरव दिवस होता है ...
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इन 62 वर्षों में देश के लगभग हर हिस्से में अलोकतांत्रिक व्यवहार और हिंसा के चलते मनमानी तंत्र ही नजर आया। इस मनमानी के चलते ‍देश में अलगाववादी प्रवृत्तियाँ पनपती रहीं और देश को विखंडित किए जाने का दुष्चक्र चल रहा है। क्या आजादी का यही मतलब है कि हम ...
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आजादी के 62 वर्ष बाद यदि हम अपनी स्वतंत्रता की समीक्षा करते हैं तो पता चलता है कि इस स्वतंत्रता का हमने कितना दुरुपयोग किया है। वर्तमान दौर में आम जनता यही सोचती है कि स्वतंत्र हैं नेता, गुंडे, नौकरशाह, धर्म के ठेकेदार, पुलिस और तमाम रसूखदार लोग, ...
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झंडा फहराने का सही तरीका

बुधवार,अगस्त 12, 2009
भारत के राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक राष्ट्रीय झंडा भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिरूप है। सभी के मार्गदर्शन और हित के लिए भारतीय ध्वज संहिता-2002 में सभी नियमों, रिवाजों, औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है। ध्वज ...
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इस बात को हमेशा ध्‍यान रखो कि राष्‍ट्र झोपडि़यों में बसता है। किसान, जूते बनाने वाले, मेहतर, और भारत के ऐसे ही निचले वर्गों में तुमसे कहीं ज्‍यादा काम करने और स्‍वावलंबन की क्षमता है। वे लोग युग-युग से चुपचाप काम करते रहे हैं। वे ही हैं, जो इस देश ...
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आज़ादी का तोहफ़ा

बुधवार,अगस्त 12, 2009
विशेष दिन पैदा होने पर घरवालों ने उन्हें ‘आज़ादी का तोहफ़ा’ कह दिया था। शिक्षा-दीक्षा और संस्कार अच्छे मिले। देश-प्रेम और राष्ट्रभावना तो बचपन से ही नस-नस में दौड़ती रही। पर ये सबकुछ अब प्रासंगिक नहीं था। उनके स्वतंत्र विचारों और समाजहित में किए ...
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भारत भूमि

बुधवार,अगस्त 12, 2009
माँ हम विदा हो जाते हैं, हम विजय केतु फहराने आज। तेरी बलिवेदी पर चढ़कर माँ निज शीश कटाने आज॥ मलिन वेश ये आँसू कैसे, कंपित होता है क्यों गात? वीर प्रसूति क्यों रोती है, जब लग खंग हमारे हाथ॥ धरा शीघ्र ही धसक जाएगी, टूट जाएँगे न झुके तार। विश्व काँपता ...
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आजादी के पिछले 62 वर्षों में भारत ने नित नए प्रगति के सोपान तय किए हैं। किन्तु हम संतोष की साँस ले सके या गौरव के परचम लहरा सके ऐसे क्षण अँगुलियों पर गिने जाने योग्य ही निर्मित हुए है यह भी एक उतना ही कठोर सच है। इन साठ वर्षों में जनता को नेता ...
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