20 मार्च को है होली, पढ़ें होलिका दहन की प्रामाणिक और सरल पूजन विधि



रंगों की होली खेलने से पूर्व होलिका पूजन की परंपरा प्रचलित है। होलिका पूजन में इन 10 बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानें विस्तार से...
1 . होलिका दहन करने से पहले होली की पूजा की जाती है। पूजा करते समय पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

2. पूजा सामग्री :
एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग करना चाहिए। इसके अति‍रिक्त नई फसल के धान्यों जैसे पके चने की बालियां व गेहूं की बालियां भी सामग्री के रूप में रखी जाती हैं।
3. इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल तथा अन्य खिलौने रख दिए जाते हैं।

4. समय में जल, मौली, फूल, गुलाल तथा ढाल व खिलौनों की चार मालाएं अलग से घर से लाकर सु‍‍रक्षित रख लेना चाहिए।

5 . इनमें से एक माला पितरों के नाम की, दूसरी हनुमानजी के नाम की, तीसरी शीतलामाता के नाम की तथा चौथी अपने घर-परिवार के नाम की होती है।
6 . कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना चाहिए।

7 . फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित करें।

8 . रोली, अक्षत व पुष्प को भी पूजन में प्रयोग किया जाता है। गंध-पुष्प का प्रयोग करते हुए पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन किया जाता है। पूजन के बाद जल से अर्घ्य दें।

9. होलिका दहन होने के बाद होलिका में जिन वस्तुओं की आहुति दी जाती है, उनमें कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग प्रमुख है। सप्तधान्य : गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर भी अर्पित करें।
10. होलिका के चारों ओर परिक्रमा करनी चाहिए। अगले दिन होली की भस्म लाकर चांदी की डिबिया में रखना चाहिए।

 

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