मां विंध्यवासिनी की पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्तों की सोई हुई किस्मत जगाने वाली और तुरंत फल देने वाली महासाधना है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में गंगा किनारे बसी मां विंध्यवासिनी का दरबार देश के सबसे जाग्रत शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। आइए जानते हैं माता से जुड़े अनसुने रहस्य, पौराणिक कथाएं और उनके प्रमुख धाम।
पौराणिक इतिहास और जन्म रहस्य
श्रीकृष्ण की रक्षक बहन: द्वापर युग में जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब विष्णु जी की आज्ञा से 'योगमाया' ने माता यशोदा के गर्भ से पुत्री रूप में जन्म लिया। कंस से बालकृष्ण की रक्षा के लिए वासुदेव जी ने दोनों बच्चों को आपस में बदल दिया था।
कंस को दी चुनौती: जब कंस ने कारागार में इस नवजात कन्या को पत्थर पर पटकना चाहा, तो वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में विलीन हो गई। उन्होंने अपना असली रूप प्रकट कर कंस को चेतावनी दी कि उसका काल (श्रीकृष्ण) जन्म ले चुका है।
विभिन्न नाम: इन्हें श्रीकृष्ण की बहन होने के कारण 'कृष्णानुजा' और श्रीमद्भागवत में 'नंदजा' व 'एकानंशा' कहा गया है। इन्होंने ही श्रीकृष्ण की अदृश्य शक्ति बनकर कंस और उसके असुरों का संहार कराया था।
सती का अंश: शिवपुराण के अनुसार इन्हें माता सती का अंश मानकर 'वनदुर्गा' भी कहा जाता है। देवताओं के अनुरोध पर माता ने पृथ्वी कल्याण के लिए विंध्याचल पर्वत को अपना स्थाई निवास चुना।
पूजा का महत्व और प्रमुख अनुष्ठान
तुरंत फलदायी साधना: मां विंध्यवासिनी नागवंशीय राजाओं की कुलदेवी हैं। इनकी साधना बहुत जल्दी सिद्ध होती है।
मुख्य रस्में: पूजा में दूध, जल और शहद से अभिषेक, कुमकुम अर्चन और अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है।
महामंत्र: सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए इन मंत्रों का जाप किया जाता है:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चै" या "ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः"
कहाँ-कहाँ हैं मां विंध्यवासिनी के जाग्रत धाम?
1. मुख्य धाम: विंध्याचल (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश)
यह काशी और प्रयाग के बीच, गंगा नदी के तट पर विंध्य पहाड़ियों में स्थित है।
अनोखा रहस्य: शास्त्रों के अनुसार, अन्य शक्तिपीठों में देवी के केवल अंगों की प्रतीक रूप में पूजा होती है, लेकिन विंध्याचल इकलौता ऐसा स्थान है जहाँ देवी के पूरे विग्रह (संपूर्ण रूप) के दर्शन होते हैं।
यहाँ 3 किलोमीटर के दायरे में 'त्रिकोण यात्रा' होती है, जिसमें मुख्य मंदिर के साथ पहाड़ी पर महाकाली (कालीखोह) और अष्टभुजी देवी विराजमान हैं।
2. सफेद पहाड़ों का धाम: बांदा (राजस्थान)
बांदा जनपद के गिरवां क्षेत्र में सफेद पहाड़ों के बीच माता का एक दिव्य मंदिर है, जिसकी अलौकिक छटा भक्तों को अपनी ओर खींचती है।
3. ऊँची पहाड़ी का दरबार: सलकनपुर (सीहोर, मध्य प्रदेश)
भोपाल से 70 किलोमीटर दूर रेहटी तहसील के सलकनपुर गांव में माता का मंदिर 800 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ भक्त 1000 सीढ़ियाँ चढ़कर या रोपवे के ज़रिए माता के दर्शन करने पहुँचते हैं।